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प्रतापगढ़ : उत्तराखंड में शहीद हुए योगेश तिवारी के गांव में हर किसी की आंखें नम, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारी

Sun, 03 Oct 2021 10:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 03 Oct 2021 10:54 PM IST
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Pratapgarh: Silence at the house of Yogesh Tripathi, who was martyred in Uttarakhand, the possibility of reaching the body in some time
Pratapgarh: शहीद योगेश त्रिपाठी। फाइल फोटो - फोटो : pratapgarh

उत्तराखंड के चमोली में भूस्खलन की चपेट में आने से शहीद हुए नेवी लेफ्टिनेंट योगेश त्रिपाठी के पैतृक गांव बलीपुर परसन में रविवार को मातम पसरा रहा। हर किसी की आंखें नम थीं। परिजनों का रो-रोकर बुरा था। लोग शहीद योगेश के शव के इंतजार में बैठे रहे। हालांकि देर रात तक शव पैतृक गांव नहीं पहुंचा था। दिनभर उनके घर पर शोक संवेदना प्रकट करने वालों का जमावड़ा रहा। 

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जेठवारा थाना क्षेत्र के बलीपुर परसन निवास डॉ. लालजी तिवारी के दो बेटों में योगेश त्रिपाठी छोटे थे। बड़े बेटे आशुतोष हरदोई में शिक्षक हैं। आशुतोष मां अन्नपूर्णा तिवारी, पत्नी, बच्चों व बहनों के साथ लखनऊ में रहते हैं। योगेश वर्ष 2010 में नेवी में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुए थे। वह इन दिनों पर्वतारोहण के लिए उत्तराखंड के चमोली जनपद में गए थे। दो अक्तूबर को 10 सदस्यों की टीम को 15000 फीट की ऊंचाई पर स्थित त्रिशूल पहाड़ी पर चढ़ना था।
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चमोली में भूस्खलन हो रहा था। दो दिन पहले अचानक योगेश अपनी टीम से बिछड़ गए। टीम के लोग स्थानीय प्रशासन की मदद से उनकी तलाश कर रहे थे। शनिवार की देर शाम उनका पार्थिव शरीर मलबे में दबा मिला। इसकी जानकारी होने पर परिजनों में कोहराम मच गया। भाई आशुतोष, मां अन्नपूर्णा व दो बहनों का रो-रो कर बुरा हाल है। शनिवार की रात को ही भाई आशुतोष लखनऊ से सभी को लेकर योगेश का शव लेने के लिए दिल्ली चले गए। घटना की जानकारी होने पर रविवार को पैतृक गांव बलीपुर पसरन में शोक की लहर दौड़ गई।
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शहीद योगेश के पैतृक आवास पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। योगेश के चाचा नरेंद्र नारायण तिवारी व सत्येंद्र तिवारी का रो-रो कर बुरा हाल था। हर किसी की आंखें नम थीं। योगेश के घर पर जमावड़ा लगा रहा। लोग योगेश के शव के इंतजार में दिनभर डटे रहे। हालांकि देर रात तक योगेश का शव नहीं आ सका था। चाचा नरेंद्र नारायण तिवारी ने बताया कि भोर तक योगेश का शव आने की उम्मीद है। 

Pratapgarh: Silence at the house of Yogesh Tripathi, who was martyred in Uttarakhand, the possibility of reaching the body in some time
pratapgarh : शहीद योगेश त्रिपाठी के घर पसरा सन्नाटा। - फोटो : pratapgarh
छोटी उम्र में बनाए कई विश्व रिकार्ड , पूर्व राष्ट्रपति अबुल कलाम ने किया था सम्मानित

चमोली में भूस्खलन में शहीद हुए बेल्हा के लाल योगेश त्रिपाठी के भीतर देशभक्ति का ख्वाब बचपन से ही हिलोरे मार रहा था। धीरे-धीरे उनका यह ख्वाब जुनून बन गया। 2001 में योगेश ने एनडीए की परीक्षा पास कर लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया। योगेश ने न सिर्फ ड्यूूटी की बल्कि साइकिलिंग, पर्वतारोहण, हॉकी, दौड़, निशानेबाजी की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर कई रिकार्ड बनाए। चार से अधिक विश्व रिकार्ड योगेश के नाम हैं। 

