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पंचायत चुनाव के लिए खेमेबंदी शुरु, दावेदारों की तैयारी को देखते हुए पुलिस भी हुई सक्रिय
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The camp started for the panchayat elections, the police became active in view of the preparation of the claimants
प्रतापगढ़। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू होने के साथ ही सियासी दल अपने दावेदारों को तैयार करने में जुट गए हैं। वहीं पंचायत चुनाव में खेमेबंदी के कारण आपसी विवादों और संघर्ष जैसे मामले भी सामने आ रहे हैं। जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया है।
आगामी पंचायत चुनाव को देखते हुए अधिकारियों ने जिले के सभी थानेदारों को अलर्ट कर दिया है। ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान या चुनावी लाभ के लिए किसी भी खेमे की ओर से आने वाली शिकायतों को पुलिस गंभीरता से ले रही है। पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही तनातनी व शिकायतों का दौर शुरु हो गया है। बड़ी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस टीमों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। नए साल की शुरुआत के साथ सियासी दलों के कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए हैं। उनके जरिए सियासी दलों ने ग्राम पंचायतों में अपना जनसंपर्क बढ़ा दिया है। वहीं कुछ दल जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत प्रमुख के दावेदारों की तैयारी कर खाका खींचना शुरू कर दिया है। प्रमुख दलों के अलावा छोटे दल भी पंचायत चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे हैं। चुनाव से पहले सियासी दखल बढ़ती देख पुलिस और खुफिया विभाग को गांवों के साथ ही सोशल मीडिया पर अतिरिक्त निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरगर्मी के साथ बढ़ सकते हैं विवाद
पंचायत चुनाव की तिथि भले ही न घोषित हुई हो, लेकिन अभी से ही खेमेबंदी शुरु हो गई है। चुनावी लाभ के लिए गांवों में प्रधान व पूर्व प्रधान समेत सियासी गुटबाजी से जुड़ी शिकायतें आने लगी है। पंचायत चुनाव की सरगर्मी बढ़ने के साथ ही आपस में विवाद भी बढ़ सकते हैं। वहीं विकास कार्यो को लेकर विरोधी प्रधान पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए शिकायत कर रहे हैं।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। चुनाव से पहले व बाद में शांति एवं कानून व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए सभी थानाध्यक्षों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है। खुफिया विभाग की टीम भी नजर रख रही है।
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आगामी पंचायत चुनाव को देखते हुए अधिकारियों ने जिले के सभी थानेदारों को अलर्ट कर दिया है। ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान या चुनावी लाभ के लिए किसी भी खेमे की ओर से आने वाली शिकायतों को पुलिस गंभीरता से ले रही है। पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही तनातनी व शिकायतों का दौर शुरु हो गया है। बड़ी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस टीमों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। नए साल की शुरुआत के साथ सियासी दलों के कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए हैं। उनके जरिए सियासी दलों ने ग्राम पंचायतों में अपना जनसंपर्क बढ़ा दिया है। वहीं कुछ दल जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत प्रमुख के दावेदारों की तैयारी कर खाका खींचना शुरू कर दिया है। प्रमुख दलों के अलावा छोटे दल भी पंचायत चुनाव की रणनीति तैयार कर रहे हैं। चुनाव से पहले सियासी दखल बढ़ती देख पुलिस और खुफिया विभाग को गांवों के साथ ही सोशल मीडिया पर अतिरिक्त निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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सरगर्मी के साथ बढ़ सकते हैं विवाद
पंचायत चुनाव की तिथि भले ही न घोषित हुई हो, लेकिन अभी से ही खेमेबंदी शुरु हो गई है। चुनावी लाभ के लिए गांवों में प्रधान व पूर्व प्रधान समेत सियासी गुटबाजी से जुड़ी शिकायतें आने लगी है। पंचायत चुनाव की सरगर्मी बढ़ने के साथ ही आपस में विवाद भी बढ़ सकते हैं। वहीं विकास कार्यो को लेकर विरोधी प्रधान पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए शिकायत कर रहे हैं।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। चुनाव से पहले व बाद में शांति एवं कानून व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए सभी थानाध्यक्षों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है। खुफिया विभाग की टीम भी नजर रख रही है।