राज्यसभा चुनाव : सपा के बाद राजा भैया के दर पर पहुंचे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री, गरमाई सियासत
जनसत्ता दल के अध्यक्ष और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया व उनके पार्टी से बाबागंज विधायक विनोद सरोज को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और भाजपा के नेता राजा भैया को अपने पाले में लाने में जुट गए हैं।
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प्रदेश की 10वीं राज्यसभा सीट के पेंच में उलझे सियासी दल जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया को अपने पाले में करने की कवायद तेज कर दिए हैं। भाजपा और सपा दोनों उन्हें अपने खेमे में लेने के लिए बेचैन हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए आगामी 27 फरवरी को मतदान होना है। मसलन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने राजा भैया से मुलाकात की है।
जनसत्ता दल के अध्यक्ष और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया व उनके पार्टी से बाबागंज विधायक विनोद सरोज को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और भाजपा के नेता राजा भैया को अपने पाले में लाने में जुट गए हैं। दरअसल, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और राजा भैया की मुलाकात के 24 घंटे के बाद ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मंत्री जेपीएस राठौर ने राजा भैया से मुलाकात की। जिसके बाद जिले की सियासत भी गरमा उठी है।
समर्थकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में मदद लेने के लिए दोनों दल बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा हो रही है। फिलहाल अभी राजा भैया ने अपना पत्ता नहीं खोला है। राज्यसभा चुनाव में राजा भैया के पत्ता खोलने के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि लोकसभा चुनाव में जनसत्ता दल अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी या किसी दल से गठबंधन करेगी।
भाजपा का आठवां प्रत्याशी मैदान में उतरने से अहम हो गया है राजा भैया का समर्थन
प्रदेश की दस सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अभी तक सात और सपा ने तीन सीटों पर दावेदारी कर रखी थी। इस तरह से इन सीटों पर दोनों पार्टियों का सात-तीन का अनुपात राज्यसभा के लिए चल रहा था। मगर इस बीच भाजपा ने आठवें प्रत्याशी के तौर पर संजय सेठ को मैदान में उतार दिया है। जिसकी वजह से अब राज्यसभा प्रत्याशियों की संख्या 11 हो गई है। अब इस समीकरण में दो-दो वोटों के मालिक के तौर पर राजा भैया का समर्थन पहले से और अहम हो गया है। इसलिए उन्हें अपने खेमे में शामिल करने के लिए दोनों दलों की ओर से प्रयास जारी है।