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Pratapgarh News: भक्ति की अलख जगा दुनिया से विदा हुईं बड़ी दीदी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Nov 2024 05:35 AM IST
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The flame of devotion was awakened and elder sister passed away from this world.
कुंडा स्थित भक्ति धाम मनगढ़ में बड़ी दीदी के नाम से मशहूर जगद्गुरु कृपालु जी महराज की बड़ी बेटी डॉ. विशाखा की सड़क हादसे में मौत की खबर से शोक की लहर दौड़ गई। दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। हरे कृष्णा, हरे रामा, कृष्णा-कृष्णा की धुन बजती रही।
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बड़ी दीदी भक्तों के दिल में बसी थीं। वह 17 नवंबर को मनगढ़ से वृंदावन रवाना हुईं थी। जल्द वापस आने को कहा था, लेकिन ऐसा न हो सका। रविवार को मनगढ़ धाम में पहुंचकर हर कोई उनकी सरलता, सहजता व सामाजिक कार्यों को याद कर रहा था। चेहरे पर उदासी झलक रही थी। हादसे के बाद सत्संगी वृंदावन के लिए रवाना हुए। देररात तक भक्तों से भरी बसें वृंदावन भेजी गईं। मंदिर प्रशासन ने शोक में डिग्री कॉलेज में पांच दिन का अवकाश घोषित किया है। वहीं चिकित्सालय को भी बंद कर दिया गया है।
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रात दो बजे से शुरू होती थी डॉ. विशाखा की दिनचर्या



डॉ. विशाखा की दिनचर्या प्रतिदिन सुबह रात दो बजे शुरू होती थी। वह चार बजे आरती में शामिल होंती थी। पांच से आठ बजे तक कीर्तन करने के बाद वह चिकित्सालय व सत्संगियों से चर्चा करती थीं। सुबह 11 बजे में भोजन कर कुछ घंटे विश्राम करती थी। फिर दोपहर एक से तीन बजे तक कीर्तन व चार बजे शाम को आरती के बाद पांच बजे भोजन कर शाम को छह से नौ बजे तक कीर्तन में शामिल होतीं। इसके बाद रात्रि विश्राम होता था।
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भक्ति का प्रचार व कुशल प्रशासक भी



डॉ. विशाखा ने पिता के निधन के बाद भक्ति धाम मनगढ़ से धर्म के प्रचार-प्रसार को विश्व स्तर तक पहुंचाया। साथ ही मनगढ़ में होने वाले कार्यक्रमों का कुशल संचालन किया। उन्होंने एक संन्यासिनी का जीवन व्यतीत किया।
धाम पहुंचे राजा भैया, जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक
कुंडा। कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया भी दोपहर दो बजे मनगढ़ पहुंचे। शोक सभा में शामिल हुए। डॉ. विशाखा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी, सपा सांसद डॉ. एसपी सिंह पटेल, विधायक मोना, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती, सांसद अमर पाल मौर्या ने संवेदना प्रकट कर शोक जताया। संवाद
प्रतिभाशाली चित्रकार थीं डॉ. विशाखा
साड़ी पहनकर जाती थीं कॉलेज, बच्चे समझते थे क्लास टीचर
कुंडा। जगद्गुरु कृपालु परिषद की अध्यक्ष डॉ. विशाखा त्रिपाठी का जन्म 1949 में भक्ति धाम से कुछ ही दूर लीलापुर गांव में हुआ था। वह एक प्रतिभाशाली चित्रकार भी थीं। आगरा से चित्रकला में मास्टर्स की पढ़ाई की थी।
ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने बताया कि डॉ. विशाखा के बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी थीं। बचपन से ही स्वतंत्र थीं, स्वभाव में मासूमियत थी। हमेशा बहुत खुश रहती थीं। सबसे बड़ी होने के कारण, वह अनुशासित थीं और खुद को गरिमा के साथ पेश करती थीं। यहां तक कि कॉलेज के दिनों में भी वह साड़ी पहनती थीं। इस वजह से अक्सर लोग उन्हें क्लास टीचर समझ लेते थे।
उन्होंने कई अच्छी कलाकृतियां बनाई। 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में कई वीडियो शूट किए। पिता द्वारा चलाए गए राधे-राधे के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपनी गृहस्थी नहीं बसाई। कभी भारत तो कभी अमेरिका तो कभी कनाडा में भ्रमण करके पिता के सपने को पूरा करती रहीं। बड़ी बहन को देखकर छोटी बहनों ने भी विवाह नहीं किया।
डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित
कुंडा। विशाखा को 2014 को कुआलालामपुर में ओआईयूसीएम के 52वें अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा गया।
वर्ष 2013 में मदर टेरेसा उत्कृष्टता पुरस्कार, राजीव गांधी वैश्विक उत्कृष्टता पुरस्कार, 2014 में नेल्सन मंडेला शांति पुरस्कार, 2014 में कोलंबो के द ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी फॉर कॉम्प्लिमेंट्री मेडिसिंस के 52वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में साहित्य में डॉक्टरेट की मानद उपाधि और 2016 में शीर्ष 50 भारतीय आइकन पुरस्कार मिला। संवाद
जीवित रहते ही बेटियों को सौंप दी थी जिम्मेदारी
- बेटियों पर रहा सर्वाधिक स्नेह
कुंडा। विशाखा ने पिता को ही अपना गुरु माना। जगद्गुरू कृपालु महराज ने उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए मनगढ़ धाम की देखरेख की जिम्मेदारी उन्हें अपने जिंदा रहते ही सौंप दी।
इसके साथ ही उन्होंने मंझली बेटी डाॅ. श्यामा को प्रेम मंदिर वृंदावन और छोटी बेटी डाॅ. कृष्णा को बरसाना मंदिर ट्रस्ट के देखरेख की जिम्मेदारी दी थी। धाम के लोगों में चर्चा रही कि कृपालु महराज के बेटियों को जिम्मेदारी सौंपने के बाद दोनों बेटे धनश्याम और बालकृष्ण ने अलग ट्रस्ट बना लिया था। संवाद

एक दिन पहले ही 14 हजार लोगों को बांटी थी सामग्री
कुंडा। डॉ. विशाखा त्रिपाठी ने 23 नवंबर को जगद्गुरु कृपालु परिषद ने ब्रज क्षेत्र के गरीब संतों और निराश्रित विधवाओं को सामग्री वितरित की थी। बहन डॉ. श्यामा और डॉ. कृष्ण त्रिपाठी कार्यक्रम में मौजूद थीं। कार्यक्रम में 14,000 जरूरतमंदों को जीवन-रक्षक वस्तुएं प्रदान की गईं। प्रेम मंदिर, वृंदावन और कीर्ति मंदिर, बरसाना में कार्यक्रम हुआ था।
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