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थम नहीं रही मीटर रीडरों की मनमानी
Updated Fri, 05 Jan 2018 11:33 PM IST
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मीटर में रीडिंग डंप, निकाल दिया कम यूनिट का बिल
रायबरेली। शहर क्षेत्र में बिजली चोरी का सिलसिला थम नहीं रहा है। कई बार बिजली चोरी पकड़ी गई। हर बार मीटर रीडरों की मनमानी पकड़ी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज खानापूरी हुई।
दो मामले फिर प्रकाश में आए हैं, जिसमें मीटर में तो रीडिंग डंप है, लेकिन बिल कम रीडिंग का बनाया गया है। हर बार उच्चस्तरीय बैठक में मीटर रीडिंग की क्रॉस चेकिंग के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। इससे साफ जाहिर है कि पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता भी कहीं न कहीं से इस खेल में शामिल हैं।
शहर के एक घरेलू कनेक्शन के मीटर में रीडिंग 8259 स्टोर थी, जबकि 2512 रीडिंग पर मीटर को बदल दिया गया। उपभोक्ता को 14 अक्तूबर से 13 नवंबर का 156 यूनिट का बिल बनाया गया।
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कुल मिलाकर 5747 यूनिट का घालमेल किया गया। इसी तरह एक अन्य कनेक्शन पर रीडिंग स्टोर होने पर अक्तूबर महीने में मीटर को बदल दिया गया है।
उपभोक्ता का नया मीटर लगाया गया। इसमें पहली रीडिंग 203 यूनिट दिखाई गई, जबकि मौजूदा समय में मीटर में 1910 रीडिंग स्टोर है। ये दो केस एक बानगी मात्र हैं।
इसके पहले भी कई मामले पकड़े गए, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इससे मनमानी कर जेबें भरने वाले अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं।
अमर उजाला ने इसी तरह के तीन मामलों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिस पर संबंधित मीटर रीडर को तो हटा दिया गया, लेकिन अन्य जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इतना ही नहीं नवंबर माह में एमडी ने बैठक में साफ कहा था कि मीटर रीडरों पर कार्रवाई करने के बजाय मीटर की क्रॉस चेकिंग कराई जाए।
इसके बावजूद किसी डिवीजन में ऐसा नहीं हो रहा है। इससे साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता भी इस तरह की बिजली चोरी कराने में लिप्त हैं।
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रायबरेली। शहर क्षेत्र में बिजली चोरी का सिलसिला थम नहीं रहा है। कई बार बिजली चोरी पकड़ी गई। हर बार मीटर रीडरों की मनमानी पकड़ी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज खानापूरी हुई।
दो मामले फिर प्रकाश में आए हैं, जिसमें मीटर में तो रीडिंग डंप है, लेकिन बिल कम रीडिंग का बनाया गया है। हर बार उच्चस्तरीय बैठक में मीटर रीडिंग की क्रॉस चेकिंग के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। इससे साफ जाहिर है कि पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता भी कहीं न कहीं से इस खेल में शामिल हैं।
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शहर के एक घरेलू कनेक्शन के मीटर में रीडिंग 8259 स्टोर थी, जबकि 2512 रीडिंग पर मीटर को बदल दिया गया। उपभोक्ता को 14 अक्तूबर से 13 नवंबर का 156 यूनिट का बिल बनाया गया।
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कुल मिलाकर 5747 यूनिट का घालमेल किया गया। इसी तरह एक अन्य कनेक्शन पर रीडिंग स्टोर होने पर अक्तूबर महीने में मीटर को बदल दिया गया है।
उपभोक्ता का नया मीटर लगाया गया। इसमें पहली रीडिंग 203 यूनिट दिखाई गई, जबकि मौजूदा समय में मीटर में 1910 रीडिंग स्टोर है। ये दो केस एक बानगी मात्र हैं।
इसके पहले भी कई मामले पकड़े गए, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इससे मनमानी कर जेबें भरने वाले अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं।
अमर उजाला ने इसी तरह के तीन मामलों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिस पर संबंधित मीटर रीडर को तो हटा दिया गया, लेकिन अन्य जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इतना ही नहीं नवंबर माह में एमडी ने बैठक में साफ कहा था कि मीटर रीडरों पर कार्रवाई करने के बजाय मीटर की क्रॉस चेकिंग कराई जाए।
इसके बावजूद किसी डिवीजन में ऐसा नहीं हो रहा है। इससे साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता भी इस तरह की बिजली चोरी कराने में लिप्त हैं।