चार महीने बाद आया निर्देश, मनमानी फीस वसूली

अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Sun, 04 Dec 2016 12:35 AM IST
विज्ञापन
other
other

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
 राज्य विश्वविद्यालय इलाहाबाद ने एडमिशन के चार महीने बाद फीस निर्धारित करते हुए महाविद्यालयों को दिशा-निर्देश जारी किया है। इस लेटलतीफी का फायदा उठाते हुए महाविद्यालय मनमानी वसूली कर रहे हैं। शुरू में गाइड लाइन जारी न होने के कारण जिले के कालेजों ने फैजाबाद विश्वविद्यालय की गाइड लाइन के आधार पर छात्र-छात्राओं से शुल्क वसूला था। अब राज्य विवि से नया आदेश आने के बाद उनकी मुसीबत बढ़ गई है।
विज्ञापन

विश्वविद्यालय ने प्रवेश सत्र के दौरान परीक्षा समेत कई शुल्कों का निर्धारण नहीं किया था। ऐसे में महाविद्यालयों ने पुराने ढर्रे पर ही छात्र-छात्राओं से शुल्क वसूल कर दाखिला ले लिया। अब एक दिसंबर को इलाहाबाद राज्य विवि ने नई शुल्क तालिका जारी कर महाविद्यालयोें को भेज दी है। ऐसे में एक तरफ जहां छात्र-छात्राएं अचंभित हैं, वहीं दूसरी तरफ जिले के महाविद्यालयों को मनमानी वसूली करने का मौका मिल गया है।
दरअसल, विश्वविद्यालय ने परीक्षा शुल्क 685, नामांकन 100, क्रीड़ा 20, एप्लीकेशन प्रोसेसिंग 50 रुपये के अलावा प्रायोगिक परीक्षा के लिए 100 रुपये का शुल्क निर्धारित किया है। जबकि महाविद्यालयों द्वारा अब तक परीक्षा शुल्क 491, नामांकन शुल्क 150, अंकपत्र शुल्क 70 व क्रीड़ाशुल्क विश्वविद्यालय अंश 15 रुपये लिया जाता रहा। इस तरह विश्वविद्यालय ने कुल शुल्क में लगभग 129 रुपये की वृद्धि की है, लेकिन महाविद्यालयों द्वारा  छात्र-छात्राओं को गुमराह कर अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। हालात यह है कि कालेजों के नोटिस बोर्डों पर इस मनमाने शुल्क का निर्देश भी चस्पा कर दिया गया है।  
स्ववित्तपोषित कालेज वसूलते हैं मनमाना शुल्क
अनुदानित व राजकीय महाविद्यालयों द्वारा निर्धारित मदों के अनुरूप शुल्क वसूला जाता है। जिन पर इस बढ़ी फीस का मदवार अंतर स्वाभाविक है। उनके द्वारा संबंधित मद में शुल्क वृद्धि उचित है, लेकिन वह भी मनमानी कर रहे हैं। जबकि  स्ववित्तपोषित कालेजों व अनुदानित महाविद्यालयों द्वारा स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में मदवार शुल्क के बजाय एकमुश्त शुल्क लिए जाते हैं। स्नातक भाग एक में छात्रों से लगभग 1377 एवं छात्राओं से लगभग 1245 रुपये शुल्क अनुदानित व राजकीय कालेज लेते हैं। वहीं स्ववित्तपोषित कालेजों में स्नातक भाग एक में 3 से 5 हजार रुपये तक शुल्क लिए गए हैं। जबकि प्रयोगिक विषयों वाले छात्र-छात्राओं से 7 हजार रुपये तक लिए गए हैं। ऐसे में 129 रुपये की शुल्क वृद्धि के बाद स्ववित्तपोषित कालेजों ने फिर से मनमाना शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है।

विश्वविद्यालय को प्रेषित की जाने वाली फीस का मदवार विवरण महाविद्यालयों की लागिन पर जारी कर दिया गया है। महाविद्यालय उसी के अनुरूप विश्वविद्यालय को फीस भेजेंगे। अतिरिक्त फीस वसूलने की शिकायत मिलने पर दोषी महाविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संजय कुमार, कुलसचिव, राज्य विश्वविद्यालय इलाहाबाद।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X
  • Downloads

Follow Us