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Pratapgarh News: चार और बंद बक्से मिलने की चर्चा, ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार से हो रही तलाश
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नवाबगंज के बरईपुर गांव में घर के अंदर जमीन में ड्रम में रखे गए करीब करोड़ों रुपये की नकदी का राज गहराता जा रहा है। शुक्रवार को चर्चा रही कि मकान के भीतर चार और बंद बक्से मिले हैं।हालांकि, इसकी पुष्टि किसी भी अधिकारी ने नहीं की है।
उधर, जमीन के नीचे और कितनी नकदी या अन्य सामान छिपाकर रखा गया है, इसका पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) का सहारा लिया जा रहा है। मकान के चारों ओर छह सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड नवाबगंज थाने के अलावा पुलिस के उच्चाधिकारियों के पास भी पहुंच रहा है।
शुक्रवार को भी घर के अंदर जांच और खोदाई का सिलसिला जारी रहा। पुलिस के साथ आयकर विभाग और बैंक अधिकारियों की टीमें पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, पुलिस की एक टीम मामले की पड़ताल के लिए पुणे भी रवाना की गई है। टीम वहां रह चुके संबंधित लोगों और उनके संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाएगी।
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मकान में आयकर विभाग के छह अधिकारी और बैंक के दो अधिकारी व दो कर्मचारी मौजूद रहे। इसके अलावा डॉग स्क्वायड की टीम भी तलाशी अभियान में शामिल रही। घर के अंदर खोदाई के लिए 12 मजदूरों को बुलाया गया है।
कई बार में पुणे से प्रयागराज लाई गई रकम
पुलिस जांच में पता चला है कि करोड़ों रुपये की नकदी एक बार में नहीं, बल्कि कई बार में पुणे से प्रयागराज लाई गई थी। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि रकम किसके माध्यम से और किन साधनों से यहां पहुंचाई गई। इसके लिए पुणे में रह चुके लोगों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस की एक टीम इसी सिलसिले में पुणे रवाना की गई है। हालांकि, रकम के स्रोत और उसे लाने के तरीके की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इनसेट
बुधवार को मिले थे रुपये से भरे तीन ड्रम
बुधवार देर शाम को गांव के राकेश यादव के मकान में नकदी से भरे प्लास्टिक के तीन ड्रम गड़े मिले थे। इनमें 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां थीं। पुलिस के मुताबिक, राकेश का भाई बबलू यादव पिछले कई वर्ष से पुणे में रहता था। राकेश अपने भाई के पास आता जाता था। पुणे में वह किसी कंपनी में काम करता था। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में राकेश यादव गांव आया था। उसके साथ दो जीजा और साढ़ू भी आए थे। चर्चा है कि रुपये वहीं से लाए गए थे। वहीं, पुलिस को दिए बयान में राकेश यादव ने बरामद नकदी उसकी होने की बात से इन्कार किया है। फिलहाल इस मसले पर पुलिस की ओर से आधिकारिक सूचना नहीं जारी की जा रही है।
इनसेट
जाने क्या है ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार
ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार जमीन के अंदर छिपी वस्तुओं का पता लगाने वाली आधुनिक तकनीक है। यह जमीन में रेडियो तरंगें भेजता है। जमीन के नीचे मौजूद धातु, खाली जगह, पाइप या अन्य वस्तुओं से टकराकर ये तरंगें वापस लौटती हैं। इनके संकेतों का विश्लेषण कर जमीन के भीतर मौजूद वस्तुओं की स्थिति, गहराई और आकार का अनुमान लगाया जाता है। इस तकनीक में बिना बड़े पैमाने पर खोदाई किए जमीन के अंदर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
इनसेट
खोजी कुत्ते से भी कराई गई मकान की तलाशी
करोड़ों रुपये की नकदी मिलने के बाद जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। मकान और उसके आसपास के हिस्सों में खोजी कुत्ते की मदद से भी तलाशी कराई गई। टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसे प्रयागराज तक कैसे पहुंचाया गया। इसके लिए संबंधित लोगों के संपर्कों, उनकी गतिविधियों और बैंक खातों में हुए लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है। डीसीपी गंगापार सोनम कुमार ने बताया इस रकम को लाने और छिपाने में किन लोगों की भूमिका रही है, जांच की जा रही है।
