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प्रतापगढ़: जिले के आतंक का एनकाउंटर
Fri, 07 Jun 2019 06:26 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 07 Jun 2019 06:26 PM IST
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चिलबिला कोट में एसटीएफ द्वारा शातिर तौकीर से मुठभेड़ के बाद मौके पर पड़े सामान को देखती पुलिस।
- फोटो : pratapgarh
एक लाख के इनामी तौकीर अहमद का गुरुवार भोर में एसटीएफ ने एनकाउंटर कर दिया। लूट, हत्या व रंगदारी के साथ ही रुपये लेकर लोगों की हत्या करने वाला तौकीर जिले में आतंक का पर्याय बन गया था।
नगर कोतवाली, अंतू व सुलतानपुर में उसके खिलाफ 17 मुकदमे दर्ज हैं। एसटीएफ व जिले की पुलिस उसके पीछे 6 माह से पड़ी थी, लेकिन वह हाथ नहीं आ रहा था। पुलिस उसे ढूंढती रही और वह वारदात पर वारदात करता रहा।
नगर कोतवाली के आजाद नगर निवासी तौकीर अहमद पुत्र हफीज अहमद ने छिनैती और लूट की घटनाओं से अपराध की दुनिया में कदम रखा। देखते ही देखते वह सुपारी किलर बन गया। 7 सितंबर 2018 को तौकीर ने सुलतानपुर के लंभुआ थाना क्षेत्र में बैंक में डकैती की घटना को अंजाम दिया।
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14 सितंबर को तौकीर व उसके साथियों ने मिलकर अंतू थाना क्षेत्र के जगेशरगंज स्थित ग्रामीण बैंग से सवा 6 लाख रुपये लूट लिए। उसकी तलाश में एसटीएफ व पुलिस लगी रही। बैंक डकैती के सभी आरोपी पुलिस के हाथ लग गए, लेकिन तौकीर नहीं पकड़ा जा सका। फरारी के दौरान उसके ऊपर पुलिस अफसरों ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। फिर भी वह हाथ नहीं लगा।
काफी दिनों की चुप्पी के बाद पांच लाख की सुपारी मिलने पर अचानक तौकीर ने 23 जनवरी 2019 को सदर मोड़ पर मार्बल व्यापारी राजेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। 9 मार्च को सदर बाजार कोहरौटी में अंजनी गुप्ता के किराने की दुकान पर लूटपाट के दौरान पड़ोसी अशोक शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी।
16 मार्च को तौकीर ने अपने साथियों के साथ मिलकर मीराभवन स्थित बंधन बैंक से सवा लाख रुपये लूट लिए। 26 मार्च को राजस्थान मार्बल के मालिक व्यापारी हरि गौरव से रंगदारी मांगी। न देने पर पुलिस की मौजूदगी में 31 मार्च को हरि गौरव की दुकान पर फायरिंग कर भाग निकला। हरि गौरव की दुकान पर स्वॉट टीम व पुलिस के जवान असलहों के साथ मौजूद थे। इस घटना के बाद लोगों के जेहन में तौकीर के नाम का खौफ बैठ गया। इस बीच पुलिस से भी उसका सामान हुआ, लेकिन वह बच निकला।
इस घटना के बाद तौकीर के नाम का सिक्का अपराध जगत में चलने लगा। तौकीर ने अपने साथी अतीक के साथ मिलकर गायघाट रोड पर रोहित सिंह को गोली मार दी थी। सदर बाजार कोहरौंटी से अंजनी गुप्ता से पांच लाख की रंगदारी मांगी। इसके बाद चिलबिला के मिठाई विक्रेता आशीष उर्फ पिंटू से 20 लाख की रंगदारी मांगी।
सदर बाजार स्थित रूमा अस्पताल के मैनेजर से रंगदारी मांगी। अंतू में प्रधान दिनेश दुबे की हत्या की वारदात को अंजाम दिया। जिससे तौकीर का जिले में आतंक व्याप्त हो गया। छह माह के भीतर तौकीर वारदात पर वारदात करता रहा, लेकिन पुलिस उसे दबोचने में नाकाम रही। जिससे उसका खौफ व्यापारियों के सिर चढक़र बोल रहा था।
लोग उसका नाम सुनते ही खौफजदा हो जाते थे। नगर कोतवाल ने बताया कि तौकीर के खिलाफ हत्या के पांच, रंगदारी के चार, जानलेवा हमले के दो, लूट के पांच मुकदमे नगर कोतवाली में दर्ज हैं। इसके अलावा बैंक डकैती का अंतू व सुलतानपुर में केस दर्ज है।
