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पर्यावरण को पलीता लगा रहे 96 ईंट-भट्ठे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Sat, 15 Apr 2017 12:12 AM IST
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रायबरेली में खीरों ब्लॉक क्षेत्र में धुआं उगलता भट्ठा।
- फोटो : अमर उजाला
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सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रदूषण रोकने की मुहिम लापरवाह अफसरों की वजह से रंग नहीं ला पा रही है। जिले में बिना परिमीशन के 96 ईंट भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं। अरसे से सेटिंग-गेटिंग से चल रहे ईंट भट्ठा मालिकों पर सीएम के निर्देश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इन ईंट भट्ठों की वजह से ही वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। न कोई मानक न कोई रॉयल्टी है। जहां चाहा वहीं पर भट्ठा मालिकों की ओर से मिट्टी खनन का कार्य कराया जा रहा है। मौजूदा समय की बात करें तो जिले में 296 ईंट भट्ठे हैं। इसमें 200 भट्ठा मालिक ही मानक के तहत इनका संचालन करा रहे हैं।
वहीं 96 ईंट भट्ठा बिना कोई मानक के चल रहे हैं। ईंट भट्ठा चलाने के लिए जिला पंचायत, प्रदूषण विभाग और पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना जरूरी होता है। बावजूद 96 भट्ठा मालिकों के लिए नियम कायदा कानून कोई मायने नहीं रख रहा है। इसके पीछे अफसरों की मिलीभगत बताई जा रही है।
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राही, ऊंचाहार, लालगंज, महराजगंज, बछरावां, जगतपुर, डलमऊ, गदागंज, खीरों, सतांव आदि ब्लॉक क्षेत्रों में नियमों का ठेंगा दिखाकर ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। शपथ लेते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदूषण रोकने के लिए मनमाने तरीके से चल रहे ईंट भट्ठों पर कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन यहां के अफसर इसको लेकर गंभीर नहीं है।
ये हैं नियम ः पर्यावरण विभाग का स्वच्छता प्रमाणपत्र होना चाहिए। प्रदूषण विभाग से एनओसी जारी होनी चाहिए। जिला पंचायत से भी अनुमति चाहिए। आबादी से 200 मीटर दूर भट्ठा होना चाहिए। मिट्टी खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति। लोहे के बजाय सीमेंट की होनी चाहिए चिमनी।
खनन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया जिले में 296 ईंट भट्ठे हैं। इनमें से 200 संचालकों ने पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण-पत्र लिया है। यदि कोई संचालक बिना प्रमाण के भट्ठा संचालित कर रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यदि कोई भट्ठा फर्जी तरीके से संचालित होता पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
डीएम अनुज कुमार झा ने बताया जिले में नियम विरुद्ध संचालित किए जा रहे भट्ठा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कौन-कौन से ईंट भट्ठा बिना नियम के चल रहे हैं, इसे चिन्हित कराया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रदूषण अधिकारी आरके सिंह ने बताया ईंट भट्ठों की वजह से प्रदूषण बढ़ने का खतरा अधिक रहता है। इसलिए भट्ठा संचालन करने से पहले एनओसी लेना जरूरी होता है। जिले में किन-किन भटठा संचालकों ने एनओसी नहीं ली है, इसका सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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इन ईंट भट्ठों की वजह से ही वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। न कोई मानक न कोई रॉयल्टी है। जहां चाहा वहीं पर भट्ठा मालिकों की ओर से मिट्टी खनन का कार्य कराया जा रहा है। मौजूदा समय की बात करें तो जिले में 296 ईंट भट्ठे हैं। इसमें 200 भट्ठा मालिक ही मानक के तहत इनका संचालन करा रहे हैं।
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वहीं 96 ईंट भट्ठा बिना कोई मानक के चल रहे हैं। ईंट भट्ठा चलाने के लिए जिला पंचायत, प्रदूषण विभाग और पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना जरूरी होता है। बावजूद 96 भट्ठा मालिकों के लिए नियम कायदा कानून कोई मायने नहीं रख रहा है। इसके पीछे अफसरों की मिलीभगत बताई जा रही है।
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राही, ऊंचाहार, लालगंज, महराजगंज, बछरावां, जगतपुर, डलमऊ, गदागंज, खीरों, सतांव आदि ब्लॉक क्षेत्रों में नियमों का ठेंगा दिखाकर ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। शपथ लेते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदूषण रोकने के लिए मनमाने तरीके से चल रहे ईंट भट्ठों पर कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन यहां के अफसर इसको लेकर गंभीर नहीं है।
ये हैं नियम ः पर्यावरण विभाग का स्वच्छता प्रमाणपत्र होना चाहिए। प्रदूषण विभाग से एनओसी जारी होनी चाहिए। जिला पंचायत से भी अनुमति चाहिए। आबादी से 200 मीटर दूर भट्ठा होना चाहिए। मिट्टी खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति। लोहे के बजाय सीमेंट की होनी चाहिए चिमनी।
खनन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया जिले में 296 ईंट भट्ठे हैं। इनमें से 200 संचालकों ने पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण-पत्र लिया है। यदि कोई संचालक बिना प्रमाण के भट्ठा संचालित कर रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यदि कोई भट्ठा फर्जी तरीके से संचालित होता पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
डीएम अनुज कुमार झा ने बताया जिले में नियम विरुद्ध संचालित किए जा रहे भट्ठा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कौन-कौन से ईंट भट्ठा बिना नियम के चल रहे हैं, इसे चिन्हित कराया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रदूषण अधिकारी आरके सिंह ने बताया ईंट भट्ठों की वजह से प्रदूषण बढ़ने का खतरा अधिक रहता है। इसलिए भट्ठा संचालन करने से पहले एनओसी लेना जरूरी होता है। जिले में किन-किन भटठा संचालकों ने एनओसी नहीं ली है, इसका सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।