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डूब गए 48 लाख, अब नए सिरे से बनेगा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट
pratapgarh
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:33 AM IST
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प्रतापगढ़। शहर में सई नदी के किनारे आठ साल पहले लगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह खराब हो गया है। सारे उपकरणों को जंग चट कर गया है। कुछ चोर उठा ले गए। जलनिगम की लापरवाही और घपलेबाजी के चलते इस योजना का लाभ शहरियों को अभी तक नहीं मिल सका। अब नए सिरे से पूना की कंपनी ने सर्वे करने के बाद 48 लाख का इस्टीमेट तैयार कर जलनिगम को सौंपा है। जिसकी धनराशि के लिए पत्र विभागीय अधिकारियों को भेजा गया है।
सपा के पूर्व सांसद अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के प्रयास से शहरियों को सीवर योजना मिली। सई नदी के किनारे सबसे पहले सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना था। कुछ अवरोध के बाद आठ करोड़ की लागत से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनना शुरू हुआ। वर्ष 2010 में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया। कई सालों बाद शहर में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ जो अभी तक चल रहा है। जलनिगम की लापरवाही से अभी तक ट्रीटमेंट प्लांट का ट्रायल तक नहीं शुरू हो सका। सदर बाजार चौराहे के पास पाइप लाइन को कनेक्ट किया जाना बाकी है। इन आठ सालों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के उपकरण जंग खा गए। बहुत से उपकरण नशेड़ी चुरा ले गए। जिससे वह अपने नशे की पूर्ति कर लिए। प्लांट की देखरेख का जिम्मा पाने वाले जलनिगम के अधिकारी केवल औपचारिता ही निभाते रहे। प्लांट के अधिकांश उपकरण खराब हो गए थे।
जिनको बदलने के बाद ही प्लांट चालू हो सकता था। इसलिए प्लांट बनाने वाली पूना की कंपनी को जलनिगम ने बुलाया। टीम के इंजीनियरों ने सर्वे करने के बाद करीब 48 लाख के उपकरण को खराब बता दिया। सूत्रों की मानें तो बहुत से कलपुर्जे गायब भी थे। सभी उपकरण फिर से लगाने के बाद ही प्लांट चालू होने का भरोसा इंजीनियरों की टीम ने दिया। कंपनी के इस्टीमेट को जलनिगम ने मुख्य अभियंता जलनिगम को भेजा है ताकि जल्द से जल्द बजट जारी हो सके। इसके बाद सीवर ट्रीटमेंट प्लांट चालू करने की दिशा में काम प्रारंभ हो। फिलहाल इस साल भी शहरियों को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का लाभ मिलने की संभावना कम ही दिख रही है।
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सपा के पूर्व सांसद अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के प्रयास से शहरियों को सीवर योजना मिली। सई नदी के किनारे सबसे पहले सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना था। कुछ अवरोध के बाद आठ करोड़ की लागत से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनना शुरू हुआ। वर्ष 2010 में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया। कई सालों बाद शहर में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ जो अभी तक चल रहा है। जलनिगम की लापरवाही से अभी तक ट्रीटमेंट प्लांट का ट्रायल तक नहीं शुरू हो सका। सदर बाजार चौराहे के पास पाइप लाइन को कनेक्ट किया जाना बाकी है। इन आठ सालों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के उपकरण जंग खा गए। बहुत से उपकरण नशेड़ी चुरा ले गए। जिससे वह अपने नशे की पूर्ति कर लिए। प्लांट की देखरेख का जिम्मा पाने वाले जलनिगम के अधिकारी केवल औपचारिता ही निभाते रहे। प्लांट के अधिकांश उपकरण खराब हो गए थे।
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जिनको बदलने के बाद ही प्लांट चालू हो सकता था। इसलिए प्लांट बनाने वाली पूना की कंपनी को जलनिगम ने बुलाया। टीम के इंजीनियरों ने सर्वे करने के बाद करीब 48 लाख के उपकरण को खराब बता दिया। सूत्रों की मानें तो बहुत से कलपुर्जे गायब भी थे। सभी उपकरण फिर से लगाने के बाद ही प्लांट चालू होने का भरोसा इंजीनियरों की टीम ने दिया। कंपनी के इस्टीमेट को जलनिगम ने मुख्य अभियंता जलनिगम को भेजा है ताकि जल्द से जल्द बजट जारी हो सके। इसके बाद सीवर ट्रीटमेंट प्लांट चालू करने की दिशा में काम प्रारंभ हो। फिलहाल इस साल भी शहरियों को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का लाभ मिलने की संभावना कम ही दिख रही है।
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