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जिले के लोगों को नए साल में मिलेगा बाईपास का तोहफा
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शहर को जाम से बचाने के लिए बाईपास का निर्माण जनवरी माह में प्रारंभ हो जाएगा। एनएच और निर्माण कार्य की जिम्मेदारी निभाने वाली गुजरात की कंपनी के बीच कागजी कोरम पूरा गया है। बाईपास के निर्माण पर 166 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। कंपनी को इसे 18 माह में तैयार करना होगा।
जिले का प्रमुख राजमार्ग प्रयागराज-अयोध्या हाईवे शहर के बीच से होकर गुजरा है। इस हाईवे से गोरखपुर, श्रावस्ती, बस्ती, गोंडा, बहराइच, अयोध्या, आंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी सहित कई जिलों के लोग गुजरते हैं। दिनभर वाहनों का आवागमन होने से शहर में आए दिन भीषण जाम लगता है। इस समस्या को दूर करने के लिए लंबे समय से बाईपास की मांग की जा रही थी।
बाईपास का प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए एनएच ने वर्ष 2013 में कास्टा इंजीनियरिग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को पत्र लिखा था। फिर सोनावा, गोड़े, पूरे केशवराय, सिटी कस्बा होते हुए भुआलपुर किला गांव के पास लखनऊ-वाराणसी हाईवे तक बाईपास का रूट तय किया गया। बाईपास की लंबाई 142.20 किमी है। लंबी कवायद के बाद बाईपास के लिए तीन अरब 8 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था।
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बाद में बाईपास निर्माण का टेंडर गुजरात की कंपनी मारुति इंफ्राकिएशन लिमिटेड ने 166 करोड़ रुपये में लिया। बाईपास पर गोंड़े गांव के पास लखनऊ-वाराणसी रेलमार्ग व अयोध्या-प्रयागराज रेलमार्ग पर दो ओवरब्रिज बनेेंगे। इसके अलावा चमरौधा नदी और सई नदी पर दो बड़े पुल बनाए जाएंगे। चिलबिला-अमेठी मार्ग, गायघाट-संडवा चंद्रिका मार्ग और प्रतापगढ़-सुखपालनगर मार्ग पर सिटी कस्बे में अंडरपास बनेंगे। बाईपास दो लेन यानी 10 मीटर चौड़ा बनेगा।
किसानों को 84.93 करोड़ रुपये बांटा गया मुआवजा
बाईपास के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के एवज में सोनावां, गोड़े, घोरहा, लोहंगपुर, सराय वीरभद्र, पूरे केशवराय, गायघाट, जहरगो, करौदी, गड़ई चकदेइया, सराय कल्याणदेव और ईसीपुर समेत 17 गांवों के किसानों को कुल 84.93 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में वितरित किए जा चुके हैं।
बाईपास का निर्माण कार्य जनवरी माह में प्रारंभ हो जाएगा, टेंडर लेने वाली कंपनी ने सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी है। कार्यदायी संस्था को 18 माह में बाईपास का निर्माण करके देना होगा। एके मिश्रा, सहायक अभियंता, एनएच
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जिले का प्रमुख राजमार्ग प्रयागराज-अयोध्या हाईवे शहर के बीच से होकर गुजरा है। इस हाईवे से गोरखपुर, श्रावस्ती, बस्ती, गोंडा, बहराइच, अयोध्या, आंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी सहित कई जिलों के लोग गुजरते हैं। दिनभर वाहनों का आवागमन होने से शहर में आए दिन भीषण जाम लगता है। इस समस्या को दूर करने के लिए लंबे समय से बाईपास की मांग की जा रही थी।
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बाईपास का प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए एनएच ने वर्ष 2013 में कास्टा इंजीनियरिग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को पत्र लिखा था। फिर सोनावा, गोड़े, पूरे केशवराय, सिटी कस्बा होते हुए भुआलपुर किला गांव के पास लखनऊ-वाराणसी हाईवे तक बाईपास का रूट तय किया गया। बाईपास की लंबाई 142.20 किमी है। लंबी कवायद के बाद बाईपास के लिए तीन अरब 8 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था।
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बाद में बाईपास निर्माण का टेंडर गुजरात की कंपनी मारुति इंफ्राकिएशन लिमिटेड ने 166 करोड़ रुपये में लिया। बाईपास पर गोंड़े गांव के पास लखनऊ-वाराणसी रेलमार्ग व अयोध्या-प्रयागराज रेलमार्ग पर दो ओवरब्रिज बनेेंगे। इसके अलावा चमरौधा नदी और सई नदी पर दो बड़े पुल बनाए जाएंगे। चिलबिला-अमेठी मार्ग, गायघाट-संडवा चंद्रिका मार्ग और प्रतापगढ़-सुखपालनगर मार्ग पर सिटी कस्बे में अंडरपास बनेंगे। बाईपास दो लेन यानी 10 मीटर चौड़ा बनेगा।
किसानों को 84.93 करोड़ रुपये बांटा गया मुआवजा
बाईपास के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन के एवज में सोनावां, गोड़े, घोरहा, लोहंगपुर, सराय वीरभद्र, पूरे केशवराय, गायघाट, जहरगो, करौदी, गड़ई चकदेइया, सराय कल्याणदेव और ईसीपुर समेत 17 गांवों के किसानों को कुल 84.93 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में वितरित किए जा चुके हैं।
बाईपास का निर्माण कार्य जनवरी माह में प्रारंभ हो जाएगा, टेंडर लेने वाली कंपनी ने सभी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी है। कार्यदायी संस्था को 18 माह में बाईपास का निर्माण करके देना होगा। एके मिश्रा, सहायक अभियंता, एनएच