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सीएचसी तो दूर मेडिकल कॉलेज में आग से बचाव का नहीं है इंतजाम

Sun, 07 Nov 2021 11:52 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 07 Nov 2021 11:52 PM IST
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There is no fire prevention arrangement even in the medical college far away from CHC
मडिकल कालेज परिसर स्थित सीएमओ कार्यालय में खुली पड़ी बिजली की केबल। संवाद - फोटो : PRATAPGARH
पुणे के अहमद नगर के सिविल अस्पताल की तरह जिले के सीएचसी और पीएचसी के साथ मेडिकल कॉलेज में भी आग लग सकती है। जिले के अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं। मेडिकल कॉलेज के साथ ही जिलेभर के सीएचसी और प्राइवेट अस्पतालों का यही हाल है। इसके बावजूद जिम्मेदार अफसर पूरी तरह से अनजान बने हैं।
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जिले में 27 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही मेडिकल कॉलेज का संचालन शासन स्तर से किया जा रहा है। सीएमओ के अधीन संचालित सीएचसी-पीएचसी में आग से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज में सिर्फ तीन जगहों पर फायर किट रखी गई है। मेडिकल कॉलेज के महिला विंग को छोड़ दिया जाए तो पुरुष विंग के नेत्र वार्ड, ओपीडी, ऑपरेशन रूम, सर्जिकल वार्ड मेडिकल, आईसीयू, कोरोना वार्ड, एआरटी सेंटर में अग्निशमन यंत्र नहीं रखे गए हैं।
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सर्जिकल पुरुष वार्ड में दो स्थानों पर दो बार शार्टसर्किट का मामला सामने आ चुका है। इसके बावजूद सीएमएस ने यहां पर आग से बचाव के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की है। जबकि ठीक इसी के ऊपर दूसरे तल पर मेडिकल और चिल्ड्रेन वार्ड हैं। इन दोनों वार्ड के मरीजों के साथ तीमारदारों के आने-जाने का रास्ता भी सर्जिकल वार्ड के पास से ही है। मेडिकल वार्ड में तारों का मकड़जाल फैला हुुआ है। कहीं भी फायर किट नहीं रखी गई है।
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सीएमओ आफिस में भी मंडरा रहा खतरा
मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थित सीएमओ आफिस के दूसरे और तीसरे तल को जाने वाली सीढ़ी के पास बिजली सप्लाई का प्वाइंट बनाया गया है। दूसरे और तीसरे तल पर जाने के लिए महज एक ही रास्ता है। ऐसे में यदि शार्ट सर्किट से आग लगी तो दूसरे और तीसरे तल पर बैठने वाले अफसरों और कर्मचारियों को भागने तक का मौका नहीं मिलेगा।
सीएमओ कार्यालय में महज एक फायर किट है। फायर बिग्रेड के अफसर भी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। यहीं हाल अधिकतर सीएचसी और पीएचसी का है। दिखावे के लिए एक-एक अग्निशमन यंत्र रखे गए हैं, मगर उसे चलाने की जानकारी किसी को नहीं है।
अधिकांश नर्सिंगहोम में निकलने के लिए सिर्फ एक रास्ता
शासन ने आदेश दे रखा है कि नर्सिंगहोम में लोगों के निकलने के लिए दो रास्ते होना चाहिए। एक इमरजेंसी के लिए तो एक हमेशा के लिए। मगर जिले के अधिकांश नर्सिंगहोम में महज एक ही रास्ता है। इतना ही नहीं ज्यादातर नर्सिंगहोम संचालक बगैर फायर ब्रिगेड से एनओसी लिए अस्पताल का संचालन कर रहे हैं।
नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। फायर विभाग ने एनओसी दे रखी है। पुुराने भवन के प्रत्येक वार्ड में अग्निशमन यंत्र जल्द लगवा दिया जाएगा।
डॉक्टर आर्य देशदीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
सोमवार को सभी एमओआईसी से बात कर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सभी अस्पतालों में तत्काल फायर किट की व्यवस्था की जाएगी। निजी अस्पताल संचालकों को भी अग्निशमन यंत्र रखने के लिए कहा जाएगा।

डॉक्टर एस हैदर, प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी

मेडिकल कालेज के पावर सप्लाई कक्ष में कोने में रखा फायर किट। संवाद

मेडिकल कालेज के पावर सप्लाई कक्ष में कोने में रखा फायर किट। संवाद- फोटो : PRATAPGARH

मेडिकल वार्ड में खुली पड़ी केबिल। संवाद

मेडिकल वार्ड में खुली पड़ी केबिल। संवाद- फोटो : PRATAPGARH

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