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Pratapgarh News: पीएम किसान सम्मान निधि में सेंध लगाने वाले गिरोह के तीन सदस्य कुंडा से गिरफ्तार
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प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में सेंध लगाने वाले अंतरजनपदीय गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने मंगलवार को कुंडा से गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से बायोमीट्रिक डिवाइस और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। सरकारी पोर्टल की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग करते थे।
पकड़े गए आरोपियों में संग्रामगढ़ के शिवकुमार यादव, कुंडा के अनुराग गुप्ता और सरायकीरत भदरी के जितेंद्र कुमार शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि शिवकुमार यादव सीएससी संचालक था। वह अपात्रों से रकम लेकर पोर्टल पर पंजीकरण करता था। तहसील कुंडा में तैनात संविदा वीआरसी ऑपरेटर अनुराग गुप्ता सरकारी आईडी और पासवर्ड लीक करता था। जितेंद्र कुमार अपात्रों से धनराशि वसूल करता था।
आरोपी बिना किसी भूमि रिकॉर्ड के अपात्रों का फर्जी पंजीकरण कराते थे। पुलिस ने उनके पास से दो लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन, सात सिम कार्ड भी बरामद किए हैं। फिंगर स्कैनर डिवाइस और यूपीआई स्क्रीनशॉट जैसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि धोखाधड़ी के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। रिमोट वीडियो की मदद भी लेते थे। साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र सहित आईटी एक्ट में प्राथमिकी दर्ज की है।
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वर्जन
तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। एक आरोपी तहसील कुंडा में तैनात संविदा वीआरसी ऑपरेटर है। गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं, यह जानकारी जुटाई जा रही है।
- आलोक कुमार, एएसपी पूर्वी
सम्मान निधि में हुआ था 60 करोड़ रुपये का घोटाला
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में प्रतापगढ़ में 60 करोड़ के गबन का मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया था। उप कृषि निदेशक अश्वनी सिंह ने साइबर थाने में अज्ञात के खिलाफ हेराफेरी करने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तीन लाख से अधिक अपात्रों के नाम की सूची भी सौंपी थी।
चार साल पहले कुंडा तहसील में योजना की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग करके जालसाजों ने बड़े पैमाने पर धनराशि डकारी थी। नाबालिग और अपात्रों का पंजीकरण कराया गया था।पंजीकरण सूची में दूसरे जिलों के लोगों को भी शामिल किया गया था। 2021-22 में यह खेल शुरू हुआ तो जांच तहसील प्रशासन से लेकर विजिलेंस तक ने की। बाद में शासन स्तर पर जांच में गड़बड़ी की पुष्टि पर सख्ती हुई।
शासन के निर्देश पर डीएम अभिषेक पांडेय ने एसपी को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। उप कृषि निदेशक अश्वनी कुमार सिंह ने पुलिस को 3,18,846 अपात्रों की सूची पेन ड्राइव में सौंपी थी। पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि जिस आइडी से लॉगिन हुआ, उसके इंटरनेट प्रोटोकॉल (आइपी) एड्रेस को तकनीकी टीमों ने खंगाला। एएसपी पूर्वी आलोक कुमार को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद मंगलवार को पुलिस को सफलता हाथ लगी।
कुंडा तहसील के सबसे ज्यादा अपात्र
पुलिस को सौंपी गई तीन लाख से अधिक अपात्रों की सूची में कुंडा के करीब 40 फीसदी पंजीकरण फर्जी पाए गए हैं। 60 फीसदी में मध्य प्रदेश, बिहार व प्रदेश के दूसरे जिलों के लोग हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनके नाम पोर्टल पर दर्ज है लेकिन सत्यापन व अन्य कारणों से भुगतान नहीं हो सका।
एक दिन में औसतन तीन हजार की हुई थी फर्जी इंट्री
जांच में सामने आया कि डायरेक्ट इंट्री के माध्यम से एक दिन में औसतन तीन हजार लोगों के पंजीकरण किए गए। वर्ष 2021-22 में पंजीकरण की व्यवस्था ओटीपी आधारित थी। इसी के जरिये अपात्र लोगों के नाम योजना में दर्ज कराए गए।
प्रकरण पर एक नजर-
2019-20 में पीएम किसान निधि का शुरू हुआ था पंजीकरण।
2021-22 में जनसेवा केंद्र और तहसीलदार कुंडा की आईडी हैक कर दर्ज हुए थे फर्जी नाम।
2023-24 में कुंडा एसडीएम की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीएम ने दिए थे जांच के आदेश।
