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22 हजार 95
Updated Tue, 01 Aug 2017 12:36 AM IST
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22 हजार 958 बच्चे अतिकुपोषण के शिकार
रायबरेली। कुपोषण मुक्ति अभियान की समीक्षा के लिए सोमवार को विकास भवन में जिला पोषण समिति की बैठक हुई। इसमें खुलासा हुआ कि 22 हजार 958 बच्चे अतिकुपोषण की श्रेणी में आते हैं। सीडीओ देवेंद्र पांडेय ने इसे गंभीरता से लिया और कहा कि बच्चों को स्वस्थ बनाने का कार्य करें। योजना का लाभ बच्चों को मिलना चाहिए।
सीडीओ ने कहा कि सभी नोडल अधिकारी आवंटित किए गांवों का निरीक्षण करें और ईमानदारी एवं निष्ठा से कार्य प्रारंभ कर दें। कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शिक्षा विभाग को हिदायत देते हुए कहा कि स्कूलों में बच्चों को प्रार्थना के समय स्वच्छता के बारे संपूर्ण जानकारी दी जाए। कुपोषण मुक्ति अभियान की सीधे शासन से मॉनिटरिंग की जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि वर्तमान में जिले में कुल 22,958 बच्चे अतिकुपोण की श्रेणी में हैं। प्रदेश सरकार कुपोषण के प्रति बेहद गंभीर है। इसलिए सभी नोडल अधिकारी अपने कार्य को ईमानदारी से करें।
उन्होंने कहा कि सभी नोडल अधिकारी अपने गोद लिए गांव में कुपोषित बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं की नियमित रूप से जांच करें और उन्हें नियमित रूप से पोषाहार दिया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पंचायत विभाग को शासन की ओर से चलाए जा रहे कार्यों में सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है। उन्होेंने कहा कि नोडल अधिकारियों की ओर से किए गए कार्यों के लिए मॉनीटरिंग की जाएगी। बैठक में सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस के आयोजन सही तरीके से कराया जाना सुनिश्चित किया जाएं।
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रायबरेली। कुपोषण मुक्ति अभियान की समीक्षा के लिए सोमवार को विकास भवन में जिला पोषण समिति की बैठक हुई। इसमें खुलासा हुआ कि 22 हजार 958 बच्चे अतिकुपोषण की श्रेणी में आते हैं। सीडीओ देवेंद्र पांडेय ने इसे गंभीरता से लिया और कहा कि बच्चों को स्वस्थ बनाने का कार्य करें। योजना का लाभ बच्चों को मिलना चाहिए।
सीडीओ ने कहा कि सभी नोडल अधिकारी आवंटित किए गांवों का निरीक्षण करें और ईमानदारी एवं निष्ठा से कार्य प्रारंभ कर दें। कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शिक्षा विभाग को हिदायत देते हुए कहा कि स्कूलों में बच्चों को प्रार्थना के समय स्वच्छता के बारे संपूर्ण जानकारी दी जाए। कुपोषण मुक्ति अभियान की सीधे शासन से मॉनिटरिंग की जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि वर्तमान में जिले में कुल 22,958 बच्चे अतिकुपोण की श्रेणी में हैं। प्रदेश सरकार कुपोषण के प्रति बेहद गंभीर है। इसलिए सभी नोडल अधिकारी अपने कार्य को ईमानदारी से करें।
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उन्होंने कहा कि सभी नोडल अधिकारी अपने गोद लिए गांव में कुपोषित बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं की नियमित रूप से जांच करें और उन्हें नियमित रूप से पोषाहार दिया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पंचायत विभाग को शासन की ओर से चलाए जा रहे कार्यों में सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है। उन्होेंने कहा कि नोडल अधिकारियों की ओर से किए गए कार्यों के लिए मॉनीटरिंग की जाएगी। बैठक में सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस के आयोजन सही तरीके से कराया जाना सुनिश्चित किया जाएं।
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