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दूर तक गूंज रही थी टूटी पटरी की आवाज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 02 Feb 2015 11:26 PM IST
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जगेसरगंज रेलवे स्टेशन के निकट टूटी पटरी पर मालगाड़ी गुजरने के दौरान गूंज रही आवाज दूर-दूर तक जा रही थी। रेलकर्मियों के अलावा ग्रामीणों ने भी इस आवाज को सुनकर अनसुना कर दिया। मगर अकेले श्यामा देवी ने इस ओर ध्यान दिया। उसकी जागरूकता ने सैकड़ों यात्रियों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया। इस बात का खुलासा ग्रामीणों से बातचीत में हुआ।
दरअसल वाराणसी-लखनऊ रेलखंड पर चिलबिला-जगेसरगंज रेलवे स्टेशन के बीच पूरेचंदू गांव के पास जिस समय पटरी टूटने की जानकारी हुई उसके पहले एक मालगाड़ी गुजरी थी। मालगाड़ी गुजरते समय टूटी पटरी से गूंज रही खट-खट की आवाज दूर तक सुनाई पड़ रही थी। ग्रामीणों के मुताबिक यह आवाज दो किलोमीटर से भी अधिक दूर तक सुनाई पड़ रही थी। मगर किसी भी ग्रामीण ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। ताज्जुब तब हुआ जब घटनास्थल से करीब पचास मीटर दूरी पर काम कर रहे गैंगमैन भी मौत की पटरी की आवाज नहीं सुन सके।
इसका रहस्योद्घाटन ग्रामीणों से बातचीत में हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि आवाज गांव तक आ रही थी। संयोग की बात है कि उस समय श्यामा देवी पुत्र राहुल के साथ खेत में काम कर रही थी। राहुल ने आवाज के बारे में श्यामा को बताया तो उससे रहा नहीं गया। दोनों मां-बेटे भागते हुए रेल पटरी पर पहुंचे। राहुल ने गैंगमैन राजनारायण को इसकी जानकारी दी। वह कुछ कर पाता इसके पहले ही काशी ट्रेन दिखाई पड़ गई।
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श्यामा को कुछ सूझा नहीं और उसने लाल शाल दिखाकर ट्रेन रोक दी। पीडब्ल्यूआई जितेंद्र कुमार ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि घटना के समय दूसरी गैंग के कर्मी हादसे से कुछ दूरी पर काम कर रहे थे। उनको यह आवाज क्यों नहीं सुनाई दी। श्यामा ने बताया कि मालगाड़ी के गुजरते समय पटरी टूटने से खट-खट की आवाज आ रही थी। उसको सुनने के बाद वह पटरी पर आई थी।
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दरअसल वाराणसी-लखनऊ रेलखंड पर चिलबिला-जगेसरगंज रेलवे स्टेशन के बीच पूरेचंदू गांव के पास जिस समय पटरी टूटने की जानकारी हुई उसके पहले एक मालगाड़ी गुजरी थी। मालगाड़ी गुजरते समय टूटी पटरी से गूंज रही खट-खट की आवाज दूर तक सुनाई पड़ रही थी। ग्रामीणों के मुताबिक यह आवाज दो किलोमीटर से भी अधिक दूर तक सुनाई पड़ रही थी। मगर किसी भी ग्रामीण ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। ताज्जुब तब हुआ जब घटनास्थल से करीब पचास मीटर दूरी पर काम कर रहे गैंगमैन भी मौत की पटरी की आवाज नहीं सुन सके।
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इसका रहस्योद्घाटन ग्रामीणों से बातचीत में हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि आवाज गांव तक आ रही थी। संयोग की बात है कि उस समय श्यामा देवी पुत्र राहुल के साथ खेत में काम कर रही थी। राहुल ने आवाज के बारे में श्यामा को बताया तो उससे रहा नहीं गया। दोनों मां-बेटे भागते हुए रेल पटरी पर पहुंचे। राहुल ने गैंगमैन राजनारायण को इसकी जानकारी दी। वह कुछ कर पाता इसके पहले ही काशी ट्रेन दिखाई पड़ गई।
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श्यामा को कुछ सूझा नहीं और उसने लाल शाल दिखाकर ट्रेन रोक दी। पीडब्ल्यूआई जितेंद्र कुमार ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि घटना के समय दूसरी गैंग के कर्मी हादसे से कुछ दूरी पर काम कर रहे थे। उनको यह आवाज क्यों नहीं सुनाई दी। श्यामा ने बताया कि मालगाड़ी के गुजरते समय पटरी टूटने से खट-खट की आवाज आ रही थी। उसको सुनने के बाद वह पटरी पर आई थी।