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परिणाम से पहले जिपं अध्यक्ष कुर्सी के लिए जंग
prtapgarh
Updated Sun, 01 Nov 2015 02:23 AM IST
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प्रतापगढ़। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए परिणाम के पहले ही जंग तेज हो गई है। पक्ष और विपक्ष अपने करीबी को जिपं अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने के लिए सक्रिय हो गया है। हालांकि परिणाम रविवार शाम तक आ जाएगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अनारक्षित होने के कारण इस वर्ष सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस पर कब्जा करने का मौका नहीं गंवाना चाहते हैं। कुर्सी हथियाने के लिए दोनों पक्ष ने पूरी ताकत झोंक दी है। कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया के 11 प्रत्याशी निर्विरोध होने के कारण उनका पक्ष अधिक मजबूत पड़ रहा है। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी इतनी आसानी से किसी को नहीं हासिल होगी। बीते वर्षों में हुए चुनाव में यह देखने को मिला कि जिले के नेता दो धड़े में बंट जाते हैं। इस बार के भी चुनाव में नेताओं के बीच खींचतान चुनाव को दिलचस्प बना सकती है।
निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद मौर्य विकास कार्यों का हवाला देकर चुनाव अपने पक्ष में मानकर चल रहे हैं। अपनी कुर्सी सलामत रखने के लिए ही अपनी पत्नी और भतीजे को उन्होंने मैदान में उतारा था। पिछड़ी जाति और अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले प्रमोद मौर्य को कमजोर नहीं माना जा सकता है। परिणाम तो रविवार शाम तक आएंगे, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी शुरू कर दी है। हालांकि राजाभैया ने अभी तक किसी प्रत्याशी के नाम का खुलासा नहीं किया है। लेकिन उनके नजदीकी कई लोग ऐसे हैं जो अपने को अध्यक्ष पद का दावेदार बता रहे हैं।
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जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अनारक्षित होने के कारण इस वर्ष सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस पर कब्जा करने का मौका नहीं गंवाना चाहते हैं। कुर्सी हथियाने के लिए दोनों पक्ष ने पूरी ताकत झोंक दी है। कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया के 11 प्रत्याशी निर्विरोध होने के कारण उनका पक्ष अधिक मजबूत पड़ रहा है। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी इतनी आसानी से किसी को नहीं हासिल होगी। बीते वर्षों में हुए चुनाव में यह देखने को मिला कि जिले के नेता दो धड़े में बंट जाते हैं। इस बार के भी चुनाव में नेताओं के बीच खींचतान चुनाव को दिलचस्प बना सकती है।
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निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद मौर्य विकास कार्यों का हवाला देकर चुनाव अपने पक्ष में मानकर चल रहे हैं। अपनी कुर्सी सलामत रखने के लिए ही अपनी पत्नी और भतीजे को उन्होंने मैदान में उतारा था। पिछड़ी जाति और अनुसूचित जाति के प्रत्याशियों के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले प्रमोद मौर्य को कमजोर नहीं माना जा सकता है। परिणाम तो रविवार शाम तक आएंगे, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी शुरू कर दी है। हालांकि राजाभैया ने अभी तक किसी प्रत्याशी के नाम का खुलासा नहीं किया है। लेकिन उनके नजदीकी कई लोग ऐसे हैं जो अपने को अध्यक्ष पद का दावेदार बता रहे हैं।
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