जेठवारा थाना क्षेत्र के बलीपुर परसन निवासी स्व. डॉ. राजेंद्र प्रसाद तिवारी के दो बेटों में योगेश छोटे थे। उनकी चार बहनें पूनम, नीलम, विजया व कात्यायनी हैं। शिक्षित परिवार में जन्म लिए योगेश ने कक्षा दो तक की पढ़ाई शमशेरगंज स्थित लल्लूराम विद्यालय से की। कक्षा सातवीं तक की पढ़ाई लालगंज तहसील के शीतलमऊ मांटेसरी स्कूल से की। कक्षा आठ में योगेश का चयन इंडियन मिलिट्री कॉलेज देहरादून में हो गया। इसके बाद योगेश एनडीए में सेलेक्ट हो गए। वह लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात थे। अपनी 11 साल की सेवा में योगेश ने कई रिकार्ड अपने नाम किए।

इसमें चार विश्व रिकार्ड भी शामिल हैं। 4512 मीटर ऊंची भागीरथी चोटी, 6137 मीटर ऊंची माउंट सैफी चोटी, 7077 मीटर ऊंची माउंटकून की चोटी पर चढ़कर देश का मान बढ़ाया था। वहीं 2016 में भारत की सबसे ऊंची चोटी 7677 मीटर माउंट कमिट पर भी फतह हासिल की। 50,70 एवं 80 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन दौड़ के साथ-साथ भारतीय निशानेबाजी में भी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। योगेश तिवारी को पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के द्वारा सम्मान मिला। उनके नाम बिना रुके सबसे ज्यादा पहाड़ी दर्रे पार करना, सबसे लंबी दूरी बिना रुके साइकिलिंग का भी रिकार्ड है। 

दिसंबर में होनी थी योगेश की शादी
शहीद लेफ्टिनेंट योगेश त्रिपाठी की दिसंबर में शादी होनी थी। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में जुटे थे। मां अन्नपूर्णा भाई आशुतोष व बहनें पूनम, विजया, कात्यानी भाई योगेश की शादी को लेकर उत्साहित थीं। शनिवार को योगेश की मौत की खबर मिलने पर परिवार की खुशियां काफूर हो गईं। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। 

नहीं पहुंची प्रशासनिक अफसरों की टीम
शहीद लेफ्टिनेंट योगेश त्रिपाठी के पैतृक गांव में सूचना के बाद भी रविवार को जिले के प्रशासनिक अफसरों की टीम नहीं पहुंची। न ही कोई जनप्रतिनिधि। रविवार को तहसीलदार जावेद अंसारी व लेखपाल सेवालाल मौके पर पहुंचे थे। थोड़ी देर तक वहां मौजूद रहे।   

राजकीय सम्मान के साथ होगा योगेश का अंतिम संस्कार 
शहीद योगेश का अंतिम संस्कार सोमवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा। सोमवार को सुबह पार्थिव शरीर पहुंचने की संभावना है। राजकीय सम्मान के साथ योगेश के शव का अंतिम  संस्कार किया जाना है।

नहीं है रास्ता, घर तक कैसे पहुंचेगा शहीद योगेश का शव 
शहीद योगेश के घर तक जाने वाले खड़ंजे पर अतिक्रमण है। जिसकी वजह से रास्ता अवरुद्ध है। शव वाहन शहीद के घर तक नहीं पहुंच पाएगा। रास्ते को लेकर ग्रामसभा के प्रेमनाथ पांडे, पवन कुमार शुक्ला उर्फ गोलू, सत्येंद्र तिवारी, विपिन तिवारी आदि ने तहसीलदार जावेद अंसारी से मांग की। उन्होंने बताया कि शहीद योगेश के घर तक जाने वाले रास्ते पर गांव के ही एक व्यक्ति ने अवैध निर्माण करा लिया है। जिसका मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
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