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नगर कोतवाली, अंतू व सुलतानपुर में उसके खिलाफ 17 मुकदमे दर्ज हैं। एसटीएफ व जिले की पुलिस उसके पीछे 6 माह से पड़ी थी, लेकिन वह हाथ नहीं आ रहा था। पुलिस उसे ढूंढती रही और वह वारदात पर वारदात करता रहा।
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नगर कोतवाली के आजाद नगर निवासी तौकीर अहमद पुत्र हफीज अहमद ने छिनैती और लूट की घटनाओं से अपराध की दुनिया में कदम रखा। देखते ही देखते वह सुपारी किलर बन गया। 7 सितंबर 2018 को तौकीर ने सुलतानपुर के लंभुआ थाना क्षेत्र में बैंक में डकैती की घटना को अंजाम दिया।
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14 सितंबर को तौकीर व उसके साथियों ने मिलकर अंतू थाना क्षेत्र के जगेशरगंज स्थित ग्रामीण बैंग से सवा 6 लाख रुपये लूट लिए। उसकी तलाश में एसटीएफ व पुलिस लगी रही। बैंक डकैती के सभी आरोपी पुलिस के हाथ लग गए, लेकिन तौकीर नहीं पकड़ा जा सका। फरारी के दौरान उसके ऊपर पुलिस अफसरों ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। फिर भी वह हाथ नहीं लगा।
काफी दिनों की चुप्पी के बाद पांच लाख की सुपारी मिलने पर अचानक तौकीर ने 23 जनवरी 2019 को सदर मोड़ पर मार्बल व्यापारी राजेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। 9 मार्च को सदर बाजार कोहरौटी में अंजनी गुप्ता के किराने की दुकान पर लूटपाट के दौरान पड़ोसी अशोक शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी।
16 मार्च को तौकीर ने अपने साथियों के साथ मिलकर मीराभवन स्थित बंधन बैंक से सवा लाख रुपये लूट लिए। 26 मार्च को राजस्थान मार्बल के मालिक व्यापारी हरि गौरव से रंगदारी मांगी। न देने पर पुलिस की मौजूदगी में 31 मार्च को हरि गौरव की दुकान पर फायरिंग कर भाग निकला। हरि गौरव की दुकान पर स्वॉट टीम व पुलिस के जवान असलहों के साथ मौजूद थे। इस घटना के बाद लोगों के जेहन में तौकीर के नाम का खौफ बैठ गया। इस बीच पुलिस से भी उसका सामान हुआ, लेकिन वह बच निकला।
इस घटना के बाद तौकीर के नाम का सिक्का अपराध जगत में चलने लगा। तौकीर ने अपने साथी अतीक के साथ मिलकर गायघाट रोड पर रोहित सिंह को गोली मार दी थी। सदर बाजार कोहरौंटी से अंजनी गुप्ता से पांच लाख की रंगदारी मांगी। इसके बाद चिलबिला के मिठाई विक्रेता आशीष उर्फ पिंटू से 20 लाख की रंगदारी मांगी।
सदर बाजार स्थित रूमा अस्पताल के मैनेजर से रंगदारी मांगी। अंतू में प्रधान दिनेश दुबे की हत्या की वारदात को अंजाम दिया। जिससे तौकीर का जिले में आतंक व्याप्त हो गया। छह माह के भीतर तौकीर वारदात पर वारदात करता रहा, लेकिन पुलिस उसे दबोचने में नाकाम रही। जिससे उसका खौफ व्यापारियों के सिर चढक़र बोल रहा था।
लोग उसका नाम सुनते ही खौफजदा हो जाते थे। नगर कोतवाल ने बताया कि तौकीर के खिलाफ हत्या के पांच, रंगदारी के चार, जानलेवा हमले के दो, लूट के पांच मुकदमे नगर कोतवाली में दर्ज हैं। इसके अलावा बैंक डकैती का अंतू व सुलतानपुर में केस दर्ज है।
डी-20 गिरोह का सरगना था तौकीर
तौकीर के मारे जाने के बाद प्रेसवार्ता में बोलते आईजी मोहित अग्रवाल।
- फोटो : pratapgarh
