{"_id":"b845aad09de67fe2b17221c2f489325a","slug":"the-spark-shola-19-home-burns-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिंगारी बनी शोला, 19 घर जले ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिंगारी बनी शोला, 19 घर जले
ब्यूरो।अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Sat, 23 May 2015 12:58 AM IST
विज्ञापन
प्रतापगढ़। नगर कोतवाली क्षेत्र के पठान का पुरवा पूरे मुस्तफा खां गांव में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे घूर की चिंगारी से भड़की आग ने कोहराम मचा दिया। शोला बनीं लपटों ने ऐसा कहर ढाया कि लोग कराह उठे। देखते ही देखते 19 घर जलकर राख हो गए। गृहस्थी जल गई। घंटों अफरातफरी मची रही। लोगों ने हैंडपंप और सबमर्सिबल के चलाकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। फायर ब्रिगेड कर्मियों ने करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसे में करीब नौ लाख के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
सुबह करीब 11 बजे गांव के प्रधानपति लालचंद्र के घर के बगल रखे घूर में आग लग गई। हवा चलने के कारण देखते ही देखते आग भड़क गई। जब तक लालचंद्र और उसके परिवार के लोग कुछ समझ पाते कि लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और लालचंद्र का घर जलने लगा। फिर उनके भाई सुरेश और मुंडी के घर में भी आग लग गई। लालचंद्र और उसके दोनो भाई आग बुझाने में जुट गए, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। आग ने लालचंद्र और सुरेश के पड़ोस के बाकी घरों को भी अपनी आगोश में ले लिया। जो जिस हालत में था जान बचाकर बाहर की ओर भागा। घर जलते देख ग्रामीण बाल्टियों और डिब्बों से आग पर पानी डालने लगे। हैंडपंप, सबमर्सिबल के सहारे आग पर काबू पाने की कोशिश की गई, लेकिन हवा चलने के कारण सफलता नहीं मिल पा रही थी। फायर बिग्रेड कर्मियों ने काफी मशक्कत की।
तब जाकर करीब पांच घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। तब तक 19 घर राख हो चुके थे। फायर विभाग की रिपोर्ट अनुसार आग से 16 घर जले हैं। आग चूल्हे की चिंगारी से लगी है। इससे करीब नौ लाख की क्षति हुई है।
विज्ञापन
इनसेट-
इन लोगों के घर जले
लालचंद्र, सुरेश, मुंडी, मुन्ना सिंह, रघुनाथ सरोज, बुधिराम सरोज, प्रताप बहादुर सिंह, जयराम, विजय सिंह, राम सिंह, विनोद, अजय सिंह, विश्वनाथी देवी, इंद्रजीत, रतन, मनोज सरोज, समर बहादुर, अवधेश, राकेश सरोज।
जान बचाकर भागे विकलांग दंपती
आग लगी तो घर में सो रहे विकलांग दंपति बुधिराम(75) और उनकी पत्नी लाखू देवी (70) जान बचाकर भागे। हालांकि उनके चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीण भी मदद को पहुंच गए थे।
ढूंढते रहे पानी
पूरे मुस्तफा गांव में आग लगी तो बुझाने के लिए ग्रामीण पानी खोजने लगे। मगर पर्याप्त पानी नहीं मिला जिससे अधिक घर जले। अगर पानी की उपलब्धता होती तो शायद घर जलने का आंकड़ा कम होता। सघन आबादी वाले इस गांव में पानी के लिए वैसे तो तीन हैंडपंप हैं। इसमें से एक प्रधान के दरवाजे पर लगा हुआ है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए लगाए गए दो हैंडपंपों में से एक खराब है। इसको बनवाने की जरूरत नहीं समझी गई। पूरा गांव का सहारा एक हैंडपंप है।
विज्ञापन
सुबह करीब 11 बजे गांव के प्रधानपति लालचंद्र के घर के बगल रखे घूर में आग लग गई। हवा चलने के कारण देखते ही देखते आग भड़क गई। जब तक लालचंद्र और उसके परिवार के लोग कुछ समझ पाते कि लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और लालचंद्र का घर जलने लगा। फिर उनके भाई सुरेश और मुंडी के घर में भी आग लग गई। लालचंद्र और उसके दोनो भाई आग बुझाने में जुट गए, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। आग ने लालचंद्र और सुरेश के पड़ोस के बाकी घरों को भी अपनी आगोश में ले लिया। जो जिस हालत में था जान बचाकर बाहर की ओर भागा। घर जलते देख ग्रामीण बाल्टियों और डिब्बों से आग पर पानी डालने लगे। हैंडपंप, सबमर्सिबल के सहारे आग पर काबू पाने की कोशिश की गई, लेकिन हवा चलने के कारण सफलता नहीं मिल पा रही थी। फायर बिग्रेड कर्मियों ने काफी मशक्कत की।
विज्ञापन
तब जाकर करीब पांच घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। तब तक 19 घर राख हो चुके थे। फायर विभाग की रिपोर्ट अनुसार आग से 16 घर जले हैं। आग चूल्हे की चिंगारी से लगी है। इससे करीब नौ लाख की क्षति हुई है।
विज्ञापन
इनसेट-
इन लोगों के घर जले
लालचंद्र, सुरेश, मुंडी, मुन्ना सिंह, रघुनाथ सरोज, बुधिराम सरोज, प्रताप बहादुर सिंह, जयराम, विजय सिंह, राम सिंह, विनोद, अजय सिंह, विश्वनाथी देवी, इंद्रजीत, रतन, मनोज सरोज, समर बहादुर, अवधेश, राकेश सरोज।
जान बचाकर भागे विकलांग दंपती
आग लगी तो घर में सो रहे विकलांग दंपति बुधिराम(75) और उनकी पत्नी लाखू देवी (70) जान बचाकर भागे। हालांकि उनके चिल्लाने की आवाज सुनकर ग्रामीण भी मदद को पहुंच गए थे।
ढूंढते रहे पानी
पूरे मुस्तफा गांव में आग लगी तो बुझाने के लिए ग्रामीण पानी खोजने लगे। मगर पर्याप्त पानी नहीं मिला जिससे अधिक घर जले। अगर पानी की उपलब्धता होती तो शायद घर जलने का आंकड़ा कम होता। सघन आबादी वाले इस गांव में पानी के लिए वैसे तो तीन हैंडपंप हैं। इसमें से एक प्रधान के दरवाजे पर लगा हुआ है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए लगाए गए दो हैंडपंपों में से एक खराब है। इसको बनवाने की जरूरत नहीं समझी गई। पूरा गांव का सहारा एक हैंडपंप है।