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अपनों की बेरुखी से मिट रही हरियाली
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अपनों की बेरुखी से मिट रही हरियाली
रायबरेली। जिले में अपनों की बेरुखी से हरियाली मिट रही है। बिना परमिट के हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। हर साल लाखों की संख्या में पौधरोपण तो किया जाता है, लेकिन उनकी देखभाल नहीं की जाती है।
ऐसे में 30 फीसदी पौधे ही सुरक्षित रह पाते हैं। किसी क्षेत्र में सिंचाई तो किसी क्षेत्र में मवेशियों के चट कर जाने से पौधों का अस्तित्व खत्म हो जाता है। यह हाल तब है, जब हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, लेकिन इसको लेकर जागरूकता नहीं आई है।
पेड़ों की अंधाधुंध कटान से इसका असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। बावजूद यह सब देखने वाला कोई नहीं है। पौधों को बचाने की जिम्मेदारी जिस विभाग को सौंपी गई है, उसके अफसर सिर्फ कागजों पर ही जिले को हरा भरा करने का दावा करते रहते हैं।
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हालात यही रहे तो छांव मिलना मुश्किल हो जाएगी। पिछले साल 19 लाख लाख पौधे रोपित किए गए हैं। इसमें से 60 फीसदी पौधे ही सुरक्षित रह गए हैं। वन विभाग के अलावा ग्राम्य विकास, पावर कॉर्पोरेशन, शिक्षा समेत अन्य विभागों को भी पौधरोपण करने की जिम्मेदारी दी जाती है।
ये विभाग भी पौधरोपण की देखभाल करने में मनमानी करते हैं। पौधे रोपित किए जाते हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं होती है। बारिश के भरोसे ही अधिकारी रहते हैं। सिंचाई न होने से पौधे सूख जाते हैं।
वन विभाग से मिले आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2018-19 में 200 पेड़ों के कटान के लिए परमिट जारी किए गए थे। अधिकतर लोग वन कर्मियों और पुलिस की मदद से बिना परमिट के हरे पेड़ कटवा लेते हैं।
अधिकारियों तक मामला पहुंच जाता है, तभी पेड़ कटान पर कार्रवाई हो पाती है। रिपोर्ट लिखने के बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती। यही नहीं अधिकतर वन कर्मी पेड़ काटने की सूचना पर पहुंचकर जुर्माना देकर ठेकेदार को छोड़ देते हैं।
जिले में सरेनी, लालगंज, परशदेपुर, गदागंज, राही, सतांव, अमावां आदि क्षेत्रों में अधिक पेड़ काटे जाने की शिकायतें मिलती हैं। प्रभागीय वन निदेशक तुलसीदास शर्मा ने बताया कि पर्यावरण को बचाने के लिए हर साल पौधरोपण कराया जाता है।
इस बार 34 लाख पौधे लगाने की तैयारी चल रही है। वन विभाग के अलावा अन्य विभागों की ओर से पौधरोपण कराने के बाद देखभाल की जिम्मेदारी दी जाती है। रोपित पौधों की देखभाल की जाती है।
ट्री गार्ड बनवाए जाते हैं। बिना परमिट के हरे पेड़ों की कटान करने वालों पर कार्रवाई की जाती है। एक परमिट पर 200 रुपये जमानत के तौर पर जमा कराए जाते हैं।
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रायबरेली। जिले में अपनों की बेरुखी से हरियाली मिट रही है। बिना परमिट के हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। हर साल लाखों की संख्या में पौधरोपण तो किया जाता है, लेकिन उनकी देखभाल नहीं की जाती है।
ऐसे में 30 फीसदी पौधे ही सुरक्षित रह पाते हैं। किसी क्षेत्र में सिंचाई तो किसी क्षेत्र में मवेशियों के चट कर जाने से पौधों का अस्तित्व खत्म हो जाता है। यह हाल तब है, जब हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, लेकिन इसको लेकर जागरूकता नहीं आई है।
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पेड़ों की अंधाधुंध कटान से इसका असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। बावजूद यह सब देखने वाला कोई नहीं है। पौधों को बचाने की जिम्मेदारी जिस विभाग को सौंपी गई है, उसके अफसर सिर्फ कागजों पर ही जिले को हरा भरा करने का दावा करते रहते हैं।
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हालात यही रहे तो छांव मिलना मुश्किल हो जाएगी। पिछले साल 19 लाख लाख पौधे रोपित किए गए हैं। इसमें से 60 फीसदी पौधे ही सुरक्षित रह गए हैं। वन विभाग के अलावा ग्राम्य विकास, पावर कॉर्पोरेशन, शिक्षा समेत अन्य विभागों को भी पौधरोपण करने की जिम्मेदारी दी जाती है।
ये विभाग भी पौधरोपण की देखभाल करने में मनमानी करते हैं। पौधे रोपित किए जाते हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं होती है। बारिश के भरोसे ही अधिकारी रहते हैं। सिंचाई न होने से पौधे सूख जाते हैं।
वन विभाग से मिले आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2018-19 में 200 पेड़ों के कटान के लिए परमिट जारी किए गए थे। अधिकतर लोग वन कर्मियों और पुलिस की मदद से बिना परमिट के हरे पेड़ कटवा लेते हैं।
अधिकारियों तक मामला पहुंच जाता है, तभी पेड़ कटान पर कार्रवाई हो पाती है। रिपोर्ट लिखने के बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती। यही नहीं अधिकतर वन कर्मी पेड़ काटने की सूचना पर पहुंचकर जुर्माना देकर ठेकेदार को छोड़ देते हैं।
जिले में सरेनी, लालगंज, परशदेपुर, गदागंज, राही, सतांव, अमावां आदि क्षेत्रों में अधिक पेड़ काटे जाने की शिकायतें मिलती हैं। प्रभागीय वन निदेशक तुलसीदास शर्मा ने बताया कि पर्यावरण को बचाने के लिए हर साल पौधरोपण कराया जाता है।
इस बार 34 लाख पौधे लगाने की तैयारी चल रही है। वन विभाग के अलावा अन्य विभागों की ओर से पौधरोपण कराने के बाद देखभाल की जिम्मेदारी दी जाती है। रोपित पौधों की देखभाल की जाती है।
ट्री गार्ड बनवाए जाते हैं। बिना परमिट के हरे पेड़ों की कटान करने वालों पर कार्रवाई की जाती है। एक परमिट पर 200 रुपये जमानत के तौर पर जमा कराए जाते हैं।