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एक ही पटरी पर दौड़ीं दो ट्रेनें, टला बड़ा हादसा
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:38 PM IST
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ट्रेन
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गुरुवार को प्रतापगढ़ में एक बड़ा ट्रेन हादसा टल गया। सुबह के समय एक ही पटरी पर इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेन के आमने-सामने आ जाने से टक्कर होते-होते बच गई। दोनों ट्रेनों को एक ही पटरी पर दौड़ा दिया गया था। चूक का एहसास होने पर केबिनमैन ने किसी तरह पैसेंजर ट्रेन को रोका। उधर, इंटरसिटी के चालक ने भी सूझबूझ दिखाते हुए ट्रेन को आउटर पर रोक लिया। जिससे दोनों ट्रेनों में टक्कर होने से बच गई। डीआरएम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। प्रयाग से फैजाबाद जाने वाली वनएफपी 54371 पैसेंजर गुुरुवार को करीब एक घंटे की देरी से प्रतापगढ़ में प्लेटफार्म दो पर पहुंची थी। उसकी चिलबिला साइड से आ रही जौनपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से क्रासिंग होनी थी। स्टेशन मास्टर ने केबिनमैन से इंटरसिटी को पहले रिसीव करने के लिए सिग्नल लोवर करने को कहा। इसी बीच प्रतापगढ़ में खड़ी वन पीएफ पैसेंजर का भी सिग्नल चिलबिला के लिए लोवर हो गया। संकेत मिलने के बाद पैसेंजर के चालक ने ट्रेन को आगे बढ़ा दिया। उधर, चिलबिला से इंटरसिटी का भी सिग्नल हो गया। इस तरह से दोनों गाड़ियां एक ही ट्रैक पर चल पड़ीं। दोनों के बीच करीब पांच सौ मीटर का फासला रह गया था।
तभी चूक का अहसास होने पर कर्मचारियों ने फौरन केबिनमैन को फोन करके पैसेंजर को रोकने के लिए कहा। मैसेज के बाद केबिनमैन के हाथ-पांव फूल गए। आननफानन में उसने किसी तरह से एडवांस सिग्नल को लाल कर ट्रेन को रोक दिया। जिससे पैसेंजर जेल रोड क्रासिंग के पास जाकर खड़ी हो गई। उसी पटरी पर सामने से आ रही इंटरसिटी को भी इसी तरह से आउटर सिग्नल के पार होने से पहले ही रास्ते में रोक दिया गया। ट्रेनरुकने का कारण जानने के लिये जब यात्रियों ने बाहर झांका तो सामने का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनो गाड़ियां एक ही पटरी पर आमने-सामने खड़ी थीं। इसके बाद परिचालन कर्मियों ने पैसेंजर को तत्काल प्रतापगढ़ स्टेशन पर वापस लेने के लिए चालक से कहा। मगर वह लौटने को राजी नहीं हुआ। उसने इसके लिये लिखित आदेश मांगा। आदेश मिलने के बाद ही पैसेंजर लौटकर प्रतापगढ़ स्टेशन पर प्लेटफार्म दो पर आई।
रास्ता साफ होने के बाद इंटरसिटी आउटर से चली और प्रतापगढ़ प्लेटफार्म नंबर तीन पर आई। उसके काफी देर बाद पैसेंजर को चिलबिला की ओर रवाना किया गया। एसएस केएन शर्मा का कहना है कि एसएम इबरार ने सेंट्रल केबिन मैन रामचंद्र को इंटरसिटी लेने के लिए सिग्नल लोवर करने को कहा था, मगर उसने पता नहीं कैसे वनएफपी पैसेंजर के जाने का सिग्नल लोवर कर दिया। संयोग था कि वेस्ट केबिन से आउटर का सिग्नल लोवर नहीं था। जिससे इंटरसिटी को आगे बढ़ने का मौका नहंी मिला। पैसेंजर को वापस लिया गया। तब जाकर इंटरसिटी को चलाया गया। समय रहते हादसा टल गया। उधर, डीआरएम ने पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिये हैं। निर्देश मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच रिपोर्ट और कर्मचारियों के बयान लेने का काम शुरू कर दिया गया है।
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तभी चूक का अहसास होने पर कर्मचारियों ने फौरन केबिनमैन को फोन करके पैसेंजर को रोकने के लिए कहा। मैसेज के बाद केबिनमैन के हाथ-पांव फूल गए। आननफानन में उसने किसी तरह से एडवांस सिग्नल को लाल कर ट्रेन को रोक दिया। जिससे पैसेंजर जेल रोड क्रासिंग के पास जाकर खड़ी हो गई। उसी पटरी पर सामने से आ रही इंटरसिटी को भी इसी तरह से आउटर सिग्नल के पार होने से पहले ही रास्ते में रोक दिया गया। ट्रेनरुकने का कारण जानने के लिये जब यात्रियों ने बाहर झांका तो सामने का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनो गाड़ियां एक ही पटरी पर आमने-सामने खड़ी थीं। इसके बाद परिचालन कर्मियों ने पैसेंजर को तत्काल प्रतापगढ़ स्टेशन पर वापस लेने के लिए चालक से कहा। मगर वह लौटने को राजी नहीं हुआ। उसने इसके लिये लिखित आदेश मांगा। आदेश मिलने के बाद ही पैसेंजर लौटकर प्रतापगढ़ स्टेशन पर प्लेटफार्म दो पर आई।
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रास्ता साफ होने के बाद इंटरसिटी आउटर से चली और प्रतापगढ़ प्लेटफार्म नंबर तीन पर आई। उसके काफी देर बाद पैसेंजर को चिलबिला की ओर रवाना किया गया। एसएस केएन शर्मा का कहना है कि एसएम इबरार ने सेंट्रल केबिन मैन रामचंद्र को इंटरसिटी लेने के लिए सिग्नल लोवर करने को कहा था, मगर उसने पता नहीं कैसे वनएफपी पैसेंजर के जाने का सिग्नल लोवर कर दिया। संयोग था कि वेस्ट केबिन से आउटर का सिग्नल लोवर नहीं था। जिससे इंटरसिटी को आगे बढ़ने का मौका नहंी मिला। पैसेंजर को वापस लिया गया। तब जाकर इंटरसिटी को चलाया गया। समय रहते हादसा टल गया। उधर, डीआरएम ने पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिये हैं। निर्देश मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच रिपोर्ट और कर्मचारियों के बयान लेने का काम शुरू कर दिया गया है।
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