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मन से नहीं डर से पहनते सरकारी यूनीफार्म
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Dec 2014 11:49 PM IST
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प्रतापगढ़। कमीशन के चक्कर में ज्यादातर स्कूलों ने बच्चों को घटिया यूनीफार्म बांट दी है। शिक्षकों के इस खेल की अधिकारियों ने जांच तक कराना जरूरी नहीं समझा।
जिले के 3264 प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग के सहायता प्राप्त 83 स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेेस देने के लिए लगभग साढे़ आठ करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे।
प्रत्येक बच्चे को दो-दो सेट ड्रेस वितरित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने पहले चरण में 75 प्रतिशत धनराशि दी थी। शासन का सख्त निर्देश था कि सिली ड्रेस न खरीदी जाए। कपड़े खरीदकर बच्चों की नाप के मुताबिक ड्रेस सिलवाई जाए। जिले में शायद ही कोई स्कूल ऐसा हो जहां बच्चों की नाप के मुताबिक ड्रेस सिलवाई गई हो।
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अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों ने कमीशन सेट कर ड्रेस खरीदी और बांट दी। आरोप है कि शिक्षकों ने प्रति सेट ड्रेस में 60 से 70 रुपये कमीशन ऐेंठ लिया। सिली ड्रेस होने के कारण छोटे बच्चों के लिए यह झोला तो बड़े बच्चों के लिए उटंग (छोटी) है। बच्चे इस ड्रेस को पहनने में झिझकते हैं। मगर शिक्षकों के भय से वे कभी-कभी पहनकर स्कूल आते हैं।
ड्रेस में खंड शिक्षा अधिकारियों पर कमीशन खाने का आरोप लग रहा है। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों ने बताया कि प्रति ड्रेस बीस-बीस रुपये बीईओ ने वसूले हैं। कुछ ब्लाकों के शिक्षकों ने रुपये नहीं दिए तो बीईओ उनके खिलाफ हो गए हैं।
जिले के आठ राजकीय स्कूलों, 78 सहायता प्राप्त स्कू लों में छह से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेस बांटने में खूब मनमानी हुई है। बेसिक शिक्षा विभाग से मिली धनराशि की बंदरबांट की गई है।
बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि जल्द ही स्कूलों में टीम भेजकर ड्रेस की जांच कराई जाएगी। अनियमितता करने वाले शिक्षकों को बख्शा नहीं जाएगा।
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जिले के 3264 प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग के सहायता प्राप्त 83 स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेेस देने के लिए लगभग साढे़ आठ करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे।
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प्रत्येक बच्चे को दो-दो सेट ड्रेस वितरित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने पहले चरण में 75 प्रतिशत धनराशि दी थी। शासन का सख्त निर्देश था कि सिली ड्रेस न खरीदी जाए। कपड़े खरीदकर बच्चों की नाप के मुताबिक ड्रेस सिलवाई जाए। जिले में शायद ही कोई स्कूल ऐसा हो जहां बच्चों की नाप के मुताबिक ड्रेस सिलवाई गई हो।
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अधिकांश स्कूलों में शिक्षकों ने कमीशन सेट कर ड्रेस खरीदी और बांट दी। आरोप है कि शिक्षकों ने प्रति सेट ड्रेस में 60 से 70 रुपये कमीशन ऐेंठ लिया। सिली ड्रेस होने के कारण छोटे बच्चों के लिए यह झोला तो बड़े बच्चों के लिए उटंग (छोटी) है। बच्चे इस ड्रेस को पहनने में झिझकते हैं। मगर शिक्षकों के भय से वे कभी-कभी पहनकर स्कूल आते हैं।
ड्रेस में खंड शिक्षा अधिकारियों पर कमीशन खाने का आरोप लग रहा है। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों ने बताया कि प्रति ड्रेस बीस-बीस रुपये बीईओ ने वसूले हैं। कुछ ब्लाकों के शिक्षकों ने रुपये नहीं दिए तो बीईओ उनके खिलाफ हो गए हैं।
जिले के आठ राजकीय स्कूलों, 78 सहायता प्राप्त स्कू लों में छह से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेस बांटने में खूब मनमानी हुई है। बेसिक शिक्षा विभाग से मिली धनराशि की बंदरबांट की गई है।
बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि जल्द ही स्कूलों में टीम भेजकर ड्रेस की जांच कराई जाएगी। अनियमितता करने वाले शिक्षकों को बख्शा नहीं जाएगा।