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13 साल पहले जहरीली शराब ने ली थी 13 लोगों की जान

Fri, 28 Jan 2022 12:15 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jan 2022 12:15 AM IST
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13 years ago, poisonous liquor took the lives of 13 people
बछरावां (रायबरेली)। कोतवाली क्षेत्र में भी 13 साल पहले जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत हो गई थी। महराजगंज में हुए शराब कांड से क्षेत्र में हुई घटना फिर से ताजा हो गई। हालांकि घटना के बाद से अवैध कच्ची शराब के धंधे पर अंकुश नहीं लग पाया। पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से रामपुर, सुदौली, बबुरिहाखेड़ा, शेषपुर समोधा, मदनटूसी गांवों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का धंधा फलफूल रहा है। उन्नाव से बड़े पैमाने पर शराब की तस्करी होती है। मार्च 2008 में मल्हीपुर के रहने वाले राधेश्याम, रामसेवक, कुंडौली निवासी प्रमोद कुमार, मातादीन, राजाराम, शंकर, रामपालगंज के रहने वाले बबलू, कसरावां के परमानंद अवस्थी, गोसाईगंज के गोपाली, गोरे, बछरावां के सीताराम, अनिल कुमार, कैलाश सोनी की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। घटना होने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष सुरेश तिवारी व आबकारी विभाग के कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे सब कुछ समान्य होता चला गया और आज कच्ची शराब का व्यवसाय उसी गति से चल रहा है। इससे कभी भी कोई भी बड़ी घटना जिले के महराजगंज क्षेत्र में जैसी हो सकती है। उधर, कोतवाल जगदीश यादव का कहना है कि क्षेत्र में कच्ची शराब बनाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
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पुलिस चौकी भी नहीं हो पा रही कारगर
बछरावां क्षेत्र में बिक्री के लिए सबसे अधिक कच्ची शराब उन्नाव जनपद के सरेंदा गांव से आती है। कच्ची शराब पर प्रतिबंध लगाने के लिए रामपुर सुदौली गांव में सई नदी के किनारे पुलिस चौकी को स्थापित किया गया। यह सई नदी रायबरेली और उन्नाव जनपद को विभाजित करती है। पिछले वर्ष एक नवंबर को चुरुआ में भी नई चौकी स्थापित की गई, लेकिन कच्ची शराब का धंधा कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।
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बिखर गए परिवार
तेरह साल पहले जहरीली शराब पीने से जिन लोगों की मौत हुई, उनके घर बिखर गए। परमानंद अवस्थी उर्फ नंदू की मौत के बाद उसके बड़े बेटे मंगलेश का सदमे से मानसिक संतुलन बिगड़ गया। ऐसी स्थिति में छोटा बेटा अवधेश अवस्थी 17 वर्ष की उम्र में ही परिवार के भरण पोषण के लिए कस्बे की सब्जी मंडी स्थित निजाम की तंबाकू की दुकान पर 300 रुपये प्रति माह पर नौकरी करने लगा। मातादीन की मौत के बाद सदमे में उसकी पत्नी रानी की दो साल बाद ही मौत हो गई। इससे मृतक के चारों बच्चे अनाथ हो गए। पिता की मौत के समय बड़ी बेटी आरती (7), मानसा (5), बेटा राजकरन (3), अर्जुन (1) वर्ष का था। इन बच्चों का पालन पोषण रिश्तेदारों और गांववासियों के सहयोग से हुआ। दोनों बेटियों की शादी भी सभी के सहयोग से संपन्न हुई। बेटों की अभी शादी नहीं हुई और टेंट हाउस में नौकरी करके जीवन यापन कर रहे हैं। मल्हीपुर निवासी राधेश्याम की मौत के बाद मासूम बच्चियां बबली और गुड़िया के सर से पिता का साया छिन गया था। परिवार बिखर गया था। जीविका के लिए बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई थी। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अजय कुमार ने बताया कि कुछ रिश्तेदारों के संपर्क में आने के बाद मृतक का परिवार गांव से पलायन कर गया।
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जब गम में तब्दील हो गई थी दिवाली की खुशियां
अमावां। मिल एरिया थाना क्षेत्र के पूरे वन मानुष गांव में 2008 में दिवाली को लेकर खुशी का माहौल था। खुशी के मौके पर शहर के खोवा मंडी से खरीदी गई स्प्रिट के पीने से छह लोगों की मौत हो गई थी पूरे वन मानुष गांव के पुल्लू, रेखा, रामकली और बिटाना की मौत से हड़कंप मच गया था। दिवाली की खुशियां गम में तब्दील हो गई थी। एक बार फिर यह घटना ताजा हो गई। हालांकि इस घटना के बाद भी क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब का धंधा फलफूल रहा है। कार्रवाई के नाम पर महज खानापूरी ही की जा रही है।
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