{"_id":"58e92a974f1c1b9d285b3d05","slug":"wildness","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी को ठेंगा, निजी जांच रिपोर्ट पर भरोसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी को ठेंगा, निजी जांच रिपोर्ट पर भरोसा
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 09 Apr 2017 12:13 AM IST
विज्ञापन
ultrasound
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी अस्पतालों में कई जांचें फ्री होने के बाद भी डाक्टर कमीशन के लिए निजी केंद्रों से जांच कराते हैं। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शासन ने डाक्टरों को निर्देश दे रखा है कि मरीजों की निजी केंद्रों से किसी प्रकार की जांच न कराई जाए। इसके बावजूद सरकारी डाक्टर कमीशन के फेर में धड़ल्ले से अस्पतालों के आसपास स्थित पैथालॉजी सेंटरों पर जांच कराते हैं। डॉक्टर मरीजों से यह भी कह देते हैं कि प्राइवेट पैथालॉजी पर जाकर जांच कराना। सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट ठीक नहीं होती है। इसके बाद मरीज के पर्चे को चिकित्सक के पास खड़े दलाल अपने हाथ में ले लेते हैं। उसके बाद वह उसी स्थान पर मरीज को लेकर जाते हैं, जहां चिकित्सक की सेटिंग होती है। सरकारी अस्पतालों में एक्सरे होता है, लेकिन डाक्टरों का तर्क होता है कि बाहर से डिजिटल एक्सरे कराने से चोट स्पष्ट दिखती है। इसी तरह खून-पेशाब की जांच भी बाहर से कराई जाती है।
वहीं जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ सीएचसी के पैथालॉजी सेंटर दोपहर बाद बंद हो जाते हैं। पीएचसी पर किसी प्रकार की जांच नहीं की जाती हैं। इससे मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। दोपहर में गंभीर हालत में आने वाले मरीजों की जांच सरकारी अस्पताल में नहीं हो पाती है। इसके लिए उन्हें प्राइवेट सेंटर पर भेजा जाता है। देर से ओपीडी में बैठते हैं चिकित्सक ःजिला और महिला अस्पताल के चिकित्सक देर से ओपीडी में बैठते हैं। ऐसे में मरीजों को काफी देर तक लाइन में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। नंबर आते-आते कुछ ही मरीजों की जांच पैथालाजी के स्वास्थ्य कर्मचारी करते हैं। फिर देर हो जाने की बात कहकर लौटा देते हैं। उनकी भी प्राइवेट पैथालाजी संचालकों से सेटिंग होती है। सीएमएस, जिला अस्पताल महेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि चिकित्सकों से कहा गया है कि वे सरकारी अस्पताल से ही मरीजों की जांच कराएं। बाहर की जांच कराने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में डॉक्टर के वार्ड में बाहरी व्यक्ति के बैठने या दिखाई पडने पर मुकदमा दर्ज करवाकर गिरफ्तारी करवाई जाएगी।
विज्ञापन
वहीं जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ सीएचसी के पैथालॉजी सेंटर दोपहर बाद बंद हो जाते हैं। पीएचसी पर किसी प्रकार की जांच नहीं की जाती हैं। इससे मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। दोपहर में गंभीर हालत में आने वाले मरीजों की जांच सरकारी अस्पताल में नहीं हो पाती है। इसके लिए उन्हें प्राइवेट सेंटर पर भेजा जाता है। देर से ओपीडी में बैठते हैं चिकित्सक ःजिला और महिला अस्पताल के चिकित्सक देर से ओपीडी में बैठते हैं। ऐसे में मरीजों को काफी देर तक लाइन में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। नंबर आते-आते कुछ ही मरीजों की जांच पैथालाजी के स्वास्थ्य कर्मचारी करते हैं। फिर देर हो जाने की बात कहकर लौटा देते हैं। उनकी भी प्राइवेट पैथालाजी संचालकों से सेटिंग होती है। सीएमएस, जिला अस्पताल महेंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि चिकित्सकों से कहा गया है कि वे सरकारी अस्पताल से ही मरीजों की जांच कराएं। बाहर की जांच कराने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में डॉक्टर के वार्ड में बाहरी व्यक्ति के बैठने या दिखाई पडने पर मुकदमा दर्ज करवाकर गिरफ्तारी करवाई जाएगी।
विज्ञापन