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1.30 लाख बच्चों को लगाए जाएंगे टीके

रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Wed, 24 May 2017 12:25 AM IST
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टीके
टीके - फोटो : demo

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जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) से लाडलों को बचाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस बार एक लाख 30 हजार से ज्यादा बच्चों को टीके लगाए जाएंगे। इस अभियान की शुरुआत यहां पर 25 मई से की जाएगी। खास बात ये है कि हर दिन इस अभियान की मॉनीटरिंग कराई जाएगी कि कितने बच्चों को टीके लगाए गए। साथ ही पिछले साल जो बच्चे छूट गए थे, उन्हीं को ही जेई के टीके लगाए जाएंगे। सीएमओ ने सभी सीएचसी अधीक्षकों को निर्देश देकर अपने-अपने क्षेत्र में तय किए गए जेई के टीके लगवाने के लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं।
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वैसे तो रायबरेली जिले में दिमागी बुखार के फैलने का अंदेशा कम रहता है, लेकिन हर साल इससे बचने के लिए व्यवस्थाएं की जाती हैं। दिमागी बुखार की चपेट में आने से बच्चों की मौत होने का अंदेशा रहता है। अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में दिमागी बुखार फैलने का खतरा अधिक रहता है। इसलिए हर साल बच्चों में जेई के टीके लगवाए जाते हैं। सीएमओ डॉ. डीके सिंह के मुताबिक जिले में 25 मई से जेई टीकाकरण अभियान शुरू होगा।


इस बार एक लाख 30 हजार 801 बच्चों में टीका लगाया जाएगा। टीके उन्हीं बच्चों को लगाए जाएंगे, जो वर्ष 2016 में छूट गए थे। सीएमओ के मुताबिक एक साल से 15 साल तक के बच्चों को जेई के टीके लगाए जाएंगे। एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से टीके लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा है कि टीकाकरण अभियान की मॉनीटरिंग की जाएगी, ताकि जो टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया है, उसे पूरा किया जाए। इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होेंने कहा कि मिशन इंद्रधनुष का दूसरा चरण पूरा हो गया है। मिशन इंद्रधनुष की तीसरा चरण 12 जून 2017 को शुरू होगा।

उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अंजली सिंह कहती हैं कि दिमागी बुखार बच्चों के लिए खतरनाक होता है। इसलिए इससे बचने की जरूरत रहती है। कहती हैं कि अगस्त, सितंबर, अक्तूबर में दिमागी बुखार का अटैक ज्यादा होता है। सुअर व जंगली पक्षी इस रोग को फैलाते हैं। मच्छर द्वारा वायरस सुअर से मानव में आता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को जरूर टीका लगवाएं। उनकी थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
 

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