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प्रतापगढ़ : मोहर्रम आते ही शेखपुर आशिक गांव में बढ़ जाता है तनाव, 2013 में हो चुका है बवाल

Fri, 05 Aug 2022 07:52 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 05 Aug 2022 07:52 AM IST
सार

वर्ष 2011 में शेखपुर आशिक गांव में एक बंदर की मौत हो गई थी। जिस स्थान पर बंदर की मौत हुई थी वहां हनुमानजी का मंदिर बना दिया गया। वर्ष 2013 में भदरी किला निवासी उदय प्रताप सिंह ने पूजापाठ के साथ ही मोहर्रम के दिन यहां भंडारे का आयोजन शुरू कर दिया।

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Tension rises in Sheikhpur Aashiq village as soon as Muharram
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : social media

विस्तार

कुंडा का शेखपुर आशिक गांव प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर है। मोहर्रम आते ही इस गांव को लेकर प्रशासन की परेशानी बढ़ जाती है। गांव में बवाल की आशंका में भारी फोर्स तैनात कर दी जाती है। वर्ष 2013 में इस गांव में विवाद की शुरुआत हुई, जिसका निस्तारण आज तक नहीं हो सका है।

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वर्ष 2011 में शेखपुर आशिक गांव में एक बंदर की मौत हो गई थी। जिस स्थान पर बंदर की मौत हुई थी वहां हनुमानजी का मंदिर बना दिया गया। वर्ष 2013 में भदरी किला निवासी उदय प्रताप सिंह ने पूजापाठ के साथ ही मोहर्रम के दिन यहां भंडारे का आयोजन शुरू कर दिया। वर्ष 2013 में भंडारा हुआ और मोहर्रम की दसवीं पर ताजिया भी निकला। वर्ष 2014 में दोनों चीजों एक साथ हुईं। 

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वर्ष 2015 में भंडारा होने के कारण ताजियादारों ने ताजिया उठाने से इनकार कर दिया। जिले के साथ ही पूरे प्रदेश में ताजिया नहीं उठने पर शासन तक खलबली मच गई। शासन के निर्देश के बाद दूसरे दिन डीएम-एसपी ने किसी तरह ताजिया दफन कराया। 


इसके बाद शुरू हुई प्रशासन की लिखापढ़ी 2016 तक चलती रही। 2016 में हालत यह हो गई कि झंडों की गिनती हुई तो वहां लगने वाली चांदनी की माप भी कराई गई। इसके बाद भंडारे पर रोक लगा दी गई। इसके खिलाफ उदय प्रताप सिंह कोर्ट चले गए। 

कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को अपने विवेक से निर्णय लेने का आदेश दिया। इसके बाद से यहां भंडारा बंद हो गया। बावजूद इसके मोहर्रम पर लगने वाली चांदनी, गेट और झंडे को लेकर विवाद जारी रहा। झंडे का विवाद 2019 में सुलझा। अब शेखपुर में सड़क पर बने गेट को लेकर बवाल शुरू हो गया है।


 प्रशासन का तर्क है कि गेट पहले भी बनता रहा है। उधर, उदय प्रताप सिंह का कहना है कि यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। इसके नीचे से हम अपने झंडे लेकर कैसे गुजरेंगे। इसके साथ ही सबंधित जगह पीडब्ल्यूडी विभाग के दायरे में हैं। नियमानुसार कोई सड़क पर गेट नहीं बना सकता।

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