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उधर, जमीन के नीचे और कितनी नकदी या अन्य सामान छिपाकर रखा गया है, इसका पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) का सहारा लिया जा रहा है। मकान के चारों ओर छह सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इनका लाइव फीड नवाबगंज थाने के अलावा पुलिस के उच्चाधिकारियों के पास भी पहुंच रहा है।
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शुक्रवार को भी घर के अंदर जांच और खोदाई का सिलसिला जारी रहा। पुलिस के साथ आयकर विभाग और बैंक अधिकारियों की टीमें पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, पुलिस की एक टीम मामले की पड़ताल के लिए पुणे भी रवाना की गई है। टीम वहां रह चुके संबंधित लोगों और उनके संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाएगी।
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मकान में आयकर विभाग के छह अधिकारी और बैंक के दो अधिकारी व दो कर्मचारी मौजूद रहे। इसके अलावा डॉग स्क्वायड की टीम भी तलाशी अभियान में शामिल रही। घर के अंदर खोदाई के लिए 12 मजदूरों को बुलाया गया है।
कई बार में पुणे से प्रयागराज लाई गई रकम
पुलिस जांच में पता चला है कि करोड़ों रुपये की नकदी एक बार में नहीं, बल्कि कई बार में पुणे से प्रयागराज लाई गई थी। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि रकम किसके माध्यम से और किन साधनों से यहां पहुंचाई गई। इसके लिए पुणे में रह चुके लोगों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस की एक टीम इसी सिलसिले में पुणे रवाना की गई है। हालांकि, रकम के स्रोत और उसे लाने के तरीके की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इनसेट
बुधवार को मिले थे रुपये से भरे तीन ड्रम
बुधवार देर शाम को गांव के राकेश यादव के मकान में नकदी से भरे प्लास्टिक के तीन ड्रम गड़े मिले थे। इनमें 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां थीं। पुलिस के मुताबिक, राकेश का भाई बबलू यादव पिछले कई वर्ष से पुणे में रहता था। राकेश अपने भाई के पास आता जाता था। पुणे में वह किसी कंपनी में काम करता था। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में राकेश यादव गांव आया था। उसके साथ दो जीजा और साढ़ू भी आए थे। चर्चा है कि रुपये वहीं से लाए गए थे। वहीं, पुलिस को दिए बयान में राकेश यादव ने बरामद नकदी उसकी होने की बात से इन्कार किया है। फिलहाल इस मसले पर पुलिस की ओर से आधिकारिक सूचना नहीं जारी की जा रही है।
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जाने क्या है ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार
ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार जमीन के अंदर छिपी वस्तुओं का पता लगाने वाली आधुनिक तकनीक है। यह जमीन में रेडियो तरंगें भेजता है। जमीन के नीचे मौजूद धातु, खाली जगह, पाइप या अन्य वस्तुओं से टकराकर ये तरंगें वापस लौटती हैं। इनके संकेतों का विश्लेषण कर जमीन के भीतर मौजूद वस्तुओं की स्थिति, गहराई और आकार का अनुमान लगाया जाता है। इस तकनीक में बिना बड़े पैमाने पर खोदाई किए जमीन के अंदर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है।
इनसेट
खोजी कुत्ते से भी कराई गई मकान की तलाशी
करोड़ों रुपये की नकदी मिलने के बाद जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। मकान और उसके आसपास के हिस्सों में खोजी कुत्ते की मदद से भी तलाशी कराई गई। टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और इसे प्रयागराज तक कैसे पहुंचाया गया। इसके लिए संबंधित लोगों के संपर्कों, उनकी गतिविधियों और बैंक खातों में हुए लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है। डीसीपी गंगापार सोनम कुमार ने बताया इस रकम को लाने और छिपाने में किन लोगों की भूमिका रही है, जांच की जा रही है।