जिले की पुलिस के नाक में दम करने वाला तौकीर डी-20 गिरोह का सरगना था। तौकीर के ग्रुप में कुल 10 सदस्य थे। कोतवाली पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोल रखी है। अभी उसका करीबी साथी अतीक फरार चल रहा है।बैंक डकैती, लूट, हत्या की वारदातों के साथ ही व्यापारियों से रंगदारी मांगने वाला तौकीर कोतवाली नगर का हिस्ट्रीशीटर था।
जिसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 182 ए है। तौकीर की गतिविधियों को देखते हुए हाल ही में पुलिस ने उसके गैंग को पंजीकृत किया था। डी-20 के नाम से बने गैंग में तौकीर सरगना था। उसके साथी अतीक, जैद, अंसार, हसनमुल्ला, कासिद, बाबू उर्फ इमदाद, आमिर, कलाम व शमशुल थे।
अतीक ही मौजूदा समय में फरारी काट रहा है और उसके ऊपर 50 हजार का इनाम घोषित किया गया है। जिसे दबोचने में पुलिस को पसीना छूट रहा है। तौकीर का छोटा भाई जैद है। वह जेल में निरुद्ध है।
पिस्टल से करता था अंधाधुंध फायरिंग
अस्पताल में बदमाश तौकीर का शव पहुंचने पर बवाल के मद्देनजर तैनात पुलिस।
- फोटो : pratapgarh
प्रतापगढ़। जरायम की दुनिया का बेताज बादशाह बनने की ललक लिए एक लाख का इनामी बदमाश तौकीर दुनिया से विदा हो गया। तीन साल पहले अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले तौकीर ने छह माह के भीतर पुलिस की नाक में दम कर दिया।
नगर कोतवाली के आजाद नगर निवासी तौकीर अहमद पुत्र हफीज अहमद ने अपराध जगत में करीब तीन साल पहले कदम रखा। शुरू में उसने कई छोटी घटनाओं को अंजाम द िया, लेकिन पुलिस उस तक नहीं पहुंची।
नगर कोतवाली के शिवजीपुरम निवासी टाइनी शाखा संचालक अजीत सिंह की 31 अगस्त 2017 को गायघाट रोड पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारे लैपटॉप व रुपयों से भरा बैग लूट ले गए थे। चिलबिला से सामान खरीदकर लौटते समय टेंपो सवार दुकानदार सतीश को भी लूटने के लिए गोली मार दी थी।
गोपालापुर के पास शिक्षिका से 80 हजार रुपये लूट लिए थे। इन घटनाओं का खुलासा करने में जुटी कोतवाली पुलिस लूटे गए मोबाइल के जरिए तौकीर के भाई जैद तक पहुंची। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने महुआर से रियाजुल को दबोचा।अजीत सिंह की हत्या में तौकीर, जैद, रियाजुल को पुलिस ने जेल भेजा था। तौकीर जमानत मिलने पर छूट गया, लेकिन जैद अभी भी फैजाबाद की जेल में है।
जेल से छूटने के बाद तौकीर ने हब्बू व सद्दाम के साथ मिलकर सुलतानपुर में बैंक लूटा। इसके बाद 14 सितंबर को अंतू के जगेशरगंज बैंक में धावा बोला। पुलिस की मानें तो तौकीर बेझिझक होकर फायरिंग करता था। दोनों हाथों से वह पिस्टल चलाता था। सामने पडने पर पुलिस को भी कुछ नहीं समझता था। परिवार के लोगों की भी बात नहीं मानता था।
नगर कोतवाली के आजाद नगर निवासी तौकीर अहमद पुत्र हफीज अहमद ने अपराध जगत में करीब तीन साल पहले कदम रखा। शुरू में उसने कई छोटी घटनाओं को अंजाम द िया, लेकिन पुलिस उस तक नहीं पहुंची।
नगर कोतवाली के शिवजीपुरम निवासी टाइनी शाखा संचालक अजीत सिंह की 31 अगस्त 2017 को गायघाट रोड पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्यारे लैपटॉप व रुपयों से भरा बैग लूट ले गए थे। चिलबिला से सामान खरीदकर लौटते समय टेंपो सवार दुकानदार सतीश को भी लूटने के लिए गोली मार दी थी।
गोपालापुर के पास शिक्षिका से 80 हजार रुपये लूट लिए थे। इन घटनाओं का खुलासा करने में जुटी कोतवाली पुलिस लूटे गए मोबाइल के जरिए तौकीर के भाई जैद तक पहुंची। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने महुआर से रियाजुल को दबोचा।अजीत सिंह की हत्या में तौकीर, जैद, रियाजुल को पुलिस ने जेल भेजा था। तौकीर जमानत मिलने पर छूट गया, लेकिन जैद अभी भी फैजाबाद की जेल में है।
