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बेखौफ हुए कुत्ते, बंदर खूंखार, इंजेक्शन की खपत रोजाना एक हजार पार

Tue, 08 Dec 2020 10:36 PM IST
Pratapgarh Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 08 Dec 2020 10:36 PM IST
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Unleashed dogs, monkey rabid, injection consumption crosses a thousand daily
प्रतापगढ़ - फोटो : pratapgarh

प्रतापगढ़। जिले में आवारा कुत्ते और बंदर लोगों के लिए नया खतरा बन गए हैं। जिला अस्पताल में ही इनके काटने से जख्मी करीब तीन से चार सौ लोग इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। इसमें अगर निजी क्लीनिक व नर्सिंग होम समेत अन्य अस्पतालों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा प्रतिदिन एक हजार तक के पार पहुंच रहा है।

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जिला अस्पताल के डॉ. अनुज चौरसिया ने बताया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए शहर ही नहीं बल्कि आसपास तहसील के लोग भी आ रहे हैं। समस्या को देखते हुए मना भी नहीं किया जा सकता। रानीगंज सीएचसी अधीक्षक वरिष्ठ डॉ. पंकज मिश्र कहते हैं कि रैबीज में मृत्युदर लगभग 100 प्रतिशत है। अगर समय पर मरीजों का उपचार न हो तो मरीजों के जान का भी खतरा बना रहता है। हालांकि मौजूदा हालात में एंटी रैबीज की पर्याप्त उपलब्धता के चलते मृत्यु दर कम हो गई हैं। समय से एंटी रेबीज का इंजेक्शन न लगवाने वाले लोगों की ही जान जा रही है।
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कुत्ते के काटने पर सबसे पहले करें यह उपाय
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर मनोज खत्री ने बताया कि यदि कुत्ते काट लेते हैं, तो सबसे पहले लाइफ ब्वाय साबुन से जख्म को दस मिनट तक धुलाई करना चाहिए। किसी के बहकावे में आकर जख्म पर किसी प्रकार की मिर्ची या नमक को न लगाए। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक से संपर्क कर टीटी का इंजेक्शन लगवाए। 24 घंटे के अंदर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए।
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शहर व नगर पंचायतों में आवारा कुत्तों व बंदरों को पकड़ने की बात करने पर नगर पालिका अपना पल्ला झाड़ लेता है। पालिका के अफसरों व कर्मचारियों से कुत्तों और बंदरों के पकड़ने की बात जब भी लोग करते हैं तो वे किनारा करने लगते हैं। उनका यही कहना होता है कि शासन की ओर से उन्हें बंदर और कुत्ते को पकड़ने के लिए न तो किसी प्रकार का आदेश दिया गया है और न ही संसाधन। बल्कि आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए काऊ कैचर की व्यवस्था की गई है।


सीएचसी में होती है एंटी रेबीज इंजेक्शन के नाम पर वसूली
जिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो सीएचसी में एंटी रेबीज इंजेक्शन के नाम पर मरीजों से वसूली होती है। उन्हें यह बताया जाता है कि प्रदेेश सरकार की ओर से इंजेक्शन मिल नहीं रहा है। कहीं से व्यवस्था करके रखा गया हैं उसे लगा रहे हैं। जिसके एवज में 100 रुपये तक मरीजों से वसूली किया जाता है।


एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त है। जिन लोगों को कुत्ता या फिर जहरीले जानवर काट लेते हैं यदि चिकित्सक को समझ में आता है तो तत्काल इंजेक्शन  लगाया जाता है। डॉ. पीपी पांडेय, सीएमएस जिला अस्पताल।

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