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30 लाख रुपये हड़पे, मकान का नहीं कराया बैनामा
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रायबरेली। शहर क्षेत्र में मकान बिक्री करने के नाम पर की गई धोखाधड़ी के मामले में एक नर्सिंग होम के दो कर्मचारियों समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसपी स्वप्निल ममगाई के निर्देश पर सदर कोतवाली पुलिस और सर्विलांस-स्वाट टीम ने कार्रवाई की। पुलिस की मानें तो पीड़ित परिवार ने मकान खरीदने के लिए 30 लाख रुपये दिए थे।
मकान मालिक ने स्टांप पर लिख दिया था, लेकिन उसका बैनामा नहीं करा रहा था। रजिस्ट्री कराने के नाम पर पीड़ित पक्ष को परेशान कर रहा था। शहर के आचार्य द्विवेदी निवासी जयकरन सिंह ने करीब छह माह पहले यहीं के रहने वाले धर्मेंद्र मौर्य आदि के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था।
सदर कोतवाल अतुल सिंह, सर्विलांस-स्वाट टीम प्रभारी अमरेश त्रिपाठी ने मामले में चार आरोपियों को दबोच लिया। सीओ सदर गोपीनाथ सोनी ने बताया कि मूलरूप से जगतपुर थाना क्षेत्र के बेनीकामा निवासी धर्मेद्र मौर्य, उसके पिता अमरनाथ मौर्य और महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के थुलवांसा निवासी सुरेंद्र बहादुर और राम प्रताप यादव को गिरफ्तार किया गया है।
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इसमें राम प्रताप जेल रोड स्थित एक नर्सिंग होम में गार्ड है, जबकि सुरेंद्र बहादुर वार्ड ब्वाय था। कोतवाल का कहना है कि धर्मेंद्र ने जयकरन सिंह से मकान बिक्री करने का सौदा तय किया था। 30 लाख रुपये भी ले लिए थे। बावजूद मकान की रजिस्ट्री नहीं करा रहा था। इसमें राम प्रताप और सुरेंद्र गवाह थे। सभी को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया है। सीओ का कहना है कि धोखाधड़ी के मामले में नामजदगी होने पर कार्रवाई की गई है। जो दोषी है, उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा।
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मकान मालिक ने स्टांप पर लिख दिया था, लेकिन उसका बैनामा नहीं करा रहा था। रजिस्ट्री कराने के नाम पर पीड़ित पक्ष को परेशान कर रहा था। शहर के आचार्य द्विवेदी निवासी जयकरन सिंह ने करीब छह माह पहले यहीं के रहने वाले धर्मेंद्र मौर्य आदि के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था।
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सदर कोतवाल अतुल सिंह, सर्विलांस-स्वाट टीम प्रभारी अमरेश त्रिपाठी ने मामले में चार आरोपियों को दबोच लिया। सीओ सदर गोपीनाथ सोनी ने बताया कि मूलरूप से जगतपुर थाना क्षेत्र के बेनीकामा निवासी धर्मेद्र मौर्य, उसके पिता अमरनाथ मौर्य और महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के थुलवांसा निवासी सुरेंद्र बहादुर और राम प्रताप यादव को गिरफ्तार किया गया है।
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इसमें राम प्रताप जेल रोड स्थित एक नर्सिंग होम में गार्ड है, जबकि सुरेंद्र बहादुर वार्ड ब्वाय था। कोतवाल का कहना है कि धर्मेंद्र ने जयकरन सिंह से मकान बिक्री करने का सौदा तय किया था। 30 लाख रुपये भी ले लिए थे। बावजूद मकान की रजिस्ट्री नहीं करा रहा था। इसमें राम प्रताप और सुरेंद्र गवाह थे। सभी को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया है। सीओ का कहना है कि धोखाधड़ी के मामले में नामजदगी होने पर कार्रवाई की गई है। जो दोषी है, उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा।