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गोदाम पहुंचते-पहुंचते कम हो जाता है खाद्यान्न

Thu, 11 Feb 2016 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Thu, 11 Feb 2016 11:17 PM IST
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कोटेदारों को मिलने वाले राशन में भी घपला किया जा रहा है। हर बोरे में राशन उन्हें कम मिलता है। छोटे से छोटे कोटेदार को लगभग 50 किलो राशन कम मिलता है। जब वह इसे कार्डधारकों को बांटते हैं तो राशन काफी कम हो जाता है। इससे उन्हें घटतौली करनी पड़ती है।
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गोदाम में किसानों का ही दिया गेहूं और चावल रखा होता है। राइसमीलर के यहां से चावल और किसानों से भी गेहूं की खरीद के दौरान वजन पूरा करके लिया जाता है। गोदाम से ही कोटेदारों को राशन का आवंटन होता है। बावजूद इसके जब कोटेदारों की दुकान पर राशन पहुंचता है तो हर बोरे में राशन उन्हें कम मिलता है। अब यह राशन कहां गायब होता है यह तो नहीं पता, लेकिन इस घपले के कारण कार्डधारकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। राशन के वितरण के दौरान कोटेदार घटतौली करके इसे पूरा करते हैं।
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यही नहीं अगर कभी अधिकारियों के सामने इसका वितरण होता है तो राशन कम पड़ जाता है। उस समय इसकी भरपाई कोटेदार को अपनी जेब से करनी पड़ती है। तौल के दौरान एक बोरे में तीन से पांच किलो तक कम राशन मिलता है। गोदाम से ये बोरे सही सलामत निकलते हैं लेकिन रास्ते में  राशन कम हो जाता है। 10 बोरे में 30 से 40 किलो तक राशन कम हो जाता है। ऐसे में उन्हें अपना फायदा भी देखना होता है।  इसका सारा बोझ आम आदमी पर पड़ता है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में राशन का वितरण और दुकानों का संचालन एसडीएम के हाथ में होता है। शहर में इस तरह की कोई समस्या नहीं मिलती। यदि ग्रामीण क्षेत्र में समस्या पैदा हो रही है तो शिकायत करें। जांच कराकर कार्रवाई होगी।
देवेंद्र प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी।
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