जेल से छूटने के बाद तौकीर ने हब्बू व सद्दाम के साथ मिलकर सुलतानपुर में बैंक लूटा। इसके बाद 14 सितंबर को अंतू के जगेशरगंज बैंक में धावा बोला। पुलिस की मानें तो तौकीर बेझिझक होकर फायरिंग करता था। दोनों हाथों से वह पिस्टल चलाता था। सामने पडने पर पुलिस को भी कुछ नहीं समझता था। परिवार के लोगों की भी बात नहीं मानता था।
चिलबिला कोट में आठ मिनट तक ठांय-ठांय
बरामद अवैध कार्बाइन को चेक करता विशेषज्ञ।
- फोटो : pratapgarh
नगर कोतवाली के चिलबिला कोट में गुरुवार भोर में आठ मिनट तक बदमाशों व एसटीएफ की मुठभेड़ चली। गोलियों की तड़तड़ाहट से लोग सहम गए। करीब दस राउंड फायरिंग हुई। गोलियों का शोर थमने के बाद सन्नाटा पसरा रहा।
टार्च की रोशनी में पुलिसकर्मी खोजबीन करने लगे। इस दौरान एक लाख का इनामी तौकीर जमीन पर लुढक़ा मिला। आसपास के इलाकों की घेराबंदी कर पुलिस उसके साथी की तलाश करती रही, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। सडक़ पर बाइक, असलहे व कपड़े बिखरे पड़े थे। पुलिस के हूटर बजाते वाहनों से सन्नाटा टूटता रहा। उजाला होने पर आसपास के कुछ लोग पहुंचे, लेकिन किनारा कसते नजर आए।
गुरुवार भोर में करीब 3.40 बजे चिलबिला कोट के करीब डबल फाटक की ओर जाने वाले बाईपास पर ठांय-ठांय की आवाज सुन लोग सिहर गए। अनहोनी की आशंका में लोग घरों से बाहर नहीं निकले।
करीब चार बजे से पुलिस के वाहन हूटर बजाते पहुंचने लगे। सडक़ पर बाइक पड़ी थी। कुछ दूरी पर ही पिस्टल और कार्बाइन भी पड़ी थी। खोखे आसपास फैले हुए थे। एक कपड़े वाला बैग भी गिरा था। वह इलाका एसटीएफ ने घेर रखा था। एनकाउंटर में मारे गए बदमाश को एसटीएफ अपने वाहन से जिला अस्पताल पहुंचा चुकी थी।
करीब 4.25 पर पुलिस अधीक्षक एस आनंद पहुंचे। देखा तो वहां एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह, एएसपी सत्यसेन यादव, निरीक्षक हेमंत भूषण सिंह मौजूद थे। उन लोगों से जानकारी लेने के बाद एसपी ने फोरेंसिक टीम के साथ ही स्वाट टीम को मौके पर बुलाया।
शहर कोतवाल व सभी चौकी प्रभारी भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद फरार बदमाश की तलाश में कांबिंग करने के लिए भागे। बाइक काफी दूर तक घिसटने के बाद रुकी थी।
करीब 7 बजे आईजी प्रयागराज मोहित अग्रवाल घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद टीम को बधाई देने लगे। इलाके के संतोष दुबे का कहना था कि भोर में होने वाली फायरिंग से लग रहा था कि बदमाश किसी घटना को अंजाम देकर भाग रहे हैं।
टार्च की रोशनी में पुलिसकर्मी खोजबीन करने लगे। इस दौरान एक लाख का इनामी तौकीर जमीन पर लुढक़ा मिला। आसपास के इलाकों की घेराबंदी कर पुलिस उसके साथी की तलाश करती रही, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। सडक़ पर बाइक, असलहे व कपड़े बिखरे पड़े थे। पुलिस के हूटर बजाते वाहनों से सन्नाटा टूटता रहा। उजाला होने पर आसपास के कुछ लोग पहुंचे, लेकिन किनारा कसते नजर आए।
गुरुवार भोर में करीब 3.40 बजे चिलबिला कोट के करीब डबल फाटक की ओर जाने वाले बाईपास पर ठांय-ठांय की आवाज सुन लोग सिहर गए। अनहोनी की आशंका में लोग घरों से बाहर नहीं निकले।
