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बेहतर पैदावार से मालामाल हुए बागवान

Sun, 24 Jul 2016 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Sun, 24 Jul 2016 12:17 AM IST
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profit in mango traders
प्रतापगढ़ की खबरें
कुंडा के लंगड़ा, चौसा और दशहरी आम ने इस बार बागवानों को मालामाल कर दिया। कुदरत की मेहरबानी से हुई बेहतर पैदावार के बावजूद कीमतें न गिरने के कारण इस बार आम के किसानों को अच्छा मुनाफा हुआ है। पूरे सीजन के दौरान भी आम की कीमतें 30 से 35 रुपये के बीच बनी रहीं। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर यहां से आम देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही विदेश भी भेजा गया। जिससे किसानों को भरपूर फायदा हुआ।
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कुंडा का मानिकपुर इलाका फलपट्टी क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। यहां आम की मंडी सजती है। आम यहां के व्यापारियों और बागवानों की रोजरोटी का साधन ही नहीं बल्कि व्यवसाय भी है। वर्षों से इस क्षेत्र में फलों के राजा आम का राज है। यह क्षेत्र जिले को आम के नाम से ही पहचान दिलाता है। इस बार आम का सीजन आते ही व्यापारी किसानों से उनकी बागों का सौदा करने लगे थे। कुछ किसानों ने बाग अपने पास भी रखी। क्षेत्रीय व्यापारी ज्ञानचंद्र पटेल, राजेंद्र पटेल, जगतपाल पटेल, उमेश सोनकर, रामू पटेल, सूबेदार आदि की मानें तो शुरू में कच्चा आम अचार के लिए बाहर भेजा गया। आम पकने के बाद के बाद मांग तेजी से बढ़ी। खटाई आदि के लिए राटन आम यानी बाग से गिरकर फूट जाने वाले फल भी प्रयोग में लाए जाते हैं।
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इसके बाद आम के पूर्ण रूप से विकसित होने पर इसे सबसे पहले बाहर भेजवाने के लिए बड़े व्यापारियों से संपर्क किया जाता है। यह व्यापारी इस आम को इलाहाबाद फिर मुंबई के जरिए विदेशों में भेजते हैं। बाहर भेजे जाने वाले आम दशहरी, चौसा और सबसे बढ़िया लंगड़ा होता है। इन तीनों वेराइटी की खासी मांग भी होती है। यह आम यहां से कच्चा ही भेज दिया जाता है। इसके बाद बचे हुए आम को मानिकपुर की मंडी से भेजा जाता है। आम किसान रामनरेश, मोहनलाल, सुरेश आदि की मानें इस बार भरपूर पैदावार के साथ बाजार ने भी साथ दिया। जिससे कई वर्षों से हो रहा घाटा पूरा हो गया। इससे काफी राहत मिली। मानिकपुर के आम अधिक मात्रा में विदेशों में भेजने के लिए ही बाबागंज के एक व्यापारी को मुख्यमंत्री ने सम्मानित भी किया।
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आम की नौ वेरायटी हैं कुंडा में
क्षेत्र में आम के बागों में कई नौ वेरायटी है। इनमें सबसे पहले तैयार होने वाला लंगड़ा है। यह अन्य आमों की अपेक्षा पहले ही तैयार हो जाता है। इसके बाद दशहरी फार्म में आता है। साफ सुथरा और औसत वजन का होने के कारण यह खाने और देखने में भी सुंदर लगता है। इसके बाद चौंसा लोगों को रास आता है। इसमें रेशे तो होते हैं, लेकिन स्वाद में यह सबसे बेस्ट होता है। इसके बाद देशी जैसा और हल्के सफेद कलर का सफेदा भी लोगों को खूब भाता है। भारी आम में फजली भी अपनी रंगत छोड़ता है। इसके अलावा अमरबाली, सिंदूरी, बीजू, तैमुरिया भी लोगों को खासे पसंद हैं।

शासन का नहीं कोई रोल
क्षेत्र को फलपट्टी घोषित किया गया है। बावजूद इसके बागों को संरक्षित करने के लिए बने उद्यान विभाग को इसकी फिक्र नहीं रहती। यहां तक कि किसी को कुंडा में इसके लिए तैनात भी नहीं किया गया है। बागों में पेड़ों को किस तरह की खाद और दवा की जरूरत है। इसके लिए किसान को खुद से ही सोचना पड़ता है। यहां तक कि उद्यान विभाग के लोगों को इसका क्षेत्रफल और औसत उत्पादन तक नहीं पता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां की मिट्टी ही बागों को संरक्षित करने का काम कर रही है।
 
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