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रेलवे : बिक्री से ज्यादा रिफंड, कैश की किल्लत
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रेलवे स्टेशन आरक्षण काउंटर पर टिकट वापस करते यात्रा कैंसिल करने वाले लोग।
- फोटो : PRATAPGARH
कोरोना वायरस के खौफ ने रेल विभाग की कमाई पर ब्रेक लगा दिया है। टिकटों की बिक्री से अधिक यात्रियों को रिफंड करना पड़ रहा है। आरक्षित टिकट बनवाने से ज्यादा कैंसिल कराने वाले पहुंच रहे हैं।
इससे बुकिंग काउंटर पर कैश की किल्लत हो गई है। लोगों को टिकट के पैसे लेने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इसे लेकर कर्मचारियों व यात्रियों के बीच तकरार भी हो रही है।
जिले में कोरोना के खौफ से हर कोई भयभीत है। कोरोना का असर रेल विभाग पर भी पड़ा है। होली के बाद ट्रेनों में बैठने की जगह लोगों को नहीं मिलती थी। ट्रेनों की सीट आरक्षित कराने के लिए सुबह मारामारी रहती थी। यहां तक कि एसी कोच के लिए भी कई दिनों तक लोगों को माथापच्ची करनी पड़ती थी।
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कोरोना के खौफ के बाद लोगों ने अपनी यात्राएं टाल दी हैं। ट्रेनों के आरक्षित टिकटों से रेल विभाग की प्रतिदिन ढाई तीन लाख रुपये की आमदनी होती थी। कोरोना के खौफ में टिकट आरक्षित कराने वालों की संख्या घट गई है।
यहां बिक्री से अधिक रिफंड किया जा रहा है। आरक्षण काउंटर पर हर दिन जहां दो से चार लाख रुपये तक के टिकट बिकते थे, लेकिन पचास हजार रुपये के भी टिकट नहीं बिक पा रहे हैं।
वैष्णो देवी, पंजाब, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली समेत अन्य स्थानों पर जाने वाले लोग अब आरक्षित टिकट कैंसिल कराने पहुंच रहे हैं। रेल कर्मचारियों के अनुसार एक सप्ताह से कमाई कम हो गई है। बचत तो दूर बिक्री के रुपये रिफंड हो रहे हैं। यहां तक कि टिकट निरस्त कराने वाले लोगों को रुपये के लिए इंतजार भी करना पड़ रहा है।
इसे लेकर यात्रियों व कर्मचारियों के बीच तकरार भी होती रहती है। गुरुवार को दोपहर तक दोनों काउंटर पर करीब 85 हजार रुपये के टिकट रिफंड किए गए थे जबकि महज 41 हजार रुपये के ही टिकट बनाए गए थे। रिफंड के लिए कादीपुर निवासी मनीष, जोगापुर के रहने वाले हनीफ इंतजार कर रहे थे।
आरक्षण प्रभारी रणवीर सिंह ने बताया कि कोरोना के खौफ के चलते टिकट निरस्त कराने वालों की संख्या बढ़ गई है। काउंटर पर टिकट बनवाने से अधिक निरस्त कराने वालों की भीड़ है।
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इससे बुकिंग काउंटर पर कैश की किल्लत हो गई है। लोगों को टिकट के पैसे लेने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इसे लेकर कर्मचारियों व यात्रियों के बीच तकरार भी हो रही है।
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जिले में कोरोना के खौफ से हर कोई भयभीत है। कोरोना का असर रेल विभाग पर भी पड़ा है। होली के बाद ट्रेनों में बैठने की जगह लोगों को नहीं मिलती थी। ट्रेनों की सीट आरक्षित कराने के लिए सुबह मारामारी रहती थी। यहां तक कि एसी कोच के लिए भी कई दिनों तक लोगों को माथापच्ची करनी पड़ती थी।
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कोरोना के खौफ के बाद लोगों ने अपनी यात्राएं टाल दी हैं। ट्रेनों के आरक्षित टिकटों से रेल विभाग की प्रतिदिन ढाई तीन लाख रुपये की आमदनी होती थी। कोरोना के खौफ में टिकट आरक्षित कराने वालों की संख्या घट गई है।
यहां बिक्री से अधिक रिफंड किया जा रहा है। आरक्षण काउंटर पर हर दिन जहां दो से चार लाख रुपये तक के टिकट बिकते थे, लेकिन पचास हजार रुपये के भी टिकट नहीं बिक पा रहे हैं।
वैष्णो देवी, पंजाब, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली समेत अन्य स्थानों पर जाने वाले लोग अब आरक्षित टिकट कैंसिल कराने पहुंच रहे हैं। रेल कर्मचारियों के अनुसार एक सप्ताह से कमाई कम हो गई है। बचत तो दूर बिक्री के रुपये रिफंड हो रहे हैं। यहां तक कि टिकट निरस्त कराने वाले लोगों को रुपये के लिए इंतजार भी करना पड़ रहा है।
इसे लेकर यात्रियों व कर्मचारियों के बीच तकरार भी होती रहती है। गुरुवार को दोपहर तक दोनों काउंटर पर करीब 85 हजार रुपये के टिकट रिफंड किए गए थे जबकि महज 41 हजार रुपये के ही टिकट बनाए गए थे। रिफंड के लिए कादीपुर निवासी मनीष, जोगापुर के रहने वाले हनीफ इंतजार कर रहे थे।
आरक्षण प्रभारी रणवीर सिंह ने बताया कि कोरोना के खौफ के चलते टिकट निरस्त कराने वालों की संख्या बढ़ गई है। काउंटर पर टिकट बनवाने से अधिक निरस्त कराने वालों की भीड़ है।