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प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं : स्वामी रामभद्राचार्य
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भगवान कृष्ण के सखा ने एक बार भोजन के लिए रखा सारा छाछ पी लिया। कृष्ण ने उन्हें गुदगुदाया। मुंह से छाछ गिरा तो सारा पी गए। इस प्रसंग के माध्यम से स्वामी रामभद्राचार्य ने जीवन में प्रेम का महत्व बताया। बुधवार को बाबा रामदेव और परमार्थ निकेतन हरिद्धार के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद भी कथा सुनने पहुंचे।
उन्होंने बताया कि पूतना के छोटे भाई अघासुर के मुख में गोकुल के सारे बच्चे चले गए थे। कन्हैया ने अघासुर के मुंह में प्रवेश कर सबको बाहर निकाला। लेकिन सभी बच्चों की मौत हो चुकी थी। भगवान ने उनको फिर से जीवित कर अघासुर का अंत किया।
उन्हाेंने सभी से कहा चलो भोजन किया जाए। सब भोजन करने लगे। उसी समय भगवान के एक मित्र मथमंगल आए। उस समय भोजन नहीं था। उन्होंने वहां रखा छाछ मुंह में भर लिया। तब भगवान ने उनकी कांख में गुदगुदाया। मुख से छाछ गिरने लगा और भगवान पूरा छाछ पी गए। यह देख ब्रह्मा जी को संदेह हो गया कि यह कैसे भगवान। तब उन्होंने बताया कि प्रेेम से बढ़कर और कुछ नहीं।
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अगले प्रसंग में कहा कि गाय चराने के समय बलराम ने कृष्ण से कहा कि गोपियां अब गांव में नहीं दिखाई देती हैं, क्या कृष्ण के प्रति उनका स्नेह कम हो गया है। इस पर भगवान कृष्ण ने कहा कि सभी गोपियों के हृदय में मैं हूं, सभी गायों का बछड़ा बन गया हूं। इसलिए अब वे मेरे पास नहीं आ रही हैं। रामभद्राचार्य ने कहा-मैं श्लोक बोलता नहीं। जो श्लोक बोलते हैं वही बोलता हूं। सांस्कृतिक संध्या में हास्य कवि शंभू शिखर, राम भदावर, डॉ. सपना मिश्रा, कमल आग्नेय ने प्रस्तुति दी।
सनातन को आगे बढ़ाने को बोले अतिथि संत
पृथ्वीगंज बाजार। बाबा रामदेव ने कहा कि 2047 तक भारत विश्व गुरु बनेगा। इसको बनाने में पूज्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य का योगदान होगा। उन्होंने सत्य, सनातन, वैदिक धर्म और गऊ माता के जयकारों के साथ धर्म का जयघोष भी कराया। परमार्थ निकेतन आश्रम अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और हनुमान गढ़ी स्थित निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास हनुमान ने सनातन को आगे बढ़ाने की बात कही। बृहस्पतिवार बागेश्वर धाम के अध्यक्ष धीरेंद्र शास्त्री पहुंचेंगे।
संतों का हुआ समागम
कथा स्थल पर विवेकानंद महराज हरिद्वार, राजू दास हनुमानगढ़ी, अजय दास महराज, संतोष दास उर्फ सतुवा बाबा, मदन मोहन दास पहुंचे। कथा में मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधान परिषद सदस्य एवं आपदा राहत समिति के चेयरमैन अवनीश कुमार सिंह, प्रवेश, पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक लक्ष्मी नारायण पांडेय, सुशील सिंह, विनोद पांडेय आदि मौजूद रहे ।
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उन्होंने बताया कि पूतना के छोटे भाई अघासुर के मुख में गोकुल के सारे बच्चे चले गए थे। कन्हैया ने अघासुर के मुंह में प्रवेश कर सबको बाहर निकाला। लेकिन सभी बच्चों की मौत हो चुकी थी। भगवान ने उनको फिर से जीवित कर अघासुर का अंत किया।
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उन्हाेंने सभी से कहा चलो भोजन किया जाए। सब भोजन करने लगे। उसी समय भगवान के एक मित्र मथमंगल आए। उस समय भोजन नहीं था। उन्होंने वहां रखा छाछ मुंह में भर लिया। तब भगवान ने उनकी कांख में गुदगुदाया। मुख से छाछ गिरने लगा और भगवान पूरा छाछ पी गए। यह देख ब्रह्मा जी को संदेह हो गया कि यह कैसे भगवान। तब उन्होंने बताया कि प्रेेम से बढ़कर और कुछ नहीं।
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अगले प्रसंग में कहा कि गाय चराने के समय बलराम ने कृष्ण से कहा कि गोपियां अब गांव में नहीं दिखाई देती हैं, क्या कृष्ण के प्रति उनका स्नेह कम हो गया है। इस पर भगवान कृष्ण ने कहा कि सभी गोपियों के हृदय में मैं हूं, सभी गायों का बछड़ा बन गया हूं। इसलिए अब वे मेरे पास नहीं आ रही हैं। रामभद्राचार्य ने कहा-मैं श्लोक बोलता नहीं। जो श्लोक बोलते हैं वही बोलता हूं। सांस्कृतिक संध्या में हास्य कवि शंभू शिखर, राम भदावर, डॉ. सपना मिश्रा, कमल आग्नेय ने प्रस्तुति दी।
सनातन को आगे बढ़ाने को बोले अतिथि संत
पृथ्वीगंज बाजार। बाबा रामदेव ने कहा कि 2047 तक भारत विश्व गुरु बनेगा। इसको बनाने में पूज्य जगद्गुरु रामभद्राचार्य का योगदान होगा। उन्होंने सत्य, सनातन, वैदिक धर्म और गऊ माता के जयकारों के साथ धर्म का जयघोष भी कराया। परमार्थ निकेतन आश्रम अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और हनुमान गढ़ी स्थित निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास हनुमान ने सनातन को आगे बढ़ाने की बात कही। बृहस्पतिवार बागेश्वर धाम के अध्यक्ष धीरेंद्र शास्त्री पहुंचेंगे।
संतों का हुआ समागम
कथा स्थल पर विवेकानंद महराज हरिद्वार, राजू दास हनुमानगढ़ी, अजय दास महराज, संतोष दास उर्फ सतुवा बाबा, मदन मोहन दास पहुंचे। कथा में मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधान परिषद सदस्य एवं आपदा राहत समिति के चेयरमैन अवनीश कुमार सिंह, प्रवेश, पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक लक्ष्मी नारायण पांडेय, सुशील सिंह, विनोद पांडेय आदि मौजूद रहे ।