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बैंक वाले नहीं दे रहे जमा रकम, कैसे पीले होंगे बेटी के हाथ
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Mon, 21 Nov 2016 11:49 PM IST
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shadi
- फोटो : amar ujala
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शादी-विवाह वालों लोगों को बैंक ढाई लाख रुपये नहीं मुहैया करा रहे हैं। जिन लोगों ने ऐसे वक्त के लिए बैंकों में अपना पैसा जमा कर रखा है, उस पर भी बैंक वाले कुंडली मारकर ऐसे बैठ गए हैं जैसे वह उनकी रकम हो। खुद का जमा किया हुआ पैसा समय पर न मिलने से लोग परेशान हैं। बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसा ही एक प्रकरण पृथ्वीगंज बाजार का सामने आया है। नीलम मोदनवाल की बेटी दीपा की शादी 8 दिसबंर को है। दोनो का 25-25 हजार बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक पृथ्वीगंज शाखा में फिक्स डिपाजिट कर रखा है।
शादी में पैसे की जरूरत पड़ी तो दोनाें ने अपना पैसा बैंक से निकालने के लिए गई। मगर बैंक वाले उनको पैसा नहीं दे रहे हैं। पैसा देेने के बजाए वे कोई न कोई बहाना बताकर मां और बेटी को कई दिनों से टहला रहे हैं। मां-बेटी अपनी ही रकम के लिये बैंक के लिये चक्करघिन्नी बन गई है। नीलम ने बताया कि बेटी के शादी में कुछ ही दिन रह गए हैं। पैसे की अभाव में कोई भी तैयारी नहीं हो पा रही है। दीपा के मौसा विमलकुमार मोदनवाल ने बताया कि बैंक वाले पैसा नहीं दे रहे हैं। रोज कोई न कोई बहाना बताकर दोनो को टरका देते हैं। शादी का सारा इंतजाम अभी पड़ा हुआ है। ऐसी में दीपा की शादी को लेकर मां और परिजनों को चिंता खाये जा रही है। दिलीपपुर में दिनेश श्रीवास्तव की बेटी वर्षा की शादी 24 नवंबर को और चंद्रिका पाल के की बेटी की शादी 25 नवंबर को है। दोनो ने बड़ौदा ग्रामीण बैंक की शाखा में जाकर खाते से पैसा निकालने के लिये चौबिस हजार का विड्राल भरा था। मगर उनको पूरा पैसा नहीं मिला। चार-चार हजार रुपये देकर टरका दिया गया। इस बारे में बैंक प्रबंधक से बात करने का प्रयास किया मगर बात नहीं हो पाई।
साहब ! मेरी बेटी की है शादी, दिला दो रुपये
कटरामेदनीगंज(ब्यूरो)। बाजार में बंदी के दौरान एक महिला अपनी बेटी के साथ अफसरों के सामने पहुंची। वह फफक पड़ी और परेशानी बताते हुए बोली कि सोमवार को ही उसकी बेटी की बारात आ रही है। बैंक से रुपये नहीं मिल रहे हैं। वह उसकी मदद कर दें तो उसकी बेटी का विवाह हो जाएगा।
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बाजार की रहने वाली कांति गुप्ता अपनी बेटी के साथ सोमवार को एसबीआई की शाखा में रुपये निकालने के लिए आई थी। कांति की मानें तो सोमवार को ही उसकी बेटी की बारात आने वाली है। इसलिए वह बैंक से रुपये निकालने के लिए परेशान है। उसे किसी ने सुझाव दिया कि बाजार में एसडीएम व सीओ बैठे हैं, यदि वे उसकी मदद कर देंगे तो उसे रुपये मिल जाएंगे। यह सुनते ही कांति अफसरों के पास पहुंची। वह फफक पड़ी बोली उसकी बेटी की बारात शाम को आ रही है। बैंक में रुपये रखे हैं, जो मिल नहीं रहे हैं। अफसरों ने उसे भरोसा दिलाया कि वह बैंक चले। वे लोग पीछे से आ रहे हैं कि जबकि उसे रुपये दिलाने के लिए अफसर नहीं पहुंचे।
शादी में पैसे की जरूरत पड़ी तो दोनाें ने अपना पैसा बैंक से निकालने के लिए गई। मगर बैंक वाले उनको पैसा नहीं दे रहे हैं। पैसा देेने के बजाए वे कोई न कोई बहाना बताकर मां और बेटी को कई दिनों से टहला रहे हैं। मां-बेटी अपनी ही रकम के लिये बैंक के लिये चक्करघिन्नी बन गई है। नीलम ने बताया कि बेटी के शादी में कुछ ही दिन रह गए हैं। पैसे की अभाव में कोई भी तैयारी नहीं हो पा रही है। दीपा के मौसा विमलकुमार मोदनवाल ने बताया कि बैंक वाले पैसा नहीं दे रहे हैं। रोज कोई न कोई बहाना बताकर दोनो को टरका देते हैं। शादी का सारा इंतजाम अभी पड़ा हुआ है। ऐसी में दीपा की शादी को लेकर मां और परिजनों को चिंता खाये जा रही है। दिलीपपुर में दिनेश श्रीवास्तव की बेटी वर्षा की शादी 24 नवंबर को और चंद्रिका पाल के की बेटी की शादी 25 नवंबर को है। दोनो ने बड़ौदा ग्रामीण बैंक की शाखा में जाकर खाते से पैसा निकालने के लिये चौबिस हजार का विड्राल भरा था। मगर उनको पूरा पैसा नहीं मिला। चार-चार हजार रुपये देकर टरका दिया गया। इस बारे में बैंक प्रबंधक से बात करने का प्रयास किया मगर बात नहीं हो पाई।
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साहब ! मेरी बेटी की है शादी, दिला दो रुपये
कटरामेदनीगंज(ब्यूरो)। बाजार में बंदी के दौरान एक महिला अपनी बेटी के साथ अफसरों के सामने पहुंची। वह फफक पड़ी और परेशानी बताते हुए बोली कि सोमवार को ही उसकी बेटी की बारात आ रही है। बैंक से रुपये नहीं मिल रहे हैं। वह उसकी मदद कर दें तो उसकी बेटी का विवाह हो जाएगा।
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बाजार की रहने वाली कांति गुप्ता अपनी बेटी के साथ सोमवार को एसबीआई की शाखा में रुपये निकालने के लिए आई थी। कांति की मानें तो सोमवार को ही उसकी बेटी की बारात आने वाली है। इसलिए वह बैंक से रुपये निकालने के लिए परेशान है। उसे किसी ने सुझाव दिया कि बाजार में एसडीएम व सीओ बैठे हैं, यदि वे उसकी मदद कर देंगे तो उसे रुपये मिल जाएंगे। यह सुनते ही कांति अफसरों के पास पहुंची। वह फफक पड़ी बोली उसकी बेटी की बारात शाम को आ रही है। बैंक में रुपये रखे हैं, जो मिल नहीं रहे हैं। अफसरों ने उसे भरोसा दिलाया कि वह बैंक चले। वे लोग पीछे से आ रहे हैं कि जबकि उसे रुपये दिलाने के लिए अफसर नहीं पहुंचे।