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प्रधानमंत्री के तीन उद्योगपति मित्रों की जेब में गए किसान बीमा के दस हजार करोड़ रुपये : प्रियंका

Thu, 09 May 2019 11:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 09 May 2019 11:42 PM IST
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Rs 10,000 crore of farmers' insurance in the pocket of three industrialists: Priyanka
जनसभा में प्रियंका गांधी का स्वागत करतीं विधायक आराधना मिश्रा व पूर्व सांसद रत्ना सिंह। - फोटो : pratapgarh
कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह के समर्थन में गुरुवार को शहर में जनसभा को संबोधित करने पहुंचीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी अपने भाषण के दौरान मोदी सरकार पर लगातार हमलावर रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के लिए उनके पास वक्त नहीं है। वह सिर्फ उद्योगपतियों के कर्जे माफ कर रहे हैं।
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उन्होंने उद्योगपतियों के 550 हजार करोड़ रुपये माफ कर दिए। इनकी सरकार में उद्योगपति बढ़ रहे हैं और किसान मर रहे हैं। किसानों की फसल बर्बाद होती रही। इसकी आपत्तियां भी आती रहीं, लेकिन किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिला। आखिर किसानों के बीमा के पैसे कहा चले जाते हैं। देश में किसानों के बीमा के दस हजार करोड़ रुपये प्रधानमंत्री के तीन उद्योगपति मित्रों की जेब में चले गए। 
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चुनाव करीब आने पर भाजपाइयों ने प्रचार के लिए किसान सम्मान योजना शुरू कर दी। कुछ लोगों के खाते में दो-दो हजार रुपये भी भेज दिए गए। फिर पता चला कि वापस लिए जा रहे हैं। पांच साल इन्होंने किसानों को नकारा। चुनाव में किसान सम्मान योजना ले आए। जिसमें सालभर में किसानों को छह हजार रुपये देने की बात कह रहे हैं।
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यदि आपके परिवार में पांच से छह सदस्य हैं तो सालभर में छह हजार रुपये से आपका क्या होगा? इनकी योजना के हिसाब से एक व्यक्ति के खाते में रोजाना दो रुपये आएंगे। यह किसान सम्मान नहीं किसान अपमान योजना है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बनने के बाद हमने तीन दिन के अंदर किसानों के कर्जे माफ किए। रोज कर्ज माफ हो रहे हैं। 

प्रियंका ने कहा कि प्रधानमंत्री झूठ बोलते हैं। कहते हैें इतना विकास हुआ जितना पिछले सत्तर सालों में नहीं हुआ। उनकी बातें सुनकर घर में बैठा आम आदमी भी सोचता है कि विकास चलकर मेरे घर भी आ रहा होगा। लेकिन यह असलियत नहीं है। प्रचार के इनके आंकड़े झूठे हैं। किसान परेशान हैं। उनकी कमर टूट गई है। उपज नहीं बिक रही।

इन्होंने शुगर मिलों का बकाया भुगतान कर दिया, लेकिन गन्ना किसानों का नहीं। प्रतापगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के आंवला किसानों को भी कोई मदद नहीं मिली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक किसान मुझे मिला। उसने बताया कि यहां उसके खेतों का आलू नहीं बिका तो वह महाराष्ट्र चला गया। वहां बिक्री के बाद सारा खर्च निकालकर उसके पास सिर्फ 45 रुपये बचे। जिसे उसने प्रधानमंत्री को भेज दिया। कुछ दिनों पहले देशभर से हजारों किसान पैदल नंगे पांव दिल्ली आए।

प्रधानमंत्री से कहा कि पांच मिनट का समय दे दो, हम अपनी समस्या बताना चाहते हैं। प्रधानमंत्री के पास उनके लिए वक्त नहीं था। मोदी ने पांच साल में वाराणसी के लिए भी पांच मिनट का वक्त नहीं निकाला। बड़े प्रचार किए, लाखों की मीटिंग की, भीड़ जुटाई, लेकिन वाराणसी के किसी गांव में कभी नहीं गए। किसी की समस्या नहीं जानी। कहा था भ्रष्टाचार मिटाएंगे। भ्रष्ट कौन निकला। अब सब छिपा रहे हैं। प्रचार में लेप लगाकर दिखा रहे हैं। 

प्रियंका ने कहा कि राहुल गांधी ने न्याय योजना के तहत देश के हर गरीब परिवारों को 72 हजार रुपये सालाना देने का घोषणापत्र जारी किया तो उसका मजाक उड़ाया। इस वादे पर हंसते हैं। कहा, इसके लिए पैसे कहां से आएंगे। इस पर राहुल ने सवाल उठाया कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं तो उद्योगपतियों के कर्ज कैसे माफ किए। 

कहा था दो करोड़ रोजगार हर साल देंगे, पांच करोड़ घट गए 
प्रियंका ने नोटबंदी और बेरोजगारी पर भी प्रधानमंत्री को घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि देश में अजीब सिलसिला चल पड़ा है। बीजेपी भारी बहुमत से जीती। वादे किए थे, लेकिन कुछ नहीं किया। कहा था विदेशों से काला धन लाने के बाद हर भारतीय के खाते में 15-15 लाख रुपये डाले जाएंगे, लेकिन किसी को भी फूटी कौड़ी नहीं मिली।

कहते हैं दो करोड़ रोजगार हर साल दिए, लेकिन सच्चाई यह है कि पांच करोड़ रोजगार घट गए। नोटबंदी के समय कहा कि देशभक्ति दिखाइए और लाइन में लग जाइए। लोग कतार में लग गए, लेकिन काला धन वापस नहीं आया। नोटबंदी के चलते पचास लाख रोजगार घट गए। मैं यूपी में सभी जगहों पर गई। हर जगह नौजवान यह कह रहे हैं कि हमें रोजगार नहीं मिला। किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा भी जुमलेबाजी साबित हुआ। किसान आवारा पशुओं से परेशान हैं।


उनकी बेटियां रखवाली के लिए खेतों में बैठने के लिए मजबूर हैं। रात में वह खुद रखवाली कर रहे हैं। इनकी सरकार में किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा है। 12 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। जानवरों के लिए गौशाला और बाड़े बनवाने का दावा किया, लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ। कहीं एक-दो जगहों पर बनवाया भी तो वहां बिना चारा-पानी के जानवर मर रहे हैं। 
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