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Pratapgarh News: गर्भवती महिलाओं को नहीं पड़ेगा भटकना, एफआरयू सेंटर में होगा अल्ट्रासाउंड
Fri, 30 Jun 2023 09:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Fri, 30 Jun 2023 09:46 PM IST
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स्त्री रोग विशेषज्ञ ही करेंगी रेडियोलॉजिस्ट का भी काम
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। एफआरयू सेंटर पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए अब निजी सेंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एफआरयू सेंटर पर तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ जांच कर मरीजों को रिपोर्ट मुहैया कराएंगी और इलाज भी करेंगी।
जिले में मेडिकल कॉलेज को मिलाकर छह एफआरयू सेंटर हैं। इसमें सीएचसी लालगंज, रानीगंज, कुंडा, लालगंज और बाघराय के साथ राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय शामिल हैं। राजा प्रताप बहादुर और लालगंज के अलावा किसी भी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी सेंटर भेजा जाता है। जहां 700 से एक हजार रुपये तक फीस ली जाती है। मरीजों की समस्या को देखते हुए शासन ने एफआरयू सेंटर पर तैनात स्त्रीरोग विशेषज्ञ को अब अल्ट्रासाउंड करने का भी जिम्मेदारी सौंप दी है। इससे चिकित्सक मरीज की वास्तविक स्थिति को सामने से देख सकेंगे। जबकि अभी तक सिर्फ रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज होता था। इसके अलावा मरीजों के पैसे भी बचेंगे। प्रशासन ने इसके लिए चिकित्सकों को तीन महीने का प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। इस मामले में सीएमओ डॉ. जीएम शुक्ल ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ को चिन्हित किया जा रहा है। इसके बाद ही वह रेडियोलॉजिस्ट का काम कर सकेंगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। एफआरयू सेंटर पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए अब निजी सेंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एफआरयू सेंटर पर तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ जांच कर मरीजों को रिपोर्ट मुहैया कराएंगी और इलाज भी करेंगी।
जिले में मेडिकल कॉलेज को मिलाकर छह एफआरयू सेंटर हैं। इसमें सीएचसी लालगंज, रानीगंज, कुंडा, लालगंज और बाघराय के साथ राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय शामिल हैं। राजा प्रताप बहादुर और लालगंज के अलावा किसी भी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी सेंटर भेजा जाता है। जहां 700 से एक हजार रुपये तक फीस ली जाती है। मरीजों की समस्या को देखते हुए शासन ने एफआरयू सेंटर पर तैनात स्त्रीरोग विशेषज्ञ को अब अल्ट्रासाउंड करने का भी जिम्मेदारी सौंप दी है। इससे चिकित्सक मरीज की वास्तविक स्थिति को सामने से देख सकेंगे। जबकि अभी तक सिर्फ रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज होता था। इसके अलावा मरीजों के पैसे भी बचेंगे। प्रशासन ने इसके लिए चिकित्सकों को तीन महीने का प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। इस मामले में सीएमओ डॉ. जीएम शुक्ल ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ को चिन्हित किया जा रहा है। इसके बाद ही वह रेडियोलॉजिस्ट का काम कर सकेंगी।
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