करीब चार बजे से पुलिस के वाहन हूटर बजाते पहुंचने लगे। सडक़ पर बाइक पड़ी थी। कुछ दूरी पर ही पिस्टल और कार्बाइन भी पड़ी थी। खोखे आसपास फैले हुए थे। एक कपड़े वाला बैग भी गिरा था। वह इलाका एसटीएफ ने घेर रखा था। एनकाउंटर में मारे गए बदमाश को एसटीएफ अपने वाहन से जिला अस्पताल पहुंचा चुकी थी।
करीब 4.25 पर पुलिस अधीक्षक एस आनंद पहुंचे। देखा तो वहां एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह, एएसपी सत्यसेन यादव, निरीक्षक हेमंत भूषण सिंह मौजूद थे। उन लोगों से जानकारी लेने के बाद एसपी ने फोरेंसिक टीम के साथ ही स्वाट टीम को मौके पर बुलाया।
शहर कोतवाल व सभी चौकी प्रभारी भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद फरार बदमाश की तलाश में कांबिंग करने के लिए भागे। बाइक काफी दूर तक घिसटने के बाद रुकी थी।
करीब 7 बजे आईजी प्रयागराज मोहित अग्रवाल घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद टीम को बधाई देने लगे। इलाके के संतोष दुबे का कहना था कि भोर में होने वाली फायरिंग से लग रहा था कि बदमाश किसी घटना को अंजाम देकर भाग रहे हैं।
प्रतापगढ़ में 12 साल बाद एनकाउंटर
एसपी से शातिर बदमाश तौकीर के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए मिलते लोग। े
- फोटो : pratapgarh
जिले में 12 साल बाद पुलिस ने किसी बदमाश का एनकाउंटर किया। पहले एनकाउंटर में ढेर हुए बदमाशों से तौकीर काफी हार्ड अपराधी माना जा रहा था।
जिले में पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों के पैर में ही गोली लगती रही है।
वर्ष 2007 में बम फेंककर 12 से अधिक लोगों की हत्या कर चुके आतंक के पर्याय जंगू पाल पुलिस के लिए चुनौती बना था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रेमप्रकाश ने जंगू पाल को पकडने के लिए कोहड़ौर थाना क्षेत्र के मदाफरपुर में जाल बिछाया।
जंगू पाल को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। इसी वर्ष प्रयागराज के शातिर 10 हजार के इनामी बदमाश राकेश पाल को उपनिरीक्षक हेमंत भूषण सिंह ने रेलवे स्टेशन के पास मार गिराया था। इसके बाद फिर कोई एनकाउंटर नहीं हुआ।
बदमाशों के साथ पुलिस की लुकाछिपी का खेल चलता रहा। एसटीएफ के साथ पुलिस भी पैर में ही गोली मारती रही। यह पहली बार हुआ जब एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने कमान अपने हाथ में ली और जिले में तैनात रहे निरीक्षक हेमंत भूषण सिंह की मौजूदगी में तौकीर को मुठभेड़ में मार गिराया।
फिलहाल इस मुठभेड़ के बाद लोगों के मन में पुलिस के प्रति नकारात्मक सोच में बदलाव दिखाई देने लगा है। यहां तक कि सांसद संगमलाल गुप्ता आईजी मोहित अग्रवाल व एसएसपी अभिषेक सिंह को बधाई देने पुलिस लाइन पहुंचे। अपराध पीड़ित परिवारों ने भी अफसरों से मिलकर खुशी व्यक्त की।
जिले में पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों के पैर में ही गोली लगती रही है।
वर्ष 2007 में बम फेंककर 12 से अधिक लोगों की हत्या कर चुके आतंक के पर्याय जंगू पाल पुलिस के लिए चुनौती बना था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रेमप्रकाश ने जंगू पाल को पकडने के लिए कोहड़ौर थाना क्षेत्र के मदाफरपुर में जाल बिछाया।
जंगू पाल को पुलिस ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। इसी वर्ष प्रयागराज के शातिर 10 हजार के इनामी बदमाश राकेश पाल को उपनिरीक्षक हेमंत भूषण सिंह ने रेलवे स्टेशन के पास मार गिराया था। इसके बाद फिर कोई एनकाउंटर नहीं हुआ।
