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किशोरियों को संक्रामक रोगों से बचाएगी ‘दिशा’
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 20 Jan 2016 11:21 PM IST
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किशोरियों को संक्रामक रोगों से बचाने के ‘दिशा’ की पहल कारगर साबित हो सकती है। दरअसल, माहवारी के समय असावधानी बरते जाने से किशोरियों और महिलाओं में होने वाले संक्रामक रोगों से बचाने के लिए शासन ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत किशोरियों और महिलाओं को नि:शुल्क नैपकिन उपलब्ध कराना है। जिले स्तर पर ही नैपकिन का निर्माण कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से नैपकिन गांव के हर परिवार तक पहुंचाया जाएगा।
जिले की 90 प्रतिशत महिलाएं संक्रमण के चलते गंभीर रोगों से ग्रसित हैं। इसमें सबसे बड़ा खतरा माहवारी के दिनों में होता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो महिलाओं में संक्रमण का रोग असुरक्षित माहवारी से फैलता है। महिलाएं अगर माहवारी के दिनों में नैपकिन का प्रयोग करें, तो काफी हद तक संक्रामक बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग के इस सुझाव को शासन ने अमल में लेते हुए पंचायत उद्योग को प्रोत्साहित कर नैपकिन उत्पादन की जिम्मेदारी सौंपी है।
विकास भवन स्थित पंचायत उद्योग ने शासन की पहल पर नैपकिन का उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। खुले बाजार में सस्ते दर पर बिकने वाली नैपकिन को कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है या दुकानदार बेच सकता है। लगभग दस लाख रुपये की लागत से स्थापित इकाई में एक दिन में लगभग बारह सौ पैड तैयार करने की क्षमता है। फिलहाल, अभी स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से गांव की महिलाओं तक नैपकिन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि प्रदेश में यह इकाई अपने तरह की नई है। इससे महिलाओं को जहां रोजगार मिल रहा है, वहीं गांव की महिलाओं को सस्ता नैपकिन आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
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पंचायत उद्योग से बनने वाले नैपकिन की पहली खेप कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाली बालिकाओं के बीच वितरित की गई है। एडीओ अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बीएसए कार्यालय की मांग पर यह उपलब्ध कराया गया है। जल्द ही स्वास्थ्य विभाग में सप्लाई की जाएगी। पंचायत उद्योग में तैयार होने वाली नैपकिन की प्रगति की जानकारी लेने प्रतिदिन सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह जाते हैं। नैपकिन तैयार करने में लगीं महिलाओं और मशीनों का निरीक्षण करने के बाद अधिक उत्पादन पर जोर देते हैं।
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जिले की 90 प्रतिशत महिलाएं संक्रमण के चलते गंभीर रोगों से ग्रसित हैं। इसमें सबसे बड़ा खतरा माहवारी के दिनों में होता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो महिलाओं में संक्रमण का रोग असुरक्षित माहवारी से फैलता है। महिलाएं अगर माहवारी के दिनों में नैपकिन का प्रयोग करें, तो काफी हद तक संक्रामक बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग के इस सुझाव को शासन ने अमल में लेते हुए पंचायत उद्योग को प्रोत्साहित कर नैपकिन उत्पादन की जिम्मेदारी सौंपी है।
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विकास भवन स्थित पंचायत उद्योग ने शासन की पहल पर नैपकिन का उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। खुले बाजार में सस्ते दर पर बिकने वाली नैपकिन को कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है या दुकानदार बेच सकता है। लगभग दस लाख रुपये की लागत से स्थापित इकाई में एक दिन में लगभग बारह सौ पैड तैयार करने की क्षमता है। फिलहाल, अभी स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से गांव की महिलाओं तक नैपकिन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि प्रदेश में यह इकाई अपने तरह की नई है। इससे महिलाओं को जहां रोजगार मिल रहा है, वहीं गांव की महिलाओं को सस्ता नैपकिन आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
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पंचायत उद्योग से बनने वाले नैपकिन की पहली खेप कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाली बालिकाओं के बीच वितरित की गई है। एडीओ अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बीएसए कार्यालय की मांग पर यह उपलब्ध कराया गया है। जल्द ही स्वास्थ्य विभाग में सप्लाई की जाएगी। पंचायत उद्योग में तैयार होने वाली नैपकिन की प्रगति की जानकारी लेने प्रतिदिन सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह जाते हैं। नैपकिन तैयार करने में लगीं महिलाओं और मशीनों का निरीक्षण करने के बाद अधिक उत्पादन पर जोर देते हैं।