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रसोइयों को हर महीने 7 तारीख को बैंक खाते में मिलेगा मानदेय
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परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत कार्यरत रसोइयों को अब गुरुजी से रोज-रोज मानदेय के लिए मिन्नत नहीं करनी पड़ेगी। मानदेय अब उनके बैंक खाते में ही हर महीने की 7 तारीख को आ जाएगा। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने अभी हाल ही में एक पत्र भेजा है जिस पर अमल करते हुए रसोइयों के बैंक खातों का ब्योरा जुटाया जाने लगा है।
मध्याह्न भोजन योजना से जिले के 2705 विद्यालय आच्छादित हैं जिनमें नामांकित ढाई लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित होते हैं। भोजन बनाने के लिए हर स्कूल में रसोइयों की तैनाती हैं। वर्तमान में इनकी संख्या 6549 है जिन्हें अभी तक हर महीने एक-एक हजार रुपये मानदेय दिया जाता है।
यह मानदेय भी शासन से बजट मिलने पर विद्यालय के एमडीएम निधि खातों में भेजा जाता है। मानदेय के लिए रसोइयों को कई महीने इंतजार करना पड़ता है। विद्यालय के खाते में पैसा आ जाता है तो भी गुरुजी से मिन्नत करनी पड़ती है।
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इसे लेकर रसोइयों ने कई बार आवाज उठाई तो शासन ने न सिर्फ मानदेय बढ़ाने का फैसला लिया बल्कि उनके व्यक्तिगत बैंक खाते में मानदेय भेजने की व्यवस्था भी कर दी। अब प्रत्येक रसोइये को अपने बैंक खाते का ब्योरा बीईओ के माध्यम से देना होगा ताकि खातों में हर महीने मानदेय की रकम भेजी जा सके।
शासन की घोषणा के बाद रसोइयों का मानदेय एक हजार रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये जरूर कर दिया गया है लेकिन 31 मार्च तक सिर्फ एक हजार रुपये के हिसाब से ही मानदेय दिया गया है। वजह यह कि शासन से बजट भी एक हजार रुपये के हिसाब से मिला था। नए शैक्षिक सत्र में अप्रैल से हर हाल में 1500 रुपये मानदेय देने की बात कही गई है।
जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि प्राधिकरण से मिले निर्देशों के अनुसार रसोइयों के बैंक खाते का विवरण मंगाया जा रहा है। सभी रसोइयों के बैंक खाते का ब्योरा आने के बाद बजट की उपलब्धता के मुताबिक उन्हें मानदेय की राशि हर हाल में महीने की 7 तारीख को भेज दी जाएगी।
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मध्याह्न भोजन योजना से जिले के 2705 विद्यालय आच्छादित हैं जिनमें नामांकित ढाई लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित होते हैं। भोजन बनाने के लिए हर स्कूल में रसोइयों की तैनाती हैं। वर्तमान में इनकी संख्या 6549 है जिन्हें अभी तक हर महीने एक-एक हजार रुपये मानदेय दिया जाता है।
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यह मानदेय भी शासन से बजट मिलने पर विद्यालय के एमडीएम निधि खातों में भेजा जाता है। मानदेय के लिए रसोइयों को कई महीने इंतजार करना पड़ता है। विद्यालय के खाते में पैसा आ जाता है तो भी गुरुजी से मिन्नत करनी पड़ती है।
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इसे लेकर रसोइयों ने कई बार आवाज उठाई तो शासन ने न सिर्फ मानदेय बढ़ाने का फैसला लिया बल्कि उनके व्यक्तिगत बैंक खाते में मानदेय भेजने की व्यवस्था भी कर दी। अब प्रत्येक रसोइये को अपने बैंक खाते का ब्योरा बीईओ के माध्यम से देना होगा ताकि खातों में हर महीने मानदेय की रकम भेजी जा सके।
शासन की घोषणा के बाद रसोइयों का मानदेय एक हजार रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये जरूर कर दिया गया है लेकिन 31 मार्च तक सिर्फ एक हजार रुपये के हिसाब से ही मानदेय दिया गया है। वजह यह कि शासन से बजट भी एक हजार रुपये के हिसाब से मिला था। नए शैक्षिक सत्र में अप्रैल से हर हाल में 1500 रुपये मानदेय देने की बात कही गई है।
जिला समन्वयक (एमडीएम) विनय कुमार तिवारी ने बताया कि प्राधिकरण से मिले निर्देशों के अनुसार रसोइयों के बैंक खाते का विवरण मंगाया जा रहा है। सभी रसोइयों के बैंक खाते का ब्योरा आने के बाद बजट की उपलब्धता के मुताबिक उन्हें मानदेय की राशि हर हाल में महीने की 7 तारीख को भेज दी जाएगी।