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Pratapgarh News: शनिदेव मंदिर ने कुशफरा गांव को दी अलग पहचान
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प्रयागराज-अयोध्या राजमार्ग पर विश्वनाथगंज बाजार के करीब बकुलाही नदी के तट पर बसे कुशफरा गांव की पहचान आज शनिदेव मंदिर की वजह है। पौराणिक ग्रंथों में भी इस गांव का जिक्र है। हर शनिवार को हजारों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। विदेशी श्रद्धालु भी यहां मंदिर में दर्शन पूजन को आते हैं। माना जाता है कि यह लवकुश की जन्मस्थली भी है।
विश्वनाथगंज बाजार से करीब ढाई किलोमीटर पूर्व में स्थित शनिदेव धाम लोगों के श्रद्धा एवं विश्वास का केंद्र है। ग्राम प्रधान रामकिशोर पाल के अनुसार शनिदेव मंदिर की खोज चार दशक पहले परमा महाराज ने की थी। बकुलाही नदी के किनारे एक बड़ा टीला था, जहां पर शनि महाराज की प्रतिमा मिट्टी में दबी हुई थी। गांव के ही बुजुर्ग विजय कुमार शुक्ला कहते हैं कि बकुलाही नदी पहले बालकुनी नाम से जानी जाती थी। बाद में बकुलाही नाम हाे गया।
अभयराज पाल ने बताया कि बकुलाही नदी पहले बालकुनी नाम से जानी जाती थी। कुशफरा गांव को लवकुश की जन्मस्थली भी बताया जाता है। परमा महाराज के प्रयास से आठ मार्च 1993 में नदी पर पुल बनाया गया, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने किया था। इसके बाद श्रद्धालुओं का आवागमन बढ़ गया।
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बुजुर्ग बाबूलाल कहते हैं कि मंदिर की वजह से गांव का विकास होने लगा। पर्यटन विभाग ने सौंदर्यीकरण कराया। पक्के घाट बनवाए, प्रकाश की व्यवस्था की गई। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर शनिदेव धाम पुलिस चौकी बनी। स्वास्थ्य विभाग ने राजकीय होम्योपैथी चिकित्सालय की स्थापना की।
विदेशी श्रद्धालु भी शनिदेव के दर्शन कर सकें इसके लिए सात दिसंबर 2019 को अतिथि गृह का निर्माण कराया गया। प्रत्येक शनिवार को लगभग दस हजार श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। हर वर्ष सात जनवरी को विशाल भंडारे का आयोजन होता है।
भरत यात्रा का होता है पड़ाव
प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में अयोध्या से चित्रकूट जाने वाली भरत यात्रा का पड़ाव शनिदेव धाम है। यहां सैकड़ों यात्री भोजन व विश्राम करते हैं। शनिदेव धाम के आसपास संकटमोचन हनुमान मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, काल भैरव-महाकाल मंदिर, दुर्गा जी मंदिर, मंठावीर टीला आदि दर्शनीय स्थल हैं।
देश की आजादी में आगे रहा गांव
कुशफरा निवासी लाल माधव सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। देश की आजादी के लिए वह कई बार जेल गए। करीब 15 साल पहले उनका निधन हो गया। गांव के अरुण कुमार श्रीवास्तव आईईएस थे, जो रेलवे के उच्च पद सेवानिवृत्त हुए हैं।
एक नजर
गांव की आबादी 3758, महिला 1852 , पुरुष 1906
घर-घर पानी पहुंचाने के लिए सड़क खोद कर छोड़ दी गई
बिजली के जर्जर तार, दूसरे गांव तक जाने का रास्ता नहीं
वर्जन
प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में अयोध्या से चित्रकूट जाने वाली भरत यात्रा का का पड़ाव शनिदेव धाम है। जहां पर सैकड़ों यात्री भोजन एवं विश्राम शनि देव धाम पर ही करते हैं। शनि देवधाम के आसपास संकटमोचन हनुमान मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, काल भैरव में, महाकाल मंदिर दुर्गा जी मंदिर, मंठावीर टीला आदि मंदिर एवं दर्शनीय स्थल है।
देश की स्वतंत्रता के लिए लाल माधव सिंह ने भी किया संघर्ष, अफसर भी हुए
बोले गांव के प्रधान
