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पूर्व प्रधान के बेटे समेत तीन की मौत, 431 नए मरीज मिले

Fri, 07 May 2021 01:22 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 07 May 2021 01:22 AM IST
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Three dead, including former Pradhan's son, 431 new patients found
प्रतापगढ़। जिले में कोरोना ने कोहराम मचा रखा है। बृहस्पतिवार को 24 घंटे के भीतर जिले में कोरोना संक्रमित तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 431 नए मरीज सामने आए हैं। अब संक्रमितों की संख्या बढ़कर 13491 हो गई है। इसमें 142 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 9403 लोग स्वस्थ घोषित किए जा चुके हैं।
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शिवगढ़ के राजापुर गांव के पूर्व प्रधान हरिश्चंद्र दूबे कोरोना संक्रमित हो गए थे। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
इसके बाद उनके बेटे की हालत बिगड़ गई। परिजनों ने उन्हें एसआरएन में भर्ती कराया। इलाज के दौरान बृहस्पतिवार भोर में उसने भी दम तोड़ दिया। लालगंज के एक सहित्यकार भी संक्रमण की जद में आ गए थे। वह होम आइसोलेशन में थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इससे परिजनों में कोहराम मच गया। कंधई के तरहदा गांव निवासी कोरोना संक्रमित युवक ने भी दम तोड़ दिया। बीते सप्ताह उसके पिता की भी कोरोना से मौत हो गई थी। उधर, शहर में बृहस्पतिवार को दो व्यापारियों और एक प्राइवेट अस्पताल की नर्स समेत 32 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। भुपियामऊ का रहने वाला रोडवेज कर्मचारी और रानीगंज के दो स्वास्थ्य कर्मचारी भी पाजिटिव मिले हैं। रानीगंज के अलग-अलग इलाकों में 16 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। सुखपालनगर पीएचसी क्षेत्र में 22 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। कुंडा में 21 व लालगंज के 16 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। पट्टी में 15 लोग पाजिटिव मिले हैं।
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संक्रमित कोई और, फोन जा रहा किसी और के पास
कोरोना संक्रमण काल के दौर में भी लोग मनमानी कर रहे हैं। कोरोना जांच के दौरान लोग दूसरों का मोबाइल नंबर दर्ज करा दे रहे हैं। रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य कर्मचारी उस नंबर पर फोनकर संक्रमित होने की जानकारी देते हैं। यह सुनते ही लोग लोग घबरा जा रहे हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि बिना जांच कराए ही वह संक्रमित कैसे हो गए।
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आनकाल ड्यूटी पर नहीं आ रहे चिकित्सक
जिन चिकित्सकों की ड्यूटी सीएमएस आनकाल के लिए लगा रहे हैं, वह कोरोना के चलते मरीजों को देखने के लिए अस्पताल नहीं आ रहे हैं। यदि वे लगातार अस्पताल में राउंड लगाते रहें तो मरीजों को काफी राहत मिल सकती है। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों का समय मरीजों को भर्ती करने में ही बीत जाता है।
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