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सूर्य को अर्घ्य देकर मांगा सुख-समृद्धि का आशीष
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:40 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
- फोटो : pratapgarah
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छठ महापर्व को लेकर बेल्हा देवी घाट पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई उत्साह से छठ माता और सूर्योपासना में तल्लीन दिखा। सिर पर दौरा और कंधे पर गन्ना रखकर लोग घर से डीजे और ढोल नगारे की धुन पर नाचते गाते हुए घाट पहुंचे। इसके बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने विधि विधान से छठ माता का पूजन अर्चन कर मंगलकामनाएं कीं। ऐसे में सई नदी घाट पर आस्था का नजारा देखते ही बन रहा था।
छठ व्रत के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल की षष्ठी 26 अक्तूबर को दिन में श्रद्धालुओं ने घर में साफ-सफाई के बाद स्नान कर घर में पूजन में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया। प्रसाद में ठेकुआ व चावल के आटे के लाडुआ भी घरों में बनाए गए। व्रती महिलाओं व पुरुषों ने दिन भर का उपवास रखा। शाम को भक्त बेल्हा देवी घाट सहित जिले के तमाम घाटों पर पूजन अर्चन के लिए पहुंचे। घर में बनाए गए प्रसाद, फलों और पूजन सामग्री को दौरे, डलिया और सूप में रखकर उसे रंग बिरंगे कपड़ों से बांधा गया। शाम करीब 3 बजे के बाद से बेल्हा देवी सहित अन्य घाटों पर भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। भक्त सिर पर प्रसाद के दौरे, डलिया व कंधे पर गन्ने को रखकर घाट पहुंचे। इस दौरान घर से लेकर घाट तक डीजे व ढोल नगारे बजते रहे। जिसकी धुन पर छठ माता के भक्त थिरकते हुए नदी घाटों तक पहुंचे। घाट पहुंचने के बाद व्रती महिला व पुरुषों ने नदी की बालू निकालकर घाट पर पूजा के लिए वेदी बनाई। उसके बाद उस पर चावल और पीसी हुई हल्दी के बने आयपन से रंगा गया। साथ आए घर के सदस्यों व श्रद्धालुओं ने वेदी के समीप कई दीप जलाकर सजाए। साथ ही नदी में भी दीपदान किए गए। घाटों पर गन्ने गाड़े गए और रंगीन अंगौछा लपेटा गया। उसके बाद व्रतियों ने नदी घाट में जाकर स्नान कर के बाद नदी के अंदर रहकर डलिया, दौरा और सूप में रखे प्रसाद से डूबते हुए भगवान सूर्य को तीन बार अर्घ्य दिया। वहीं तमाम लोग अपनी मन्नत को लेकर भी तांबे के लोटे में दूध और जल से अर्घ्य दिया। उसके बाद व्रतियों ने वेदी पर आकर विधि विधान से मां छठ की पूजा की और परिवार के कल्याण के लिए आशीष मांगे। व्रती महिलाओं ने सुहागिनों को सिंदूर लगाने के साथ ही घर के सभी सदस्यों को तिलक लगाया। उसके बाद श्रद्धालु घर लौट आए। घर में व्रती महिलाओं ने अपनी मंगलकामना के लिए कोसिया भरी। इस दौरान हाथी के आकार के साथ 16 दिए के साथ बनी मूर्ति को प्रज्वलित कर घर की महिलाओं ने छठ माता के गीत गाए। जहां पर पूड़ी, पुआ, गन्ना व दौरे, डलिया और सूप में रखे प्रसाद भी चढ़ाए गए।
छठ व्रत के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल की षष्ठी 26 अक्तूबर को दिन में श्रद्धालुओं ने घर में साफ-सफाई के बाद स्नान कर घर में पूजन में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया। प्रसाद में ठेकुआ व चावल के आटे के लाडुआ भी घरों में बनाए गए। व्रती महिलाओं व पुरुषों ने दिन भर का उपवास रखा। शाम को भक्त बेल्हा देवी घाट सहित जिले के तमाम घाटों पर पूजन अर्चन के लिए पहुंचे। घर में बनाए गए प्रसाद, फलों और पूजन सामग्री को दौरे, डलिया और सूप में रखकर उसे रंग बिरंगे कपड़ों से बांधा गया। शाम करीब 3 बजे के बाद से बेल्हा देवी सहित अन्य घाटों पर भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी। भक्त सिर पर प्रसाद के दौरे, डलिया व कंधे पर गन्ने को रखकर घाट पहुंचे। इस दौरान घर से लेकर घाट तक डीजे व ढोल नगारे बजते रहे। जिसकी धुन पर छठ माता के भक्त थिरकते हुए नदी घाटों तक पहुंचे। घाट पहुंचने के बाद व्रती महिला व पुरुषों ने नदी की बालू निकालकर घाट पर पूजा के लिए वेदी बनाई। उसके बाद उस पर चावल और पीसी हुई हल्दी के बने आयपन से रंगा गया। साथ आए घर के सदस्यों व श्रद्धालुओं ने वेदी के समीप कई दीप जलाकर सजाए। साथ ही नदी में भी दीपदान किए गए। घाटों पर गन्ने गाड़े गए और रंगीन अंगौछा लपेटा गया। उसके बाद व्रतियों ने नदी घाट में जाकर स्नान कर के बाद नदी के अंदर रहकर डलिया, दौरा और सूप में रखे प्रसाद से डूबते हुए भगवान सूर्य को तीन बार अर्घ्य दिया। वहीं तमाम लोग अपनी मन्नत को लेकर भी तांबे के लोटे में दूध और जल से अर्घ्य दिया। उसके बाद व्रतियों ने वेदी पर आकर विधि विधान से मां छठ की पूजा की और परिवार के कल्याण के लिए आशीष मांगे। व्रती महिलाओं ने सुहागिनों को सिंदूर लगाने के साथ ही घर के सभी सदस्यों को तिलक लगाया। उसके बाद श्रद्धालु घर लौट आए। घर में व्रती महिलाओं ने अपनी मंगलकामना के लिए कोसिया भरी। इस दौरान हाथी के आकार के साथ 16 दिए के साथ बनी मूर्ति को प्रज्वलित कर घर की महिलाओं ने छठ माता के गीत गाए। जहां पर पूड़ी, पुआ, गन्ना व दौरे, डलिया और सूप में रखे प्रसाद भी चढ़ाए गए।
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