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इलाहाबाद-फैजाबाद रेलमार्ग पर ट्रेनों की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 14 Feb 2016 11:22 PM IST
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अयोध्या और संगम जैसे धार्मिक और तीर्थस्थलों को जोड़ने वाला इलाहाबाद-फैजाबाद रेलखंड उपेक्षा का शिकार है। कई साल पहले से दौड़ाई जा रही अप-डाउन की दो पैसेंजर और एक एक्सप्रेस ट्रेन की सुविधा ही आज भी है। इस रूट पर कोई नई ट्रेन नहीं चलाई गई। प्रतिदिन सैकड़ों यात्री सफर करते हैं। रेलवे की आय बढ़ाने वाले स्टेशनों की श्रेणी में शुमार प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन के मुसाफिरों को इससे काफी समस्याएं आ रही हैं।
इस रूट पर ये ट्रेनें दो दशक पहले से चलाई जा रही हैं। हर साल रेल बजट आता है मगर धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस रूट को हर बार उपेक्षित कर दिया जाता है। इस रूट की काफी सवारी निकलती है। पर्याप्त ट्रेन की सुविधा न होेने से अयोध्या और संगम जैसे तीर्थस्थलों का भ्रमण करने निकले मुसाफिरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही हाल डेली पैसेंजरों का है। समय पर ट्रेन न होने से उनको बस का सहारा लेना पड़ रहा है। जो गाड़ियां चल भी रहीं है वे अक्सर लेट रहती है। पैसेंजर होेने के नाते इनको रोड साइड के स्टेशनाें पर काफी देर तक रोका जाता है। डबल लाइन की सुविधा न होने से यह रूट काफी धीमा है। क्रासिंग के चक्कर में पैसेंजरों को अक्सर चिलबिला, विश्वनाथगंज में घंटों रोक दिया जाता है। जिससे यात्री समय पर अपने गंतव्य को नहीं पहुंच पाता है। ट्रेनों को रोके जाने से खफा मुसाफिर आए दिन स्टेशनों पर हंगामा करते हैं।
अगर आपको फैजाबाद जाना है तो सुबह पौने दस बजे के बाद दिन भर ट्रेन नहीं है। रात को आठ बजे सरयू एक्सप्रेस उसके बाद तो दूसरे दिन ही ट्रेन की सुविधा है। यही हाल इलाहाबाद रूट का है। सुबह सवा सात बजे के बाद इलाहाबाद जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं है। उसके बाद शाम को पांच बजे के बाद पैसेंजर है। हालांकि पीआरएल पैसेंजर आती है। मगर यह लखनऊ से प्रयागघाट तक जाती है। इलाहाबाद नहीं जाती है। ये ट्रेन भी अक्सर सुबह के बजाए दोपहर या शाम को आती है। यात्रियों का कहना है कि अगर इस रूट पर ट्रेन की सुविधा बढ़ा दी जाए तो काफी लोगों का भला हो जाएगा। रेलवे का राजस्व भी बढ़ेगा।
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मनकापुर से इलाहाबाद के बीच रोजाना चल रही सरयू एक्सप्रेस का स्टॉपेज बीच के स्टेशनों पर बढ़ाया जाए। सरयू का नाम एक्सप्रेस भले ही है मगर चलती है पैसेंजर की तरह। रोड साइड के कई स्टेशनों पर इसका ठहराव नहीं है। इससे लोग चेन पुलिंग करते हैं। भुपियामऊ, चिलबिला, कोहड़ौर, धीरगंज और सेवाइत जैसे स्टेशनों पर ठहराव नहीं किया गया। जबकि यहां से सफर करने वाले मुसाफिरों की तादाद सैकड़ों में है। इसमें नौकरी करने वाले, छात्र और व्यापारी हैं। स्टॉपेज न होने से मुसाफिरों को अपने स्टेशन पर उतरने के लिए चेन पुलिंग के लिए मजबूर होना पड़ता है। रोकने के चक्कर में मुसाफिरों का रेलकर्मियों से अक्सर विवाद भी हो जाता है। अगर रेलवे स्टॉपेज कर दे तो चेन पुलिंग की घटना से हो रहे घाटे से रेल उबर सकती है। साथ ही राजस्व भी बढ़ेगा।
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इस रूट पर ये ट्रेनें दो दशक पहले से चलाई जा रही हैं। हर साल रेल बजट आता है मगर धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस रूट को हर बार उपेक्षित कर दिया जाता है। इस रूट की काफी सवारी निकलती है। पर्याप्त ट्रेन की सुविधा न होेने से अयोध्या और संगम जैसे तीर्थस्थलों का भ्रमण करने निकले मुसाफिरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही हाल डेली पैसेंजरों का है। समय पर ट्रेन न होने से उनको बस का सहारा लेना पड़ रहा है। जो गाड़ियां चल भी रहीं है वे अक्सर लेट रहती है। पैसेंजर होेने के नाते इनको रोड साइड के स्टेशनाें पर काफी देर तक रोका जाता है। डबल लाइन की सुविधा न होने से यह रूट काफी धीमा है। क्रासिंग के चक्कर में पैसेंजरों को अक्सर चिलबिला, विश्वनाथगंज में घंटों रोक दिया जाता है। जिससे यात्री समय पर अपने गंतव्य को नहीं पहुंच पाता है। ट्रेनों को रोके जाने से खफा मुसाफिर आए दिन स्टेशनों पर हंगामा करते हैं।
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अगर आपको फैजाबाद जाना है तो सुबह पौने दस बजे के बाद दिन भर ट्रेन नहीं है। रात को आठ बजे सरयू एक्सप्रेस उसके बाद तो दूसरे दिन ही ट्रेन की सुविधा है। यही हाल इलाहाबाद रूट का है। सुबह सवा सात बजे के बाद इलाहाबाद जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं है। उसके बाद शाम को पांच बजे के बाद पैसेंजर है। हालांकि पीआरएल पैसेंजर आती है। मगर यह लखनऊ से प्रयागघाट तक जाती है। इलाहाबाद नहीं जाती है। ये ट्रेन भी अक्सर सुबह के बजाए दोपहर या शाम को आती है। यात्रियों का कहना है कि अगर इस रूट पर ट्रेन की सुविधा बढ़ा दी जाए तो काफी लोगों का भला हो जाएगा। रेलवे का राजस्व भी बढ़ेगा।
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मनकापुर से इलाहाबाद के बीच रोजाना चल रही सरयू एक्सप्रेस का स्टॉपेज बीच के स्टेशनों पर बढ़ाया जाए। सरयू का नाम एक्सप्रेस भले ही है मगर चलती है पैसेंजर की तरह। रोड साइड के कई स्टेशनों पर इसका ठहराव नहीं है। इससे लोग चेन पुलिंग करते हैं। भुपियामऊ, चिलबिला, कोहड़ौर, धीरगंज और सेवाइत जैसे स्टेशनों पर ठहराव नहीं किया गया। जबकि यहां से सफर करने वाले मुसाफिरों की तादाद सैकड़ों में है। इसमें नौकरी करने वाले, छात्र और व्यापारी हैं। स्टॉपेज न होने से मुसाफिरों को अपने स्टेशन पर उतरने के लिए चेन पुलिंग के लिए मजबूर होना पड़ता है। रोकने के चक्कर में मुसाफिरों का रेलकर्मियों से अक्सर विवाद भी हो जाता है। अगर रेलवे स्टॉपेज कर दे तो चेन पुलिंग की घटना से हो रहे घाटे से रेल उबर सकती है। साथ ही राजस्व भी बढ़ेगा।