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मौसम ने दिया दगा, किसानों की बढ़ी मुसीबत
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मौसम ने दिया दगा, किसानों की बढ़ी मुसीबत
सावन के महीने में उड़ रही है धूल, बारिश न होने के कारण धान की रोपाई प्रभावित
कृषि विभाग कर रहा 80 प्रतिशत धान की रोपाई का दावा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। सावन के महीने में चिलचिलाती धूप देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। पानी के अभाव में किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। धान की नर्सरी डालने वाले किसान सावन में पानी का इंतजार कर रहे थे, मगर चिलचिलाती धूप देखकर वह चकरा गए हैं। हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि 80 प्रतिशत धान की रोपाई हो चुकी है।
मौसम की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ रही है। जो किसान धान की रोपाई कर चुके हैं, वह सिंचाई करने के लिए परेशान हैं और जो नहीं कर पाए हैं वह बरसात होने का इंतजार कर रहे हैं। जिले में 98,432 हेक्टेअर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया था। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अभी तक लक्ष्य के 80 प्रतिशत धान की रोपाई हो चुकी है। जबकि वास्तविकता इससे अलग है। आलम यह है कि अधिकांश किसान बरसात के पानी के इंतजार में धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं। हालांकि जिन इलाकों में नहरें हैं, वहां तो धान की रोपाई हो चुकी है, मगर जहां पर नहरें नहीं हैं और केवल बरसात के पानी पर ही किसान आश्रित हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस सीजन में 351.0 मिमी ही बरसात हुई है जो पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी कम है।
इनसेट---------
18 घंटे का दावा, नौ घंटे मिल रही बिजली
गांव के किसानों को 18 घंटे बिजली मिलने का दावा किया जा रहा है, मगर नौ घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।
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वर्जन------
जिले में अपेक्षा के अनुरूप बरसात नहीं होने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। जिले के अधिकांश किसान धान की खेती करते हैं, मगर सावन में उतनी बरसात नहीं हुई जितनी आशा की जा रही थी। हालांकि 80 प्रतिशत क्षेत्रफल पर किसानों ने धान की रोपाई कर ली है।
डॉ. अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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सावन के महीने में उड़ रही है धूल, बारिश न होने के कारण धान की रोपाई प्रभावित
कृषि विभाग कर रहा 80 प्रतिशत धान की रोपाई का दावा
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। सावन के महीने में चिलचिलाती धूप देखकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। पानी के अभाव में किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। धान की नर्सरी डालने वाले किसान सावन में पानी का इंतजार कर रहे थे, मगर चिलचिलाती धूप देखकर वह चकरा गए हैं। हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि 80 प्रतिशत धान की रोपाई हो चुकी है।
मौसम की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ रही है। जो किसान धान की रोपाई कर चुके हैं, वह सिंचाई करने के लिए परेशान हैं और जो नहीं कर पाए हैं वह बरसात होने का इंतजार कर रहे हैं। जिले में 98,432 हेक्टेअर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया था। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अभी तक लक्ष्य के 80 प्रतिशत धान की रोपाई हो चुकी है। जबकि वास्तविकता इससे अलग है। आलम यह है कि अधिकांश किसान बरसात के पानी के इंतजार में धान की रोपाई नहीं कर पाए हैं। हालांकि जिन इलाकों में नहरें हैं, वहां तो धान की रोपाई हो चुकी है, मगर जहां पर नहरें नहीं हैं और केवल बरसात के पानी पर ही किसान आश्रित हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस सीजन में 351.0 मिमी ही बरसात हुई है जो पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी कम है।
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18 घंटे का दावा, नौ घंटे मिल रही बिजली
गांव के किसानों को 18 घंटे बिजली मिलने का दावा किया जा रहा है, मगर नौ घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।
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वर्जन------
जिले में अपेक्षा के अनुरूप बरसात नहीं होने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। जिले के अधिकांश किसान धान की खेती करते हैं, मगर सावन में उतनी बरसात नहीं हुई जितनी आशा की जा रही थी। हालांकि 80 प्रतिशत क्षेत्रफल पर किसानों ने धान की रोपाई कर ली है।
डॉ. अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी।