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ह्दय दिवस पर विशेष: जिले में नहीं है दिल की बीमारी का इलाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2024 01:33 AM IST
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There is no treatment for heart disease in the districtThere is no treatment for heart disease in the district
जिले में दिल के दर्द का इलाज नहीं है। यहां के हृदय रोगियों को इलाज के लिए प्रयागराज या फिर लखनऊ जाना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज संचालन के चार साल बीत गए, लेकिन अभी तक डीएम कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती तक नहीं हुई है। इससे औसतन प्रतिदिन 20 से 25 हृदय रोगियों को इलाज के लिए प्रयागराज रेफर किया जा रहा है।
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जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर बीते चार साल पहले शासन ने मेडिकल कॉलेज बना दिया। लेकिन डीएम कॉर्डियोलॉजिस्ट की न तो तैनाती की और न ही ईको जांच मशीन की व्यवस्था हुई। ऐसे में दिल के दर्द का इलाज कराने के लिए मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। मजबूरन प्रयागराज या फिर लखनऊ का चक्कर काटना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मनोज खत्री ने बताया कि गर्मी के दिनों में औसतन सात तो ठंड के दिनों में 20 से 25 ह्दयरोगी गंभीर हालत में इलाज कराने मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। जांच से लेकर इलाज तक का इंतजाम न होने के कारण मरीजों को प्रयागराज या फिर हायर सेंटर लखनऊ के लिए रेफर कर दिया जाता है।
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प्राइवेट अस्पताल में भी नहीं हैं हार्ट के डॉक्टर
38 लाख की आबादी वाले जनपद के सरकारी तो दूर किसी प्राइवेट अस्पताल में ह़दयरोगियों को भर्ती कर इलाज की व्यवस्था नहीं है। जिले में एक भी डीएम कॉर्डियोंलॉजिस्ट नहीं है। इससे लोगों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है।
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समय से इलाज न मिलने के कारण मरीजों की चली जाती है जान
ह्दय रोगियों को समय से जांच और इलाज न मिलने के कारण प्रयागराज या फिर लखनऊ ले जाते समय जान चली जाती है। इससे लोग परेशान होते हैं।

डीएम कॉर्डियोलॉजिस्ट और न्यूरो सर्जन की मांग की गई है। जैसे ही डॉक्टर मिलते हैं ह्दयरोगियों के साथ ब्रेन हैमरेज के मरीजों का इलाज शुरू कर दिया जाएगा। वैसे मरीज आते हैं तो इमरजेंसी में उनका प्राथमिक उपचार चिकित्सक करने के बाद प्रयागराज रेफर करते हैं।
- डॉ.शैलेंद्र कुशवाहा, सीएमएस।
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