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जानिए, साधुओं के नागा बनने की प्रक्रिया
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jan 2013 08:18 AM IST
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नागा बनाने की शैव अखाड़ों की तैयारियों से इतर पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन ने पहल करते हुए रविवार को 28 साधुओं को निर्वाण नागा बनाया। सनातन परंपरा की रक्षा और उसे आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अखाड़े में जुटे युवा साधुओं को परंपरानुसार निर्वाण दीक्षा दिलाई गई।
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‘तंगतोड़ा संस्कार’ के बाद अखाड़े की धर्मध्वजा के नीचे अरदास के बाद उन्हें अखाड़े की सेवा का संकल्प दिलाया गया। नए निर्वाण नागा बसंत पंचमी तक अलग धूना में तपस्या में लीन रहेंगे। यही नागा मौनी अमावस्या के शाही स्नान में शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे।
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दीक्षा से पहले लगाई 108 डुबकी
दीक्षा संस्कार में सोलह से पच्चीस वर्ष आयु वर्ग के युवा साधु शामिल थे। दीक्षा के तहत श्रीमहंत महेश्वर दास की देख रेख में शनिवार की रात गंगा तट पर उन्होंने 108 डुबकी लगाई। अखाड़े के आराध्य गोला साहिब और आचार्य श्रीचंद्र के पूजन अर्चन के बाद उन्होंने आजीवन धर्म की सेवा का संस्कार लिया।
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विशेष देखरेख में रहेंगे निर्वाण
नए बने निर्वाण नागाओं को अब बसंत पंचमी तक विशेष प्रशिक्षण में रखा जाएगा। इसके तहत घी और दूध सहित अन्य विशिष्ट आहार देने के साथ उनका विशेष ख्याल रखा जाएगा। अखाड़े के मुखिया महंत दुर्गादास के मुताबिक वैराग्य की पहली परीक्षा पास करने के बाद इन नागाओं को उनकी योग्यता के अनुसार अखाड़े में विभिन्न पदों पर तैनात किया जाएगा।
आसान नही निर्वाण की राह
निर्वाण नागा बनने की राह आसान नहीं है लेकिन ये निर्वाण नागा बिना कपड़ों के नहीं बल्कि कौपीन या अंगोछा बांधकर काले कपड़ों में रहते हैं। दीक्षा लेने की इच्छा के बाद गुरु की ओर से कठिन परीक्षा भी ली जाती है। निर्वाण बनने वाला नागा गुरुओं के आश्रमों के माध्यम से ही संस्कार के लिए पहुंचते हैं। कई वर्षों तक उनके व्यवहार और आचरण का आकलन किया जाता है।