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Pratapgarh News: अंडर पास में डूबी स्कूल की बोलेरो, चीखने लगीं शिक्षिकाएं और बच्चे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Aug 2024 02:34 AM IST
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School Bolero drowns in underpass, teachers and children start screaming
शहर के रामलीला मैदान के समीप बारिश के दौरान स्कूली बच्चों और शिक्षिकाओं ने मौत को बेहद करीब से देखा। जलभराव के दौरान अंडरपास में पानी भरने से स्कूल की एक बोलेरो उसमें डूब गई। बोलेरो की छत ही पानी से बाहर दिख पा रही थी। पूरी बोलेरो में पानी भर गया था। बच्चों और शिक्षिकाओं की चीख पुकार पर आस पास के लोगों ने पानी में उतरकर उनको बाहर निकाला। शहर के सिनेमा रोड स्थित आत्रेय एकेडमी में दोपहर बाद छुट्टी होने पर दो शिक्षिकाओं और चार बच्चों को स्कूल की एक निजी बोलेरो घर पहुंचाने जा रही थी। रामलीला मैदान के पास बने रेलवे अंडर पास में पहले से पानी भरा हुआ था। चालक बोलेरो को लेकर पानी के अंदर जाने लगा। पानी अधिक होने के कारण बोलेरो बंद हो गई। अंडर पास के बगल नाले के पानी से जलभराव होने लगा। पानी में बोलेरो को डूबते देख शिक्षिकाओं और बच्चों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। उनकी चीख पुकार सुन आस पास के लोग दौड़ पड़े। लोगों ने मशक्कत कर बच्चों और शिक्षिकाओं को पानी से बाहर निकाला। बोलेरो को रस्सी से बांधकर बाहर खींचने का प्रयास किया। मगर, पानी अधिक होने के कारण बोलेरो बाहर नहीं निकल सका। जानकारी होने पर स्कूल की ओर से जेसीबी भेजी गई। जेसीबी से बोलेरो को बाहर निकालकर स्कूल तक पहुंचाया गया। आत्रेय एकेडमी के प्रधानाचार्य अनिल शंकर ने बताया कि स्कूल का वाहन जिरियामऊ की तरफ गया था। उसमें शिक्षिकाएं और बच्चे नहीं थे। जेसीबी से अंडरपास में फंसी बोलेरो को बाहर निकाल लिया गया है। किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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बारिश के दिनों में अंडरपास नहीं गुजरते हैं लोग
रामलीला मैदान के पास बने अंडरपास में बारिश के दौरान जलभराव हो जाता है। अंडरपास बनने से अचलपुर, जिरियामऊ, पटखौली समेेत कई मोहल्ले के लोगों को जाम से निजात मिली, लेकिन बारिश के दौरान जलभराव होने के कारण अंडर पास से गुजरना नामुमकिन हो जाता है। मजबूरी में लोगों को जेलरोड के रास्ते होकर घर तक पहुंचना पड़ता है।
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यह है स्कूल वाहन का मानक
एआरटीओ प्रवर्तन दिलीप गुप्ता ने बताया कि स्कूल के वाहनों के आगे और पीछे के हिस्से पर विद्यालय बस या वैन लिखा होना चाहिए। एक आपातकालीन द्वार और खिड़की भी होनी चाहिए। जिसे दोनों ओर से खोला जा सके। वाहन में क्रॉस शीशे भी लगे होने चाहिए। जिससे चालक प्रवेश और निकास द्वार के साथ पिछले पहिए का अगला हिस्सा साफ-साफ देख सके। यदि बच्चे और शिक्षिकाएं निजी वाहन से प्रतिदिन विद्यालय आते-जाते हैं तो उनको उसी वाहन से घर पहुंचाना चाहिए।
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