2024-25 में विजिलेंस ने पीएम किसान सम्मान निधि में हेराफेरी के प्रकरण की जांच।
10 जुलाई 2026 को शासन ने डीएम को कार्रवाई के लिए दिया था आदेश।
09 अगस्त को डीएम ने कृषि विभाग व एसपी को लिखा एफआईआर के लिए पत्र।
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पकड़े गए आरोपियों में संग्रामगढ़ के शिवकुमार यादव, कुंडा के अनुराग गुप्ता और सरायकीरत भदरी के जितेंद्र कुमार शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि शिवकुमार यादव सीएससी संचालक था। वह अपात्रों से रकम लेकर पोर्टल पर पंजीकरण करता था। तहसील कुंडा में तैनात संविदा वीआरसी ऑपरेटर अनुराग गुप्ता सरकारी आईडी और पासवर्ड लीक करता था। जितेंद्र कुमार अपात्रों से धनराशि वसूल करता था।
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आरोपी बिना किसी भूमि रिकॉर्ड के अपात्रों का फर्जी पंजीकरण कराते थे। पुलिस ने उनके पास से दो लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन, सात सिम कार्ड भी बरामद किए हैं। फिंगर स्कैनर डिवाइस और यूपीआई स्क्रीनशॉट जैसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि धोखाधड़ी के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। रिमोट वीडियो की मदद भी लेते थे। साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र सहित आईटी एक्ट में प्राथमिकी दर्ज की है।
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वर्जन
तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। एक आरोपी तहसील कुंडा में तैनात संविदा वीआरसी ऑपरेटर है। गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं, यह जानकारी जुटाई जा रही है।
- आलोक कुमार, एएसपी पूर्वी
सम्मान निधि में हुआ था 60 करोड़ रुपये का घोटाला
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में प्रतापगढ़ में 60 करोड़ के गबन का मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया था। उप कृषि निदेशक अश्वनी सिंह ने साइबर थाने में अज्ञात के खिलाफ हेराफेरी करने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तीन लाख से अधिक अपात्रों के नाम की सूची भी सौंपी थी।
चार साल पहले कुंडा तहसील में योजना की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग करके जालसाजों ने बड़े पैमाने पर धनराशि डकारी थी। नाबालिग और अपात्रों का पंजीकरण कराया गया था।पंजीकरण सूची में दूसरे जिलों के लोगों को भी शामिल किया गया था। 2021-22 में यह खेल शुरू हुआ तो जांच तहसील प्रशासन से लेकर विजिलेंस तक ने की। बाद में शासन स्तर पर जांच में गड़बड़ी की पुष्टि पर सख्ती हुई।
शासन के निर्देश पर डीएम अभिषेक पांडेय ने एसपी को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। उप कृषि निदेशक अश्वनी कुमार सिंह ने पुलिस को 3,18,846 अपात्रों की सूची पेन ड्राइव में सौंपी थी। पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि जिस आइडी से लॉगिन हुआ, उसके इंटरनेट प्रोटोकॉल (आइपी) एड्रेस को तकनीकी टीमों ने खंगाला। एएसपी पूर्वी आलोक कुमार को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद मंगलवार को पुलिस को सफलता हाथ लगी।
कुंडा तहसील के सबसे ज्यादा अपात्र
पुलिस को सौंपी गई तीन लाख से अधिक अपात्रों की सूची में कुंडा के करीब 40 फीसदी पंजीकरण फर्जी पाए गए हैं। 60 फीसदी में मध्य प्रदेश, बिहार व प्रदेश के दूसरे जिलों के लोग हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनके नाम पोर्टल पर दर्ज है लेकिन सत्यापन व अन्य कारणों से भुगतान नहीं हो सका।
एक दिन में औसतन तीन हजार की हुई थी फर्जी इंट्री
जांच में सामने आया कि डायरेक्ट इंट्री के माध्यम से एक दिन में औसतन तीन हजार लोगों के पंजीकरण किए गए। वर्ष 2021-22 में पंजीकरण की व्यवस्था ओटीपी आधारित थी। इसी के जरिये अपात्र लोगों के नाम योजना में दर्ज कराए गए।
प्रकरण पर एक नजर-
2019-20 में पीएम किसान निधि का शुरू हुआ था पंजीकरण।
2021-22 में जनसेवा केंद्र और तहसीलदार कुंडा की आईडी हैक कर दर्ज हुए थे फर्जी नाम।
2023-24 में कुंडा एसडीएम की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीएम ने दिए थे जांच के आदेश।
2024-25 में विजिलेंस ने पीएम किसान सम्मान निधि में हेराफेरी के प्रकरण की जांच।
10 जुलाई 2026 को शासन ने डीएम को कार्रवाई के लिए दिया था आदेश।
09 अगस्त को डीएम ने कृषि विभाग व एसपी को लिखा एफआईआर के लिए पत्र।