बदमाशों के साथ पुलिस की लुकाछिपी का खेल चलता रहा। एसटीएफ के साथ पुलिस भी पैर में ही गोली मारती रही। यह पहली बार हुआ जब एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने कमान अपने हाथ में ली और जिले में तैनात रहे निरीक्षक हेमंत भूषण सिंह की मौजूदगी में तौकीर को मुठभेड़ में मार गिराया।
फिलहाल इस मुठभेड़ के बाद लोगों के मन में पुलिस के प्रति नकारात्मक सोच में बदलाव दिखाई देने लगा है। यहां तक कि सांसद संगमलाल गुप्ता आईजी मोहित अग्रवाल व एसएसपी अभिषेक सिंह को बधाई देने पुलिस लाइन पहुंचे। अपराध पीड़ित परिवारों ने भी अफसरों से मिलकर खुशी व्यक्त की।
शरीफ घर से निकला बिगड़ैल औलाद
शव का पोस्टमार्टम कराने पहुंचे पिता।
- फोटो : pratapgarh
एनकाउंटर में मारा गया तौकीर शरीफ घर की बिगड़ैल औलाद था। संभ्रांत परिवार में शुमार होने के बावजूद तौकीर ने खानदान की कमाई पर कालिख पोत दी। जिसका गम उसके पिता के चेहरे पर साफ झलक रहा था। तौकीर के फेर में उसके पिता को कई बार पुलिस उठा ले गई।
एनकाउंटर में मारे गए तौकीर के पिता भुलियापुर निवासी हफीज अहमद ने अपना आवास आजाद नगर में बना रखा है। उनके मकान के बगल ही भाई मौलाना मतीन भी रहते हैं। भुलियापुर के लोगों की मानें तो हफीज ने स्नातक बीएससी से की है। इसके अलावा पालीटेक्रिक भी की।
एसडीओ विद्युत की ट्रेनिंग तक कर चुके हैं, लेकिन नौकरी के लिए आवेदन करने का समय आया तो उम्र निकल गई। वह अपने बच्चों की परवरिश भी बेहतर तरीके से करते थे।
नौकरी न मिलने पर पहले नर्सरी स्कूल खोला। इसके बाद छात्रों को मैथ की कोचिंग पढ़ाते थे। परिवार के लोगों की मानें तो तौकीर के तीन भाई और तीन बहनें हैं। दो भाई भाई इंजीनियरिंग करने के बाद प्राइवेट कंपनी में नोएडा और पूना में नौकरी करते हैं।
बहनों की शादी हो चुकी है। तौकीर व उसके छोटे भाई जैद ने भी हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 85 फीसदी अंक के साथ पास की थी। दस साल पहले तौकीर की मां का निधन हो गया।
परिवार को संभालने के साथ ही हफीज विकासखंड में तकनीकी सहायक की नौकरी करने लगे। तीन साल पहले जल्द अमीर बनने की ललक में तौकीर और जैद ने जरायम की दुनिया में कदम रख दिया।
एनकाउंटर में मारे गए तौकीर के पिता भुलियापुर निवासी हफीज अहमद ने अपना आवास आजाद नगर में बना रखा है। उनके मकान के बगल ही भाई मौलाना मतीन भी रहते हैं। भुलियापुर के लोगों की मानें तो हफीज ने स्नातक बीएससी से की है। इसके अलावा पालीटेक्रिक भी की।
एसडीओ विद्युत की ट्रेनिंग तक कर चुके हैं, लेकिन नौकरी के लिए आवेदन करने का समय आया तो उम्र निकल गई। वह अपने बच्चों की परवरिश भी बेहतर तरीके से करते थे।
नौकरी न मिलने पर पहले नर्सरी स्कूल खोला। इसके बाद छात्रों को मैथ की कोचिंग पढ़ाते थे। परिवार के लोगों की मानें तो तौकीर के तीन भाई और तीन बहनें हैं। दो भाई भाई इंजीनियरिंग करने के बाद प्राइवेट कंपनी में नोएडा और पूना में नौकरी करते हैं।
बहनों की शादी हो चुकी है। तौकीर व उसके छोटे भाई जैद ने भी हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 85 फीसदी अंक के साथ पास की थी। दस साल पहले तौकीर की मां का निधन हो गया।
परिवार को संभालने के साथ ही हफीज विकासखंड में तकनीकी सहायक की नौकरी करने लगे। तीन साल पहले जल्द अमीर बनने की ललक में तौकीर और जैद ने जरायम की दुनिया में कदम रख दिया।