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...तो रोजगार के मिलेंगे अवसर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 31 Dec 2016 11:36 PM IST
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सनई अनुसंधान केंद्र में तैयार फ्लैक्स के रेशे को नया मुकाम मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय ने परीक्षण के लिए रेशा मंगाया है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो देश में न इसकी खेती की जाएगी, बल्कि इससे लेनन के कपड़े भी तैयार होंगे। रेशे के बारे में जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय टेक्सटाइल्स राज्य मंत्री अजय टम्टा ने यहां के वैज्ञानिक डॉक्टर मनोज त्रिपाठी से नमूना और बीज की मांग की थी।
प्रतापगढ़ के सनई अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सनई के बाद रेशे की दूसरी प्रजाति फ्लैक्स विकसित की थी। उनका दावा है कि इससे लेनन के कपड़े तैयार होते हैं। अभी तक इस तरह के कपड़ों को तैयार करने के लिए टेक्सटाइल्स मिलाें में विदेश से रेशे मंगाए जाते हैं। सनई अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने अपने यहां तैयार फ्लैक्स के रेशे के बारे में केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय को सूचना भेजी थी। इसके बाद खुद केंद्रीय टेक्सटाइल्स राज्य मंत्री अजय टम्टा ने पहल करते हुए केंद्र के वैज्ञानिकों से रेशे का नमूना और बीज की मांग की थी। अब इसे परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। प्रयोग सफल हुआ तो देश में इसकी खेती शुरू करने के साथ लेनन के कपड़े भी तैयार किए जाएंगे।
उत्तराखंड में हो सकती है खेती
अगर फ्लैक्स के रेशे का परीक्षण सफल हुआ तो उत्तराखंड से इसकी खेती की शुरुआत की जा सकती है। सनई सेंटर से मंगाए गए रेशे का परीक्षण टेक्सटाइल के जानकार और कृषि वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम करेगी। इसके बाद खेती पर फैसला लिया जाएगा।
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लिनेन का कपड़ा तैयार करने में आसानी होगी
केंद्र प्रमुख, सनई अनुसंधान केंद्र डॉक्टर मनोज त्रिपाठी का कहना है कि केंद्रीय टेक्सटाइल राज्यमंत्री अजय टम्टा के निर्देश पर फ्लैक्स के रेशे का नमूना भेज दिया गया है। उसका परीक्षण होगा। बीज की भी तैयारी की जा रही है। आने वाले समय में रेशे की फसल का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है। इससे किसानों को रोजगार मिलेगा। कपड़ा मंत्रालय को लिनेन का कपड़ा तैयार करने में आसानी होगी।
रेशे की खूबियां
इसका रेशा मुलायम, हल्का और टिकाऊ होता है। इससे बने लेनन के कपड़े आरामदायक होते हैं। गरमी और ठंडी दोनों मौसम के लिए फिट होते हैं।
प्रतापगढ़ के सनई अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने सनई के बाद रेशे की दूसरी प्रजाति फ्लैक्स विकसित की थी। उनका दावा है कि इससे लेनन के कपड़े तैयार होते हैं। अभी तक इस तरह के कपड़ों को तैयार करने के लिए टेक्सटाइल्स मिलाें में विदेश से रेशे मंगाए जाते हैं। सनई अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने अपने यहां तैयार फ्लैक्स के रेशे के बारे में केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय को सूचना भेजी थी। इसके बाद खुद केंद्रीय टेक्सटाइल्स राज्य मंत्री अजय टम्टा ने पहल करते हुए केंद्र के वैज्ञानिकों से रेशे का नमूना और बीज की मांग की थी। अब इसे परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। प्रयोग सफल हुआ तो देश में इसकी खेती शुरू करने के साथ लेनन के कपड़े भी तैयार किए जाएंगे।
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उत्तराखंड में हो सकती है खेती
अगर फ्लैक्स के रेशे का परीक्षण सफल हुआ तो उत्तराखंड से इसकी खेती की शुरुआत की जा सकती है। सनई सेंटर से मंगाए गए रेशे का परीक्षण टेक्सटाइल के जानकार और कृषि वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम करेगी। इसके बाद खेती पर फैसला लिया जाएगा।
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लिनेन का कपड़ा तैयार करने में आसानी होगी
केंद्र प्रमुख, सनई अनुसंधान केंद्र डॉक्टर मनोज त्रिपाठी का कहना है कि केंद्रीय टेक्सटाइल राज्यमंत्री अजय टम्टा के निर्देश पर फ्लैक्स के रेशे का नमूना भेज दिया गया है। उसका परीक्षण होगा। बीज की भी तैयारी की जा रही है। आने वाले समय में रेशे की फसल का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है। इससे किसानों को रोजगार मिलेगा। कपड़ा मंत्रालय को लिनेन का कपड़ा तैयार करने में आसानी होगी।
रेशे की खूबियां
इसका रेशा मुलायम, हल्का और टिकाऊ होता है। इससे बने लेनन के कपड़े आरामदायक होते हैं। गरमी और ठंडी दोनों मौसम के लिए फिट होते हैं।