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दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी लगा दी दांव पर

Wed, 18 May 2022 01:36 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 18 May 2022 01:36 AM IST
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Suresh put his life to save the lives of others
प्रतापगढ़। दिल्ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के करीब एक बिल्डिंग में लगी आग में फंसे 70 से अधिक लोगों की जिंदगी बचाने वाले बेल्हा के लाल सुरेश के साहस की हर कोई दाद दे रहा है। अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना साथियों की मदद से क्रेन और सीढ़ी से विकराल आग में फंसे लोगों को बिल्डिंग की खिड़की के सहारे बचाने में मशक्कत करता रहा। उसे इस बात का अफसोस है कि यदि फायरब्रिगेड की मदद समय पर मिल जाती तो शायद और लोगों की भी जान बच सकती थी।
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अंतू थाना के दुर्वासा पांडेय का पुरवा कल्याणपुर मौरहा के रहने वाले सुरेश कुमार अपने परिवार के साथ नार्थ वेस्ट दिल्ली के मुंडका की एक कॉलोनी में किराए पर रहते हैं। वह मुंडका के ही चौधरी जेनरेटर व क्रेन सर्विस की एजेंसी में करीब पंद्रह साल से क्रेन चलाने का काम करता है।13 मई की शाम वह घटनास्थल वाली बिल्डिंग से कुछ दूरी पर मौजूद था। आग की लपटों के साथ उठ रहे धुएं को देख वह भी घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा। सुरेश के अनुसार बिल्डिंग में बड़ी संख्या में लोग फंसे थे ,जो मदद के लिए गुहार लगा रहे थे। महिलाएं और पुरुष खिड़कियों के शीशे तोड़कर छत से नीचे कूदने का प्रयास कर रहे थे।
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यह देख सुरेश भागकर क्रेन व सीढ़ियां ले आया। वह आग की चपेट में आने वाली बिल्डिंग के दूसरे छोर पर खिड़कियों से मदद मांग रहे लोगों को बचाने की जद्दोजहद करने लगा। यह देख उसके साथी डब्बू, सुनील, जयसिंह, राजेंद्र भी आ गए। वह सीढ़ी बांधकर क्रेन से खिड़कियों तक पहुंचाने लगे। भवन में लगी एसी से रस्सी बांधने के बाद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में मशक्कत करते रहे। लोगों की चीख सुनकर सुरेश क्रेन लेकर इधर उधर करता रहा। साथी सीढ़ी लगाकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करते रहे।
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करीब 70 से अधिक लोगों को सुरेश व उसके साथी सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब रहे। मगर सुरेश को इस बात का अफसोस जिंदगी भर रहेगा कि यदि समय पर फायरब्रिगेड की मदद मिल गई होती तो कुछ और लोगों की जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल सुरेश की बहादुरी की चर्चा दिल्ली में ही नहीं बल्कि अब जिले में भी हो रही है। सुरेश का यह प्रयास सभी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं। सुरेश का कहना है कि पिता की प्रेरणा से वह दूसरों की मदद के लिए हमेशा प्रयास करने की कोशिश करते हैं। इस तरह की घटनाओं के दौरान सभी को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
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