{"_id":"5a04b0ed4f1c1b70548bc0a0","slug":"two-gram-head-suspension-in-toilets-scam","type":"story","status":"publish","title_hn":"शौचालय घोटाले में दो ग्राम प्रधान सस्पेंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शौचालय घोटाले में दो ग्राम प्रधान सस्पेंड
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 10 Nov 2017 01:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के दो अलग-अलग ब्लॉकों के ग्राम प्रधान के खिलाफ डीएम मनीष कुमार वर्मा ने गुरुवार को निलंबन की कार्रवाई कर दी। शौचालय के धन में गोलमाल मिलने पर प्रधान व सेक्रेट्रियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का भी निर्देश दिया है। कार्रवाई के बाद डीएम ने आरोप पत्र तय करने की जिम्मेदारी डीडीओ को सौंपी है। एक साथ दो ग्राम प्रधानों के निलंबन व एफआईआर दर्ज कराने के आदेश से बाद से विकास के धन से खिलवाड़ करने वाले ग्राम प्रधानों व सेक्रेट्रियों में हड़कंप है।
विकास खंड कड़ा के अफजलपुर सातों निवासी शिवबली सिंह ने डीएम मनीष कुमार वर्मा से शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि शौचालय निर्माण में ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ने मनमानी करते हुए धनराशि के साथ गोलमाल किया है। मामले की जांच डीएम ने डीपीआरओ कमल किशोर को सौंपा। जांच के दौरान दो सौ पुराने व 83 नए शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी व धनराशि के खाते से निकालकर गोलमाल का मामला प्रकाश में आया। इसी तरह रैयादेह माफी निवासी सत्यपाल ने शासन के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी।
मामले की जांच जिला समन्वयक सुजीत शुक्ल के साथ डीपीआरओ कमल किशोर ने संयुक्त रूप से किया। यहां भी दो सौ शौचालयों की धनराशि आठ माह पूर्व खाते से निकाली गई पर निर्माण कार्य मौके पर नहीं मिला। दोनों ग्राम सभाओं में विकास के धन में गोलमाल मिलने पर डीपीआरओ ने रिपोर्ट डीएम मनीष कुमार वर्मा को सौंपी। डीपीआरओ की रिपोर्ट पर डीएम ने गुुरुवार को अफजलपुर सातों के ग्राम प्रधान गुलाम मुस्तफा व ग्राम प्रधान रैया देह माफी अनीता देवी को निलंबित करते हुए वित्तीय अधिकार छीन लिए।
विज्ञापन
दोनों ग्राम प्रधानों व सेक्रेटरी पुनीत सिंह, बलराम चौधरी के खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। डीएम की कार्रवाई से विकास के धन से खिलवाड़ करने वाले अन्य ग्राम प्रधानों में हड़कंप मच गया है।
मेड़रहा ग्राम प्रधान पर क्यों मेहरबान है प्रशासन
शौचालय आवंटन में गड़बड़ी का मामला विकास खंड कौशांबी के मेड़रहा गांव में भी प्रकाश में आया था। जिला समन्वयक से जांच कराने के बाद डीपीआरओ ने खुद जांच की थी। इसके बाद डीएम ने ग्राम प्रधान से जवाब-तलब किया था। प्रधान का जवाब मिलने के पखवारे भर बाद भी कार्रवाई नहीं की जा सकी। सूत्रों की मानें तो ग्राम प्रधान के कारनामों की तीसरी बार जांच कराने के लिए जिला युवा कल्याण अधिकारी को लगाया गया है। यहां पर सवाल यह उठता है कि डीपीआरओ की जांच रिपोर्ट के बाद मामले जरूरी कार्रवाई क्यों नहीं की गई है?
विज्ञापन
विकास खंड कड़ा के अफजलपुर सातों निवासी शिवबली सिंह ने डीएम मनीष कुमार वर्मा से शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि शौचालय निर्माण में ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी ने मनमानी करते हुए धनराशि के साथ गोलमाल किया है। मामले की जांच डीएम ने डीपीआरओ कमल किशोर को सौंपा। जांच के दौरान दो सौ पुराने व 83 नए शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी व धनराशि के खाते से निकालकर गोलमाल का मामला प्रकाश में आया। इसी तरह रैयादेह माफी निवासी सत्यपाल ने शासन के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी।
विज्ञापन
मामले की जांच जिला समन्वयक सुजीत शुक्ल के साथ डीपीआरओ कमल किशोर ने संयुक्त रूप से किया। यहां भी दो सौ शौचालयों की धनराशि आठ माह पूर्व खाते से निकाली गई पर निर्माण कार्य मौके पर नहीं मिला। दोनों ग्राम सभाओं में विकास के धन में गोलमाल मिलने पर डीपीआरओ ने रिपोर्ट डीएम मनीष कुमार वर्मा को सौंपी। डीपीआरओ की रिपोर्ट पर डीएम ने गुुरुवार को अफजलपुर सातों के ग्राम प्रधान गुलाम मुस्तफा व ग्राम प्रधान रैया देह माफी अनीता देवी को निलंबित करते हुए वित्तीय अधिकार छीन लिए।
विज्ञापन
दोनों ग्राम प्रधानों व सेक्रेटरी पुनीत सिंह, बलराम चौधरी के खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। डीएम की कार्रवाई से विकास के धन से खिलवाड़ करने वाले अन्य ग्राम प्रधानों में हड़कंप मच गया है।
मेड़रहा ग्राम प्रधान पर क्यों मेहरबान है प्रशासन
शौचालय आवंटन में गड़बड़ी का मामला विकास खंड कौशांबी के मेड़रहा गांव में भी प्रकाश में आया था। जिला समन्वयक से जांच कराने के बाद डीपीआरओ ने खुद जांच की थी। इसके बाद डीएम ने ग्राम प्रधान से जवाब-तलब किया था। प्रधान का जवाब मिलने के पखवारे भर बाद भी कार्रवाई नहीं की जा सकी। सूत्रों की मानें तो ग्राम प्रधान के कारनामों की तीसरी बार जांच कराने के लिए जिला युवा कल्याण अधिकारी को लगाया गया है। यहां पर सवाल यह उठता है कि डीपीआरओ की जांच रिपोर्ट के बाद मामले जरूरी कार्रवाई क्यों नहीं की गई है?