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रिटायर्ड डिप्टी सीएमओ व एओ से होगी 53 लाख की वसूली
Raebareli
Updated Fri, 13 Dec 2013 05:43 AM IST
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रायबरेली। स्वास्थ्य विभाग में फर्जी डॉक्टरों की तैनाती कर पांच साल तक वेतन के नाम पर 53 लाख रुपये डकारने के मामले में रिटायर्ड डिप्टी सीएमओ और तत्कालीन एकाउंट ऑफिसर (एओ) से घपले की धनराशि की वसूली होगी। घोटाले के मामले में केस दर्ज होने के बाद जेल जा चुके आरोपी डिप्टी सीएमओ और एक एओ के खिलाफ प्रमुख सचिव ने 53 लाख 45 हजार रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं। इसमें वर्तमान समय में लखनऊ में तैनात एओ से 19 लाख रुपये से अधिक की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
वर्ष 1999 से 2004 तक जिले के स्वास्थ्य विभाग में सबसे बड़ा घोटाला किया गया था। छह डॉक्टरों की फर्जी नियुक्ति दिखाकर तत्कालीन डिप्टी सीएमओ पंचम कार्यालय डॉ. पीएन मिश्रा, एओ सीजे यादव, बडे़ बाबू देवता और डिप्टी सीएमओ डॉ. डीएम त्रिपाठी नेे पांच साल तक लगातार फर्जी चिकित्सकों के नाम पर वेतन डकारा था। वर्ष 2004-05 में यह घोटाला पकड़ में आया था। जांच में 53 लाख रुपये से अधिक वेतन के नाम पर डकारने की पुष्टि हुई थी। मामले में डिप्टी सीएमओ रहे डॉ. पीएन मिश्रा के खिलाफ घोटाले का केस दर्ज किया गया था। इसमें डॉ. मिश्रा कई महीने तक जेल में भी बंद रहे। मामले के आरोेपी बडे़ बाबू देवता की मृत्यु हो चुकी है। डॉ. डीएम त्रिपाठी एक महीने के लिए डिप्टी सीएमओ का चार्ज लिए थे। एओ सीजे यादव वर्तमान समय में लखनऊ में एओ के पद पर कार्यरत हैं। सभी को घोटाले की पुष्टि के बाद निलंबित कर दिया गया था, लेकिन एओ ने जोड़तोड़ करके लखनऊ में तैनाती प्राप्त कर ली। फर्जी डॉक्टरों के वेतन के नाम पर 53 लाख रुपये के घोटाले में शासन ने तत्कालीन डिप्टी सीएमओ डॉ. पीएन मिश्रा व एओ सीजे यादव को दोषी पाया है। प्रमुख सचिव ने डिप्टी सीएमओ रहे डॉ. मिश्रा से 33 लाख 45 हजार रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं। इसके अलावा 19 लाख रुपये से अधिक की वसूली यहां तैनात रहे तत्कालीन एओ से कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वसूली का आदेश आने के बाद यहां स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
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वर्ष 1999 से 2004 तक जिले के स्वास्थ्य विभाग में सबसे बड़ा घोटाला किया गया था। छह डॉक्टरों की फर्जी नियुक्ति दिखाकर तत्कालीन डिप्टी सीएमओ पंचम कार्यालय डॉ. पीएन मिश्रा, एओ सीजे यादव, बडे़ बाबू देवता और डिप्टी सीएमओ डॉ. डीएम त्रिपाठी नेे पांच साल तक लगातार फर्जी चिकित्सकों के नाम पर वेतन डकारा था। वर्ष 2004-05 में यह घोटाला पकड़ में आया था। जांच में 53 लाख रुपये से अधिक वेतन के नाम पर डकारने की पुष्टि हुई थी। मामले में डिप्टी सीएमओ रहे डॉ. पीएन मिश्रा के खिलाफ घोटाले का केस दर्ज किया गया था। इसमें डॉ. मिश्रा कई महीने तक जेल में भी बंद रहे। मामले के आरोेपी बडे़ बाबू देवता की मृत्यु हो चुकी है। डॉ. डीएम त्रिपाठी एक महीने के लिए डिप्टी सीएमओ का चार्ज लिए थे। एओ सीजे यादव वर्तमान समय में लखनऊ में एओ के पद पर कार्यरत हैं। सभी को घोटाले की पुष्टि के बाद निलंबित कर दिया गया था, लेकिन एओ ने जोड़तोड़ करके लखनऊ में तैनाती प्राप्त कर ली। फर्जी डॉक्टरों के वेतन के नाम पर 53 लाख रुपये के घोटाले में शासन ने तत्कालीन डिप्टी सीएमओ डॉ. पीएन मिश्रा व एओ सीजे यादव को दोषी पाया है। प्रमुख सचिव ने डिप्टी सीएमओ रहे डॉ. मिश्रा से 33 लाख 45 हजार रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं। इसके अलावा 19 लाख रुपये से अधिक की वसूली यहां तैनात रहे तत्कालीन एओ से कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वसूली का आदेश आने के बाद यहां स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
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