गांव के विकास के लिए यथासंभव कार्य किया है। विद्यालय का कायाकल्प कराने के साथ ही कच्चे रास्ते को पक्का बनवाया गया। इंटरलॉकिंग व जल निकासी के लिए नाला व नालियों का निर्माण कराया। अभी दूसरे गांव तक पक्की सड़क नहीं बन सकी। इसके लिए प्रयास जारी है।
- राम किशोर पाल, ग्राम प्रधान कुशफरा
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विश्वनाथगंज बाजार से करीब ढाई किलोमीटर पूर्व में स्थित शनिदेव धाम लोगों के श्रद्धा एवं विश्वास का केंद्र है। ग्राम प्रधान रामकिशोर पाल के अनुसार शनिदेव मंदिर की खोज चार दशक पहले परमा महाराज ने की थी। बकुलाही नदी के किनारे एक बड़ा टीला था, जहां पर शनि महाराज की प्रतिमा मिट्टी में दबी हुई थी। गांव के ही बुजुर्ग विजय कुमार शुक्ला कहते हैं कि बकुलाही नदी पहले बालकुनी नाम से जानी जाती थी। बाद में बकुलाही नाम हाे गया।
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अभयराज पाल ने बताया कि बकुलाही नदी पहले बालकुनी नाम से जानी जाती थी। कुशफरा गांव को लवकुश की जन्मस्थली भी बताया जाता है। परमा महाराज के प्रयास से आठ मार्च 1993 में नदी पर पुल बनाया गया, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने किया था। इसके बाद श्रद्धालुओं का आवागमन बढ़ गया।
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बुजुर्ग बाबूलाल कहते हैं कि मंदिर की वजह से गांव का विकास होने लगा। पर्यटन विभाग ने सौंदर्यीकरण कराया। पक्के घाट बनवाए, प्रकाश की व्यवस्था की गई। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर शनिदेव धाम पुलिस चौकी बनी। स्वास्थ्य विभाग ने राजकीय होम्योपैथी चिकित्सालय की स्थापना की।
विदेशी श्रद्धालु भी शनिदेव के दर्शन कर सकें इसके लिए सात दिसंबर 2019 को अतिथि गृह का निर्माण कराया गया। प्रत्येक शनिवार को लगभग दस हजार श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। हर वर्ष सात जनवरी को विशाल भंडारे का आयोजन होता है।
भरत यात्रा का होता है पड़ाव
प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में अयोध्या से चित्रकूट जाने वाली भरत यात्रा का पड़ाव शनिदेव धाम है। यहां सैकड़ों यात्री भोजन व विश्राम करते हैं। शनिदेव धाम के आसपास संकटमोचन हनुमान मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, काल भैरव-महाकाल मंदिर, दुर्गा जी मंदिर, मंठावीर टीला आदि दर्शनीय स्थल हैं।
देश की आजादी में आगे रहा गांव
कुशफरा निवासी लाल माधव सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। देश की आजादी के लिए वह कई बार जेल गए। करीब 15 साल पहले उनका निधन हो गया। गांव के अरुण कुमार श्रीवास्तव आईईएस थे, जो रेलवे के उच्च पद सेवानिवृत्त हुए हैं।
एक नजर
गांव की आबादी 3758, महिला 1852 , पुरुष 1906
घर-घर पानी पहुंचाने के लिए सड़क खोद कर छोड़ दी गई
बिजली के जर्जर तार, दूसरे गांव तक जाने का रास्ता नहीं
वर्जन
प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में अयोध्या से चित्रकूट जाने वाली भरत यात्रा का का पड़ाव शनिदेव धाम है। जहां पर सैकड़ों यात्री भोजन एवं विश्राम शनि देव धाम पर ही करते हैं। शनि देवधाम के आसपास संकटमोचन हनुमान मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, काल भैरव में, महाकाल मंदिर दुर्गा जी मंदिर, मंठावीर टीला आदि मंदिर एवं दर्शनीय स्थल है।
देश की स्वतंत्रता के लिए लाल माधव सिंह ने भी किया संघर्ष, अफसर भी हुए
बोले गांव के प्रधान
गांव के विकास के लिए यथासंभव कार्य किया है। विद्यालय का कायाकल्प कराने के साथ ही कच्चे रास्ते को पक्का बनवाया गया। इंटरलॉकिंग व जल निकासी के लिए नाला व नालियों का निर्माण कराया। अभी दूसरे गांव तक पक्की सड़क नहीं बन सकी। इसके लिए प्रयास जारी है।
- राम किशोर पाल, ग्राम प्रधान कुशफरा