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व्हाट्स एप पर पंचायत, समस्याओं का निस्तारण भी
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Wed, 16 Sep 2015 11:24 PM IST
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जमाना हाईटेक हो गया है। ट्विटर, फेसबुक के बाद अब व्हाट्स एप का समय आ गया है। अब गांवों में भी तमाम पढ़े लिखे लोगों ने इसका उपयोग शुरू कर दिया है। इस तकनीक का उपयोग शहाबपुर के एक युवक ने लीक से हटकर गांव की समस्याओं को निपटाने के लिए करना शुरू कर दिया। उनका यह प्रयास रंग भी ला रहा है। हर दिन सुबह-शाम व्हाट्स एप पर पंचायत होती है और समस्याओं का निस्तारण भी।
विकास खंड कुंडा के इस गांव का नाम है शहाबपुर। गांव के समाजसेवी हैं राजेश प्रभाकर सिंह। उन्होंने भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के एक साथ बैठने, गांव के बारे में विचार करने के साथ ही विकास कार्यों के लिए व्हाट्स एप का प्रयोग करना शुरू किया। उन्होंने युवा दल शहाबपुर के नाम से एक ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में 70 से अधिक युवा सदस्य हैं। गांव के काम के लिए युवाओं को इकट्ठा करना है तो व्हाट्स एप के माध्यम से सूचना दे दी जाती है।
यही नहीं ग्रुप पर पंचायत भी लगती है। बिजली, पानी और सड़क के लिए चर्चा भी होती है। इसके साथ ही उसके निदान के लिए श्रमदान और चंदा भी इकट्ठा किया जाता है। नियत समय पर चंदा लेकर युवा स्वयं हाजिर होते हैं और श्रमदान कर समस्या का निस्तारण करते हैं। इस ग्रुप की देन है कि गांव की नहर में पानी आ रहा है। संपर्क मार्ग दुरुस्त दिखते हैं। कई काम ये लोग मिलकर कर लेते हैं। छोटी मोटी समस्याओं, लड़ाई-झगड़े का निदान भी ग्रुप के माध्यम से हो जाता है। शिक्षा और नौकरी के बारे में भी इसी पर चर्चा हो जाती है।
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विकास खंड कुंडा के इस गांव का नाम है शहाबपुर। गांव के समाजसेवी हैं राजेश प्रभाकर सिंह। उन्होंने भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के एक साथ बैठने, गांव के बारे में विचार करने के साथ ही विकास कार्यों के लिए व्हाट्स एप का प्रयोग करना शुरू किया। उन्होंने युवा दल शहाबपुर के नाम से एक ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में 70 से अधिक युवा सदस्य हैं। गांव के काम के लिए युवाओं को इकट्ठा करना है तो व्हाट्स एप के माध्यम से सूचना दे दी जाती है।
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यही नहीं ग्रुप पर पंचायत भी लगती है। बिजली, पानी और सड़क के लिए चर्चा भी होती है। इसके साथ ही उसके निदान के लिए श्रमदान और चंदा भी इकट्ठा किया जाता है। नियत समय पर चंदा लेकर युवा स्वयं हाजिर होते हैं और श्रमदान कर समस्या का निस्तारण करते हैं। इस ग्रुप की देन है कि गांव की नहर में पानी आ रहा है। संपर्क मार्ग दुरुस्त दिखते हैं। कई काम ये लोग मिलकर कर लेते हैं। छोटी मोटी समस्याओं, लड़ाई-झगड़े का निदान भी ग्रुप के माध्यम से हो जाता है। शिक्षा और नौकरी के बारे में भी इसी पर चर्चा हो जाती है।
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