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सर्दी चरम पर, नहीं बने रैन बसेरे
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 22 Dec 2014 11:41 PM IST
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शहर में यात्रियों एवं गरीब रिक्शाचालकों के लिए रैन बसेरा हर वर्ष नगर पालिका की ओर से बनाया जाता था। इस बार कड़ाके की ठंड के बावजूद पालिका उस ओर से उदासीन है। इससे रात में मुसाफिरों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है जबकि ठंड से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है।
यात्रियों और रिक्शाचालकों को ठंड से निजात दिलाने के लिए हर वर्ष नगर पालिका रैन बसेरा बनाती थी। रैन बसेरे का निर्माण निर्मल तिराहा के पास हादीहाल में होता था। यहां से रेलवे स्टेशन और कई प्राइवेट बस स्टैंड नजदीक पड़ते हैं। मगर कड़ाके की ठंड के बाद भी इस वर्ष नगर पालिका की ओर से रैन बसेरा नहीं बनाया गया। इससे रात में मुसाफिरों को ठंड से बचने के लिए रातजगा करना पड़ रहा है। ठंड से बचने के लिए वे चाय की दुकानों का सहारा ले रहे हैं। चाय पीकर वे किसी तरह रात बिताते हैं। यही हालत रिक्शाचालकों का भी है। वे पटरी किनारे अलाव जलाकर किसी तरह रातजगी करते हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद आला अधिकारी उदासीन बने हैं। इससे रात में यात्रियों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है जबकि ठंड की चपेट में आने से दो दिन के भीतर नौ लोगों की मौत हो चुकी है।
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यात्रियों और रिक्शाचालकों को ठंड से निजात दिलाने के लिए हर वर्ष नगर पालिका रैन बसेरा बनाती थी। रैन बसेरे का निर्माण निर्मल तिराहा के पास हादीहाल में होता था। यहां से रेलवे स्टेशन और कई प्राइवेट बस स्टैंड नजदीक पड़ते हैं। मगर कड़ाके की ठंड के बाद भी इस वर्ष नगर पालिका की ओर से रैन बसेरा नहीं बनाया गया। इससे रात में मुसाफिरों को ठंड से बचने के लिए रातजगा करना पड़ रहा है। ठंड से बचने के लिए वे चाय की दुकानों का सहारा ले रहे हैं। चाय पीकर वे किसी तरह रात बिताते हैं। यही हालत रिक्शाचालकों का भी है। वे पटरी किनारे अलाव जलाकर किसी तरह रातजगी करते हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद आला अधिकारी उदासीन बने हैं। इससे रात में यात्रियों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है जबकि ठंड की चपेट में आने से दो दिन के भीतर नौ लोगों की मौत हो चुकी है।
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