पितरों को प्रसन्न करने के लिए आज से होगा तर्पण और पिंडदान
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पितरों के पिंडदान व तर्पण के लिए पितृपक्ष की शुरुआत शनिवार से हो रही है। पितरों को प्रसन्न कर आशीर्वाद पाने के लिए लोग पिंडदान व तर्पण करेंगे। वहीं पितरों की तृप्ति के पिंडदान के लिए गया यात्रा भी शुरू होगी। शुक्रवार को दिनभर पूजन-सामाग्री की खरीदारी हुई। नदियों के तटों की साफ-सफाई की गई।
आचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि मान्यता है कि इसमें पूर्वजों का घर आगमन होता है। पितरों व पूर्वजों की प्रसन्नता के लिए तर्पण व पिंडदान किया जाता है। जिससे वह प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। इसके अलावा पितरों की तृप्ति के लिए लोग पिंडदान के लिए गया यात्रा भी करते हैं। यह सब 15 दिनों तक चलता है। शनिवार को पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। इसे लेकर एक दिन पूर्व शुक्रवार को लोग तैयारी में जुटे रहे।
कुश, तिल, अक्षत, पलाश के पत्ते, मिट्टी के बर्तन, वस्त्र आदि की खरीदारी करते नजर आए। शहर के बाबागंज, पल्टनबाजार, घंटाघर, पंजाबी मार्केट में भीड़ रही। लोग खरीदारी करते नजर आए। वहीं सई नदी के किनारे स्थित मां बेल्हादेवी घाट, मां बाराही देवी घाट, गंगा नदी के किनारे हौदेश्वरनाथ में मंदिर परिसर की साफ-सफाई में लोग जुटे रहे। नदियों के किनारे तटों की साफ-सफाई की गई।
तर्पण व पिंडदान करने वाले रखें ध्यान
- ब्रह्मचर्य का पालन करें
- दान व पुण्य करें
- सात्विक भोजन ग्रहण करें
- तेल व उबटन से परहेज करें
- पुरोहितों से साधते रहे संपर्क
पितृपक्ष के एक दिन पूर्व लोग तैयारी में जुटे रहे। बाजारों में पूजन समाग्री की खरीदारी के साथ ही वह पुरोहितों से संपर्क साधते रहे। दिनभर पुरोहितों का फोन घनघनाता रहा।